Send an article  |  Print   |  ../file-system/small/pdf   |   RSS   |  

मस्जिद ए हरम

मुस्लिम (विश्वासी) जिस स्थान पर अल्लाह की आराधना (नमाज़) करते है, उसे मस्जिद कहा जाता है| इस्लामी इतिहास से हमें पता चलता है कि, मस्जिद सारे समुदाय के लिए एक केंद्र है| प्रस्तुत समय में, प्रत्येक रूप से मुस्लिम देशों में हर गली कूचे में मस्जिद होती है| इससे लोगो को नमाज़ पढने में सुविधा होती है|

मस्जिद ए हरम, संसार के सारे मस्जिद पर विशिष्ठता रखती है| संसार के सारे मस्जिद में सबसे प्रत्येक मस्जिद ए हरम (मक्का की मस्जिद) है| उसके बाद मस्जिद ए नबवी (मदीना में स्थित नबी की मस्जिद), फिर मस्जिद ए अख्सा (फलस्तीन की बैतुल मख्दिस) है|

इन तीन मस्जिदों को आराधना (इबादत) के संकल्प से जा सकते है| अल्लाह के रसूल ने कहा: “तीन मस्जिद के सिवाय किसी और मस्जिद को आराधना (इबादत) के संकल्प से न जाना चाहिए| वह तीन यह है: मस्जिद ए हरम, मस्जिद ए नबवी, मस्जिद ए अख्सा| (सहीह बुखारी:Vol 2:1189, Vol 3:1996 & सहीह मुस्लिम:1397) [1]

विषय सूची

चरित्र (इतिहास)


मस्जिद ए हरम (पवित्र मस्जिद) मक्का शहर में है, जो सऊदी अरब में स्थित है| इस मस्जिद का इतिहास इब्राहीम तथा इस्माईल अलैहिमुस्सलाम से जा मिलता है| मक्का वह स्थान है, जहाँ पर मुहम्मद का जन्म हुआ और इस्लाम सारे संसार में यहाँ से ही रौशन हुआ|

इसका निर्माण

अल्लाह ने कुरआन में कहा: “और याद करो जब इबराहीम और इसमाईल इस घर की बुनियादें उठा रहे थे...” (कुरआन सूरह बखरह 2:127)

वहिब इब्न मुन्हिब ने कहा: “...इसे इब्राहीम ने निर्माण किया, फिर amalekites (अमलेकाइट्स) ने (पुनरनिर्माण) किया, फिर जुरहम, फिर खुसै इब्न किलाब ने किया| खुरैश द्वारा इसका पुनरनिर्माण किया जाना बहुत चर्चित है| वह इसका निर्माण वहां के वादी के पत्थर से करने लगे, उसे वह अपने कंधों पर रख कर लाते थे| उन्होंने 20 cubits ऊंचा काबा का निर्माण किया| काबा का पुनरनिर्माण तथा वही (दैव वाणी) के अवतरण (नाजिल) के मध्य पांच वर्ष का अंतर था| काबा का निर्माण तथा हिजरत (प्रवासन) के मध्य 15 वर्ष का अंतर था| अब्दुल रज्ज़ाख ने मुअम्मर, उन्होंने अब्दुल्लाह इब्न उस्मान, उन्होंने अबुल तुफैल, उन्होंने मुअम्मर, उन्होंने अल ज़ुहरी से उल्लेख किया: ‘वह (खुरैश) लोग इसका निर्माण कर रहे थे और जब अल रुक्न के पास पहुंचे तो आपस में झगड़ने लगे कि उसे किस वर्ग का व्यक्ति उठाएगा| तब उन्होंने आपस में कहा कि, इस दिशा से जो भी व्यक्ति पहले आएगा, हम उसका फैसला मानेंगे|’ उस समय वहां से अल्लाह के रसूल मुहम्मद आये, वह युवक थे| तब आप ने हर वर्ग के बड़े (सरदार) को वस्त्र का एक कोना पकड़ने को कहा| आप उस (वस्त्र) पर चढ़े और सब लोग अल रुक्न को उठाकर आप को दिया| आप ने स्वयं उसे उसके स्थान पर रख दिया|” (अल अज़रखी की तारीख मक्का, 1/161-164)      

जब तक आवश्यकता नहीं थी, तब तक काबा के चारो ओर कोई बाड या घेरा नहीं था| मुजम अल बुल्दान (5/146) में याखूत अल हमवी ने कहा: “काबा के चारो ओर बाड लगाने वाले पहले व्यक्ति उमर बिन खत्ताब रज़िअल्लाहुअन्हु है; मुहम्मद तथा अबू बकर रज़िअल्लाहुअन्हु के काल में काबा के चारो ओर बाड नहीं था| बाड (दीवार) लगाने का मुख्य उद्देश्य यह था कि लोग काबा के आस पास घर बना रहे थे और इसके कारण लोगो को काबा के पास उपासना (इबादत) करने के लिए जगह कम पड़ने लगी थी| उमर रज़िअल्लाहुअन्हु ने कहा: ‘काबा अल्लाह का घर है, और घर को एक घेरे की आवश्यकता होती है| आप लोगो ने काबा के स्थान को आक्रमित किया है, उसने आप के स्थान को नहीं|’ अतः उन्होंने उन घरों को खरीदा और उन्हें ध्वस्त करके उस स्थान को काबा में सम्मिलित कर दिया| जो लोग अपने घरों को बेचना नहीं चाहते थे, उमर रज़िअल्लाहुअन्हु ने उनके घरों को भी ध्वस्त कर दिया और वह स्थान काबा में मिला दिया| किन्तु उन लोगो के धन को अलग उठाकर रख दिया| बाद में वह लोग अपना धन ले गए| उन्होंने काबा के चारो ओर दीवार उठाई, जो एक व्यक्ति के ऊँचाई से कम थी| उस पर प्रकाश के लिए कुछ बत्ती (lamps) लगाये| उस्मान रज़िअल्लाहुअन्हु के काल में उन्होंने काबा के आस पास के और भी मकान खरीदे, जो बहुत कीमती थे....यह कहा जाता है कि, उस्मान रज़िअल्लाहुअन्हु पहले व्यक्ति है जो काबा के आस पास बरामदे (porticos) निर्माण किये....इब्न अल जुबैर के काल में उन्होंने काबा की दिखावट (आकार) को सुधार दिया....उन्होंने काबा को विस्तार नहीं किया, किन्तु वहां संगमरमर लगाया और कुछ द्वार बनाये| अब्दुल मलिक इब्न मरवान के काल में उन्होंने दीवार को बढ़ाया, उसके लिए इजिप्ट (egypt) के स्तंभ (columns) मंगाये, उसे जेद्दाह तक समंदर के मार्ग मंगाया, फिर वहां से मक्का तक पहियों पर ले जाया गया| अल हज्जाज इब्न यूसुफ़ ने आज्ञा दी कि काबा को परदे (अल किस्वा) से ढका जाये| अल वलीद इब्न अब्दुल मलिक के शासन काल में किस्वा (परदे) को अलंकृत किया तथा जलनिकास अथवा छत पर सुधार किया| अल मंसूर तथा उनके पुत्र अल महदि के शासन काल में काबा को अधिक अलंकृत किया गया और उसके दिखावे में सुन्दरता लायी गयी|”

नबी मुहम्मद से पहले

नबी मुहम्मद से पहले (नबी के जन्म से पहले), काबा पर इथियोपिया अब्रह ने आक्रमण किया, तथा वहां पर एक चर्च (गिरिजाघर- ईसयिओ का प्रार्थना स्थल) बनाया, ताकि अरब के लोग वहां तीर्थयात्रा करे| उसने अपने सैनिक दल के साथ काबा पर आक्रमण के लिए निकला, उसके साथ हाथी थी, जब वह मक्का पहुंचे, तो अल्लाह ने उन पर परिंदों का समूह भेजा| हर परिंदे के पास तीन कंकर थे, एक उसके चोच में और दो उसके पंजे में| अल्लाह की आज्ञा से हर व्यक्ति को कंकर मारा गया तथा जिसे कंकर मारा गया वह मर गया| इस तरह सारी सेना तबाह हो गयी|

अल्लाह ने इस घटना को कुरआन में वर्णित किया है: “क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने हाथीवालों के साथ कैसा बरताव किया?क्या उसने उनकी चाल को अकारथ नहीं कर दिया?और उनपर नियुक्त होने को झुंड के झुंड पक्षी भेजे,उनपर कंकरीले पत्थर मार रहे थे।अन्ततः उन्हें ऐसा कर दिया, जैसे खाने का भूसा हो।” (कुरआन सूरह अल फील:105:1-5)

(इब्न हिशाम की अल सीरह अल नबविय्यह, 1/44-58) [2] 

प्रस्तुत परिस्थिति (काल में)

मताफ के आस पास (काबा के गोल चक्कर (तवाफ) लगाने का स्थान) के स्थान को विस्तृत किया जा रहा है| विस्तृत माताफ स्थान में लग भाग 130,000 तीर्थ यात्री को स्थान मिल सकती है| इस समय वहां पर केवल 52,000 लोग ही आ सकते है|

प्रस्तुत इमाम

मस्जिद ए हरम के इमाम, शेख अब्दुल रहमान सुदैस, जो दो महान मस्जिद (मस्जिद ए हरम, मस्जिद ए नबवी) के अध्यक्ष ने कहा कि, जब विस्तार का काम समाप्त हो जायेगा तो लोगो को हज और उमरह करते समय कुछ कष्ट न होगा| [3]  

धरती पर पहली मस्जिद

लोगो के लिए धरती पर निर्मित की गयी पहली मस्जिद यही है| अल्लाह ताला ने ऐसा कहा: “निस्ंसदेह इबादत के लिए पहला घर जो 'मानव के लिए' बनाया गया वही है जो मक्का में है, बरकतवाला और सर्वथा मार्गदर्शन, संसारवालों के लिए।” (कुरआन सूरह आले इमरान 3:96)

अबू ज़र्र ने उल्लेख किया: “मैंने अल्लाह के रसूल ने धरती पर लोगो के लिए बनायी गयी पहली मस्जिद के बारे में पूछा| आप ने कहा: ‘अल मस्जिद अल हरम|’ फिर मैंने पूछा, ‘उसके बाद कौनसी मस्जिद?’ आप ने कहा: ‘अल मस्जिद अल अख्सा (फलस्तीन की मस्जिद)|’ मैंने पूछा, ‘उनके मध्य कितना अंतर है?’ आप ने कहा: ‘चालीस वर्ष|’” (सहीह बुखारी:Vol 4:3366, सहीह मुस्लिम:520 & सुनन इब्न माजा:753)

धार्मिक प्रत्येकता नमाज़ का रुख

काबा – संसार के सारे मुसलमान (विश्वासी) के लिए नमाज़ पढने का रुख है – यह मस्जिद ए हरम के बीच (मध्य) में है| यह 15 मीटर का पत्थर का ढांचा (भवन) है, जो cube के आकार में है| इसे इब्राहीम अलैहिस्स्सलाम ने अल्लाह की आज्ञा से निर्माण किया| अल्लाह ने कुरआन में कहा:"याद करो जब कि हमने इबराहीम के लिए अल्लाह के घर को ठिकाना बनाया, इस आदेश के साथ कि "मेरे साथ किसी चीज़ को साझी न ठहराना और मेरे घर को तवाफ़ (परिक्रमा) करनेवालों और खड़े होने और झुकने और सजदा करनेवालों के लिए पाक-साफ़ रखना।" (कुरआन सूरह हज 22:26)

तीर्थ यात्रा

मुस्लिम लोग मक्का की तीर्थयात्रा ज़ुल हिज्जाह के माह में करते है, इसे हज कहा जाता है| हज इस्लाम के पांच मूल स्तंभ में से है| जो लोग यह तीर्थ यात्रा करने की क्षमता रखते है, उन पर जीवन में एक बार इसे करना अनिवार्य है|

अल्लाह ने कहा: “निस्ंसदेह इबादत के लिए पहला घर जो 'मानव के लिए' बनाया गया वही है जो मक्का में है, बरकतवाला और सर्वथा मार्गदर्शन, संसारवालों के लिए।उसमें स्पष्ट निशानियाँ हैं, वह इबराहीम का स्थल है। और जिसने उसमें प्रवेश किया, वह निश्चिन्त हो गया। लोगों पर अल्लाह का हक़ है कि जिसको वहाँ तक पहुँचने की सामर्थ्य प्राप्त हो, वह इस घर का हज करे, और जिसने इनकार किया तो (इस इनकार से अल्लाह का कुछ नहीं बिगड़ता) अल्लाह तो सारे संसार से निरपेक्ष है।” (कुरआन सूरह आले इमरान 3:96,97)

“औरलोगोंमेंहजकेलिएउद्घोषणाकरदोकि"वेप्रत्येकगहरेमार्गसे, पैदलभीऔरदुबली-दुबलीऊँटनियोंपर, तेरेपासआएँ।” (कुरआन सूरह हज 22:27)

काबा के आस पास के धार्मिक स्थल मखामे इब्राहीम

 

 

 

 

 

 

 

मस्जिद में और भी धार्मिक स्मारक है| जैसे- मखामे इब्राहीम| यह एक पत्थर है, जिस पर ठहरकर इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने काबा का निर्माण किया|     

 

ज़म ज़म कुवां

  

 यहाँ पर ज़म ज़म का कुँवा भी है, जिसे अल्लाह ने हाजिरा और उनके पुत्र इस्माइल अलैहिमुस्सलाम की प्यास बुझाने के लिए उत्पन्न किया था|

काला पत्थर (हजरे अस्वद)

काला पत्थर और रुक्न अल यमानी दो स्वर्ग के विशेष पत्थर है|

अल तिरमिज़ी तथा अहमद ने उल्लेख किया कि, अब्दुल्लाह इब्न अम्र ने कहा: “अल्लाह के रसूल को कहते हुआ सुना कि, रुक्न तथा मखाम स्वर्ग के विशेष पत्थर है| इसके प्रकाश को अल्लाह ने बुझा दिया| अल्लाह यदि ऐसा न करता तो, पूरब तथा पश्चिम के मध्य हर चीज़ प्रकाशित हो जाती|” (सुनन तिरमिज़ी:804)

सफा और मरवा

मस्जिद के समीप दो पहाड़ है, जिसे सफा तथा मरवा कहा जाता है| इस मस्जिद की विशेषता यह भी है कि, सारे संसार से लोग केवल इसी मस्जिद को तीर्थयात्रा (हज) के लिए आते है| अल्लाह ने कहा: “निस्संदेह सफ़ा और मरवा अल्लाह की विशेष निशानियों में से हैं; अतः जो इस घर (काबा) का हज या उमरा करे, उसके लिए इसमें कोई दोष नहीं कि वह इन दोनों (पहाड़ियों) के बीच फेरा लगाए। और जो कोई स्वेच्छा और रुचि से कोई भलाई का कार्य करे तो अल्लाह भी गुणग्राहक, सर्वज्ञ है।” (कुरआन सूरह बखरह 2:158)

 

मस्जिद ए हरम की प्रत्येक विशिष्ठता

मक्का वह शहर है, जहां यह पवित्र मस्जिद स्थित है| मस्जिद ए हरम में पढ़ी गयी एक नमाज़ दूसरे मस्जिद की नमाज़ से 100000 गुण विशिष्ठ है| जाबिर रज़िअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, रसूलुल्लाह ने कहा: “मेरी मस्जिद (मस्जिद ए नबवी) में नमाज़ पढना, दूसरे मस्जिद में नमाज़ से 1000 गुण उत्तम है, केवल मस्जिद ए हरम के सिवा, जहाँ की एक नमाज़ दूसरे मस्जिद की नमाज़ से 100000 गुण विशिष्ठ है|(सुनन इब्न माजा:1471)|  अल मुन्ज़िरी तथा अल बुसैरी ने इसे सहीह कहा है| अल्बानी रहिमहुल्लाह ने कहा: दोनों शेक (बुखारी तथा मुस्लिम) के प्रकार से इसका उल्लेखन सहीह है| (इरवा अल घलील:4/146) 

“औरयादकरोजबहमनेइसघर(काबा) कोलोगोंकोलिएकेन्द्रऔरशान्तिस्थलबनाया- और, "इबराहीमकेस्थलमेंसेकिसीजगहकोनमाज़कीजगहबनालो।" - औरइबराहीमऔरइसमाईलकोज़िम्मेदारबनायाकि"तुममेरेइसघरकोतवाफ़करनेवालोंऔरएतिकाफ़करनेवालोंकेलिएऔररुकूऔरसजदाकरनेवालोंकेलिएपाक-साफ़रखो|” (कुरआन सूरह बखरह 2:125) [4]

 कुछ तथ्य

  1. मक्का वह शहर है, जहाँ इबादत (उपासना) के लिए पहली मस्जिद बनायी गयी|
  2. मक्का वह शहर है, जहाँ अति पवित्र मस्जिद है| मस्जिद ए हरम की एक नमाज़ दूसरे मस्जिद के नमाज़ से 100000 गुण विशिष्ठ है|
  3. मक्का शहर को अल्लाह ने पुण्यस्थान घोषित किया|
  4. अनेक ईशदूत (नबी) इस शहर की यात्रा किए| इनमे इब्राहीम,इस्माइल अलैहिमुस्सलाम भी है| 
  5. इसी शहर में हाजिरा अलैहिस्सलाम, इब्राहीम अलैहिस्सलाम की पत्नी ने अपने पुत्र इस्माइल अलैहिस्सलाम की परवरिश की| इस्माइल अलैहिस्सलाम ने अपनी अधिकतर ज़िन्दगी यही बितायी|
  6. जब मुहम्मद मक्का से मदीना को हिजरत कर रहे थे, तब आप ने अपना चेहरा मक्का की ओर किया और कहा: “मक्का! मै तुझसे प्यार करता हूँ और जानता हूँ कि, तू भी मुझसे प्यार करता है, किन्तु यहाँ के वासी ने मुझे तुझे छोड़कर जाने पर विवश किया|”
  7. इस शहर के लिए ही नबी इब्राहीम तथा इस्माइल अलैहिमुस्सलाम ने दुआ की|
  8.  अल्लाह ताला ने इब्राहीम तथा इस्माइल अलैहिमुस्सलाम को मक्का में काबा निर्माण करने की आज्ञा दी| और सारी मानवजाती को अल्लाह के इस घर का हज (तीर्थयात्रा) करने का निमंत्रण दिया| उस समय से आज तक अनगिनत लोगो ने इस पवित्र शहर को तीर्थयात्रा के लिए आये|         
  9. यही शहर में अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने जन्म लिया|  और यही पर आप ने परवरिश पाई| इसी शहर में मुहम्मद ने नबुव्वत (ईशदूत) की घोषणा की, तथा बताया कि वह सारी मानवजाती के लिए भेजे गए और अंतिम नबी है|
  10. रसूलुल्लाह ने अपना अधिक जीवन मक्का में व्यतीत किया|
  11.  इसी शहर से इस्लाम व्यापित होना आरम्भ हुआ|
  12. इसी शहर में ज़म ज़म पानी है, जिससे लोगो को शक्ति प्राप्त होती है|
  13. रसूलुल्लाह की मेराज की यात्रा (मस्जिद ए हरम से स्वर्ग लोक तक) इसी शहर से आरम्भ हुई|
  14. मक्का के परिसर में कई अल्लाह की निशानिया है, जैसे- मिना, मुज्दलिफा, अरफात, जन्नतुल मुअल्ला शमशान, सफा, मरवा अल्लाह के रसूल मुहम्मद का मकान आदि|
  15. यह वह शहर है जिसे हर मुस्लिम जाना चाहता है, और हर वर्ष करोडो मुस्लिम आते है| [5]

आधार

[1] http://www.islamreligion.com/articles/2748/(english)

[2] [4] http://islamqa.info/en/3748(english)

[3] http://www.arabnews.com/saudi-arabia/mataf-expansion-double-current-capacity(english)

[5] http://www.islamicsupremecouncil.com/etiquettes.htm(english)

35 Views
Correct us and Correct yourself
.
Comments
Top of page