जमरात

जमरात हज का एक प्रमुख कर्म है, जिसमे तीन स्थम्भों पर कंकरियांमारी जाती है| यह तीन स्तंभ शैतान को सूचित करते है|हज के कर्म में हाजी इन तीन स्थम्भो पर छोटेछोटे कंकरियां मारता है|यह स्थान मिना में है| कंकरियां मुज्दलिफह से ली जाती है|काँकरियों को मिना में भी ले सकते है|कंकरियां मारने के कर्म को रमी कहा जाता है|इसमें सात (7) कंकरियां मारी जाती है|

विषय सूची

 

ऐतिहासिक प्रमुखता

जमरात पर कंकरियां मारना हज के अनिवार्य कर्म में से है|जो भी हज करता है, उसे यह कर्म करना चाहिए| यह कर्म सुन्नत द्वारा प्रमाणित है|

इसका ऐतिहासिक प्रमाण यह है कि, इब्राहीम अलैहिस्सलाम को जब शैतान दिखा तो आप ने उस पर तीन बार कंकरियां मारी|जब भी इब्राहीम अलैहिस्सलाम को शैतान दिखाई देता, जिब्रईल अलैहिस्सलाम उन्हें कंकर मारने को कहते|इस तरह इस कर्म की प्रमुखता है|[1] [2]

 

हदीस

इब्न अब्बास रज़िअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, रसूलुल्लाहनेअल फद्ल को अपने पीछे बिठाया| अल फद्ल ने जमरह पर जब तक कंकरियां न मारी तब तक तल्बिया कहते रहे|[सहीह बुखारी : 1685 & सहीह मुस्लिम : 1282]

अब्दुल्लाह रज़िअल्लाहुअन्हु बड़े जमरात के पास आये और काबा को बायें ओरतथामिना को दायें ओर रखकर, सात कंकरियां मारी और कहा : सूरह बखरह जिन पर नाज़िल हुई (मुहम्मद) नेइस तरह कंकरियां मारी|[सहीह बुखारी : 1748 & सहीह मुस्लिम : 1296]

इब्न उमर रज़िअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, उन्होंने जमरात अल दुन्या (खैफ मस्जिद के करीब का जमरात) पर सात कंकर मारे, और हर कंकर के बाद तल्बिया कहा| उसके बाद वह ज़मीन की सतह पर आकर, क़िबला रुख हुए और हाथ उठाकर बहुत देर तक दुआ की|फिर उन्होंने बीच के स्तंभ पर कंकरियां मारी| उसके बाद वह बायें ओर जाकर,क़िबला रुख हुए और हाथ उठाकर बहुत देर तक दुआ की|फिर उन्होंने जमरात अल अख्बा पर घाटी के बीच से कंकरियां मारी, किन्तु उसके बगल में नहीं ठहरे|फिर वह वहाँ से चले और कहा : मैंनेअल्लाह के रसूल को इसी तरह करते हुए देखा|[सहीह बुखारी : 1751]

 

जमरात के प्रकार (क़िस्म)

पहला(छोटा) जमरात(स्तंभ) को जमरा ए उला (सुघरा) कहते है, जोअल खैफ मस्जिद के समीप है, दूसरा(मध्य)जमरात - जमरा ए वुस्ता -(स्तंभ), पहले जमरात से 155 मीटर की दूरी पर है| तीसरा(बड़ा) जमरात(स्तंभ) और 155 मीटर आगे है, जिसे जमरा ए उखबा या कुबरा कहा जाता है|हाजी(तीर्थ यात्री) छोटे जमरा को कंकरी मारने से आरम्भ करके, फिर मध्य जमरा और अंत में बड़े जमरा को मारते है|[3]

 

इस्लामी विद्वाम्सों का अवलोकन

इब्न अल मुन्धिर रज़िअल्लाहुअन्हु ने कहा : सर्वसम्मति से यह स्वीकार कर लिया गया है के, यदि कोई हाजी जमरात पर कंकरियां तशरीख के दिनों में सूर्य पराकाष्टा पर आने के बाद (दोपहर) में मारे तो उचित (valid) है|[इब्न अल मुन्धिर की अल इज्मा (11)]

इब्न हज्म रज़िअल्लाहुअन्हु ने कहा : सब ने स्वीकार किया के, क़ुरबानी(ईद) के दिन के बाद के तीन दिनों में जमरात पर कंकरियां मारना चाहिए|जिसने इन दिनों में दिन के मध्य भाग  (दोपहर) में कंकरियां मारी, वह स्वीकृत है|[इब्न हज्म की मरातिब अल इज्मा (46)]

 

साधारण भूल, दोष(गलतियाँ)

जमरात पर कंकरियां मारते समय लोग कई भूल (गलतियाँ) करते है –

1.          कई लोग समझते है के,मुज्दलिफा से लिए हुए कंकरियां जमरात पर मारना ही सही है, नहीं तो वह स्वीकार नहीं होगा|इसलिए लोग मिना को जाने से पहले मुज्दलिफा में कंकरियां जमा करने में बहुत कष्ट उठाते है|यह गलत फहमी है|क्यों के कंकरियां कही से भी ली जा सकती है|मुज्दलिफा से, मिना से या कही और से|असल बात यह है कि, वह कंकरियां हो|

रसूलुल्लाहद्वारा कोई ऐसा प्रमाण नहीं है कि, आप ने कंकरियां मुज्दलिफा से लिया| इसलिएयह सुन्नत नहीं है, न ही यह अनिवार्य (फ़र्ज़) है|सुन्नत वह है जो अल्लाह के रसूल नेकहा या किया या करने दिया|इनमे से कोई चीज़ काँकरियां मुज्दलिफा से लेने के बारे में प्रमाणित नहीं है|

2.          कुछ लोग जब कंकरियां उठाते है तो, उसे धोते है| यह सोचकर कि, उस पर किसी ने मूत्र किया हो या वह साफ़ नहीहै|यह बिदत (INNOVATION, नवाचार) है, क्यों के रसूलुल्लाह ने ऐसा नहीं किया|अल्लाह के रसूल ने जिस कार्य को नहीं किया, उसे उपासना (इबादत) समझकर करना बिदत है|

3.          कुछ लोग जमरात (स्तंभ) कोशैतान समझते है और वह बहुत उत्तेजिततथा क्रोधितहो जाते है|ऐसा व्यवहार करते है, जैसा की शैतान उनके सामने हो|इससे कुछ गंभीरदोष(गलतियाँ) हो जाती है, जैसाकि:

अ) यह ग़लत अभिप्राय है|हमइसे(जमरात को) अल्लाह की उपासना (इबादत) और अल्लाह के रसूल की सुन्नत समझ कर करते है|यदि कोई किसी चीज़ को अल्लाह की उपासना (इबादत) समझ कर करे और उसके लाभ उसे न पता हो तो, यह बड़ी चिंता का विषय है|

आ)         जब कोई भावात्मक तथा क्रोधित हो जाता है तो, वह किसी की परवाह नहीं करता और दूसरों को उसके कारण हानि पहुँच सकती है और वह एक पागल ऊँट की तरह व्यवहार करने लगता है|[5]

 

रमी के अनिवार्य कार्य

1.          अल्लाह ताला की प्रसन्नता का उद्देश्य तथा संकल्प मन में होना चाहिए, उसेशब्द द्वारा कहने की आवश्यकता नहीं है|यह सोचकर जमरात पर सात कंकरियां मारना चाहिए कि, वह अल्लाह की उपासना (इबादत) कर रहा है और हज के विधि शास्त्र का पालन कर रहा है|

2.          हाजी को चाहिए की वह सात कंकरियां मारे| (वह अधिक बड़े,न ही अधिक छोटे हो, किन्तुहाथ की उंगली के नाखून के बराबर हो)|

3.          कंकरियां एक एक करके मारना चाहिए| दो एक साथ न फेंके| यदि ऐसा किया तो उसे एक ही गिना जायेगा|[6]

 

आधार

[1] http://islamqa.info/en/125711

[2] http://www.iqrasense.com/hajj/Jamrat-the-hajj-ritual-of-stoning-the-devil-shaytan.html

[3] http://www.hajinformation.com/main/k40.htm

[5] http://islamqa.info/en/34420

[6] http://islamqa.info/en/ref/36436/stoning 

65 दृश्य
हमें सही कीजिये या अपने आप को सही कीजिये
.
टिप्पणियाँ
पृष्ठ का शीर्ष