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सई

सई अरबी शब्द है, यह एक धार्मिक संस्कार है जो हज तथा उमरह (तीर्थ यात्रा) के समय किया जाता है| यह कर्म मक्का में स्थित सफा, मरवा पहाड़ियों के मध्य किया जाता है (दो पहाड़ियों के मध्य चला जाता है)| इस्लाम धर्म में, हज तथा उमरह में इस कार्य को करना अनिवार्य है|

इस कार्य में मनुष्य को सफा, मरवा पहाड़ियों के मध्य सात चक्कर लगाना है| हाजेरा (इब्राहीम अलैहिस्सलाम की पत्नी) ने अपने पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम के लिए पानी खोजते हुए इन दो पहाड़ियों के मध्य चक्कर लगाये – यह उसका प्रतीक है|

विषय सूची

भावार्थ

 

सफा से मरवा तक सात चक्कर लगाने को सई कहते है| अतः यह चक्कर सफा से आरम्भ होकर मरवा पर अंत होते है|

हज तथा उमरह के अनिवार्य कार्य में यह चौथा है| यदि इसे कोई जान बूझ कर छोड़े तो उसका हज अवैध हो जाता है, चाहे यह नियम उसे पता हो या न हो|

तवाफ तथा उसकी नमाज़ के उपरांत सई करना चाहिए| सई में मनुष्य जिस ओर जा रहा है, उस ओर मुख करे, यद्यपि (वरना) वह अवैध हो जायेगा| इधर उधर पलटने की अनुमति है|

तवाफ के पश्चात नामज़ तथा सई में बिना कारण के विलम्ब न करे| यदि अत्यधिक गर्मी के कारण थक जाये, तो शाम तक उसे विलम्ब किया जा सकता है| किन्तु अगले दिन तक नहीं|

जिस तरह तवाफ में चक्कर की गिनती में अनुमान हो तो फिर से लगाना है, उसी तरह सई में भी करना चाहिए|    

 

इतिहास

 

हज तथा उमरह करने वाले मुस्लिम सफा, मरवा के मध्य बीच में सात चक्कर लगाना (चलना) चाहिए| सफा, मरवा दो पहाड़ है, जो काबा के समीप है| यह एक माँ अपने पुत्र के लिए किया हुआ बलिदान का प्रतीक है|

वह माँ हाजिर अलैहिस्सलाम थे| आपके पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम है| अल्लाह के रसूल इब्राहीम अलैहिस्सलाम आपके पति तथा इस्माईल अलैहिस्सलाम के पिता है|

यह घटना उस समय घटी जब अल्लाह के आज्ञानुसार इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने हाजिर अलैहिस्सलाम तथा आप के पुत्र इस्माईल अलैहिस्सलाम को मक्का के पहाड़ियों में छोड़ा|

जब हाजिर अलैहिस्सलाम के पास जो पानी था, वह समाप्त हो गया तो उन्होंने सफा पहाड़ पर चढ़ा, इस आशा में कि. कोई दिखाई दे| सारा प्रदेश सूना था| वह नीचे उतरे और मरवा पहाड़ की ओर गए| इस तह आप ने उन दो पहाड़ियों के मध्य कई चक्कर लगाये| फिर अपने पुत्र इस्माईल को देखने के लिए गए| वह मृत्यु के समीप थे| आप को न शिशु के लिए न अपने लिए पानी प्राप्त हुआ|

वह अपने पुत्र को मरता हुआ न देख पायी| कोई भी माँ न देख पाएगी| उन्होंने अपने आप से कहा, ‘यदि मै जाकर देखू, तो कोई नज़र आयेंगे|’ फिर आप सफा पहाड़ पर गयी और बहुत समय तक देखि, पर कोई नज़र नहीं आये| इस तरह आप ने उस तपती हुई गर्मी में सफा तथा मरवा के मध्य सात चक्कर लगाये|      

 

सई के मुख्य कर्म

 

सफा तथा मरवा पहाड़ के मध्य हर चक्कर में दोनों पहाड़ पर चढ़ना तथा उतरना उचित है| तहारत (शुध्ध, पवित्र) से रहे तो बेहतर है, यदि न हो तो कोई हर्ज नहीं, यह अनिवार्य नहीं है|

यदि कोई स्वयं सई न कर पाए या किसी के बाजू पर बैठकर भी न कर पाए या wheel chair पर भी न कर पाए तो वह किसी और को अपनी सई के लिए नियमित कर सकता है|

बीच में कुछ समय के लिए सफा या मरवा पर विश्राम कर सकते है| सफा, मरवा के मार्ग में कुछ हरी रंग की बत्तियां लगी हुई है, उनके बीच पुरुष कुछ तेज़ भागे (jogging), महिलाएं तेज़ चले| इसे हरवला कहते है|

 

सई में अनुशंसित (मुस्तहब – सिफारिशी) कार्य

 

1.   तहारत से रहे (वज़ू या घुसल)|

2.   सई आरम्भ करने से पहले, हजरे अस्वद को चूमे या सलाम करे|

3.   सई से पहले ज़म ज़म पिए और अपने शरीर पर डाले|

4.   हजरे अस्वद के सामने वाले द्वार ‘बाबुस सफा’ से सफा में प्रवेश करे|

5.   शांति के साथ जाये|

6.   अल्लाह को धन्यवाद (शुक्र अदा) करे और उसकी प्रशंसा करे|

7.   चलते समय दुआ और ज़िक्र करे| दुआ के लिए मानसिक ए हज देखे|

 

सई का व्यवहार, ढंग (तरीका)

 

रसूलुल्लाह ने कहा: सई करिये, अल्लाह ने इसे आप पर अनिवार्य किया है| साई के मार्ग के मध्य में कुछ दूर तक हरी बत्तियां लगी हुई है| हरी बत्ती का मार्ग आरम्भ होते ही, पुरुष कुछ तेज़ चले, फिर जब हरी बत्ती का मार्ग समाप्त हो जाये तो साधारण ढंग से चले| रसूलुल्लाह के काल में इस स्थान पर एक सूखी नदी थी, उस पर छोटे छोटे पथ्थर होते थे, आप ने कहा: (यह नदी पार करने के लिए शक्ति की आवश्यकता है)| फिर वह मरवा पहाड़ी पर चढ़ कर जिस तरह सफा पर किया था, उसी तरह करेगा- खिबला मुख होना, तकबीर तथा तहलील कहना, दुआ करना- इससे एक चक्कर सम्पूर्ण होता है|

इसी तरह वह सात चक्कर करेगा तथा अंत मरवा पहाड़ी पर होगा|

अल मरवा पर सातवा चक्कर समाप्त करने के पश्चात शिरोमुंडन करके, हज का उमरह अंत करता है| इहराम में जो विषय उसके लिए अवैध (हराम) हो गए थे, वह सब अब वैध (हलाल) हो जाते है| वह 8 ज़िल हिज्जह तक – यौमे तशरीक तक - बिना इहराम के रहेगा|   

जो हज से पहले उमरह का संकल्प न करे और इहराम बांधे – हदी (बलि का पशु) पवित्र स्थान के बाहर से न लाये, वह भी इहराम से बाहर आ जाये – यह अल्लाह के रसूल के आज्ञा का पालन है| जो लोग अपने साथ बलि का पशु लाये हो, वह इहराम की स्थिति में ही रहे और 10 ज़िल हिज्जाह (यौमुन नहर) के दिन जमरात पर कंकरी मारने के पश्चात इहराम से बाहर आये|

 

सई में करने वाली दुआ

 

सई के स्थान पर मध्य में कुछ हरी बत्तियां लगी हुई है| सई करते समय पुरुष लोग उस स्थान पर कुछ तेज़ दौडे, यह सुन्नत है| सई में पढने के लिए, कुछ प्रत्येक दुआयें नहीं है| किन्तु अल्लाह की प्रशंसा करे, कुरआन पढ़े तथा अल्लाह से दुआ करें|

 

सई में होने वाले भूल

 

1.   सफा तथा मरवा पहाड़ पर चढ़ते समय अनेक लोग काबा मुख होकर “अल्लाहु अकबर” कहते हुए, नमाज़ की तकबीर की तरह हाथ उठाते है| ऐसा करना उचित नहीं है| क्यों कि अल्लाह के रसूल ने ऐसा नहीं किया| आप  केवल दुआ के समय ही हाथ उठाया करते थे| यहाँ पर काबा रुख होकर अल्लाह ताला की प्रशंसा कर सकते है, अल्लाह से दुआ मांग सकते है| आप ने सफा तथा मरवा पर जो ज़िक्र किये है, वह करना उचित है|

2.   दोनों पहाड़ियों के मध्य का पूरा मार्ग तेज़ दौड़ते है| यह उचित नहीं है| केवल हरी बत्तियों के मध्य तेज़ दौड़ना चाहिए| बत्तियों के बाद के मार्ग पर साधारण ढंग से चले|          

 

आधार

Rituals of hajj and umrah by Shaik Naseer uddin Albani(english)

 

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