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मशर अल हरम

अल मशर अल हरम एक घाटी (वादी)  है, जो मुज्दलिफा और मिना के मध्य है| तीर्थयात्री (हाजी लोग) मुज्दलिफा में रात बिताने (सोने) के बाद, मक्का लौटते समय (जमरात अल अख्बा पर कंकरी मारने के लिए 10 ज़िल हिज्जह के दिन), यहाँ पर दुआ करते है| [1]

विषय सूची

परिचय

अल मशर अल हरम दो घाटी के मध्य है| इब्न अब्बास, सैद बिन जुबैर, इक्रिमह, मुजाहिद, अस-सुद्दी, अर-रबि बिन अनस, अल-हसन तथा खतादह ने यही कहा| [2]

हदीस

सलीम ने उल्लेख किया: अब्दुल्लाह बिन उमर अपने परिवार में सबसे बलहीन को पहले मिना भेजते थे| अतः वह अल मशर अल हरम (मुज्दलिफा) से रात के समय (सूर्यास्तमय के बाद) अल्लाह से दुआ करते हुए जाते थे| फिर वह (मिना को) वापस, इमाम मुज्दलिफा से मिना आने से पहले लौट जाते थे| कुछ लोग फजर से पहले तथा कुछ लोग फजर के बाद मिना लौटते थे| मिना पहुँचने के बाद वह जमरा (जमरा अल उख्बा) पर कंकरी मारते थे| इब्न उमर कहा करते थे: “अल्लाह के रसूल ने उन्हें (बलहीन लोगों को) यह अनुमति दी|” (सहीह बुखारी:1676)

इस्लामी विद्वाम्स का विचार

http://www.askislampedia.com/image/image_gallery?img_id=122784&t=1414503619760

विद्वाम्स (उलमा) अल मशर अल हरम के विषय में भेद रखते है| कुछ लोग इसे मुज्दलिफा कहते है; अल खुर्तुबी इस विषय में कुरआन की इस आयत का भाव लेते है: इसमें तुम्हारे लिए कोई गुनाह नहीं कि अपने रब का अनुग्रह तलब करो। फिर जब तुम अरफ़ात से चलो तो 'मशअरे-हराम' (मुज़दल्फ़ा) के निकट ठहरकर अल्लाह को याद करो, और उसे याद करो जैसा कि उसने तुम्हें बताया है, और इससे पहले तुम पथभ्रष्ट थे। (कुरआन सूरा बखरह 2:198)

कुछ उलमा मुज्दलिफा के एक पहाड़ ‘खज़ाह’ को अल मशर अल हरम कहते है|

कुछ लोग मुज्दलिफा के दो पहाड़ के मध्य को अल मशर अल हरम कहते है| [3]    

आधार

[1] http://www.islamicity.com/mosque/hajj/stepbystep/yourContent/glossary_right.asp(english)

[2] http://www.qtafsir.com/index.php?option=com_content&task=view&id=212&Itemid=36(english)

[3] http://ramadan.islamweb.net/emainpage/index.php?page=showfatwa&Option=FatwaId&Id=91635(english)

 

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