Send an article  |  Print   |  ../file-system/small/pdf   |   RSS   |  

प्रमुख अपराध (बड़े पाप, गुनाह)बचना आवश्यक है

प्रमुख अपराध वह है जिसे अल्लाह ने कुरआन में तथा अल्लाह के रसूल (ईशदूत) ने सुन्नत में निशेधित किया है| सहाबा (रसूल के अनुयायी) ने और धार्मिक लोगो (उलमा) ने अपने कर्म द्वारा इन्हें स्पष्ट कर दिया|

विषय सूची

कुरआन

यदि तुम उन बड़े गुनाहों से बचते रहो, जिनसे तुम्हें रोका जा रहा है, तो हम तुम्हारी बुराइयों को तुमसे दूर कर देंगे और तुम्हें प्रतिष्ठित स्थान में प्रवेश कराएँगे। (कुरआन सूरा निसा 4:31)

जो बड़े-बड़े गुनाहों और अश्लील कर्मों से बचते हैं और जब उन्हें (किसी पर) क्रोध आता है तो वे क्षमा कर देते हैं;(कुरआन सूरा शूरा 42:37)

वे लोग जो बड़े गुनाहों और अश्लील कर्मों से बचते हैं, यह और बात है कि संयोगवश कोई छोटी बुराई उनसे हो जाए। निश्चय ही तुम्हारा रब क्षमाशीलता में बड़ा व्यापक है। वह तुम्हें उस समय से भली-भाँति जानता है, जबकि उसने तुम्हें धरती से पैदा किया और जबकि तुम अपनी माँओ के पेटों में भ्रूण अवस्था में थे। अतः अपने मन की पवित्रता और निखार का दावा न करो। वह उस व्यक्ति को भली-भाँति जानता है, जिसने डर रखा। (कुरआन सूरा नज्म 53:32)

कह दो, "ऐ मेरे बन्दो, जिन्होंने अपने आप पर ज़्यादती की है, अल्लाह की दयालुता से निराश न हो। निस्संदेह अल्लाह सारे ही गुनाहों को क्षमा कर देता है। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।(कुरआन सूरा ज़ुमर 39:53)

इससे हमें यह पता चलता है कि, यदि सच्चे मन से प्रायश्चित (तौबा) की जाये तो अवश्य अल्लाह हमारे अपराध (पाप, गुनाह) क्षमा कर देगा|

हदीस

अनस इब्न मालिक रज़िअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, उन्होंने रसूलुल्लाह को ऐसा कहते हुए सुना: “सर्वोन्नत अल्लाह ने कहा: ‘ऐ आदम के पुत्र! जब तक तुम मुझे पुकारते तथा मांगते रहोगे, मै तुम्हरे अपराध (पाप) क्षमा करता रहूँगा, मुझे बुरा नहीं लगेगा| ऐ आदम की संतान! यदि तुम्हारे अपराध (पाप) आकाश तक पहुच जाए और तुम मुझसे क्षमा मांगो तो मै तुम्हे क्षमा करूंगा और मुझे बुरा नहीं लगेगा|” (सहीह तिरमिज़ी:3540, शेख अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इसे सहीह – प्रमाणित - कहा है)

रसूलुल्लाह ने कहा: “हर दिन (रोज़) के पांच नमाज़, जुमा से जुमा, रमजान से रमजान – के मध्य में होने वाले अपराध (पाप) का प्रायश्चित किया जाये तो, अल्लाह उन्हें मिटा देगा, किन्तु प्रमुख अपराध (बड़े पाप) से बचते रहना चाहिए|” अतः प्रमुख अपराध (कबीरा गुनाह) किसे कहते है, जानना आवश्यक है| इनका ज्ञान हेगा तो ही, इनसे बचा जा सकता है|   

इस विशय में धार्मिक पंडित (उलमा) के मध्य भेद पाया जाता है| कुछ उलमा प्रमुख अपराध (पाप) 7 कहते है, उनका तथ्य यह है कि: “7 हानिकारक विषय से बचो” – इसे कहने के पश्चात रसूलुल्लाह ने कहा: “अल्लाह का साझी (शरीक) बनाना, मंत्र तंत्र, बिना किसी वैध कारण के किसी की हत्या करना, अनाथ का धन छीन लेना, सूद (ब्याज) लेना, युध्ध रंग से भाग जाना, पवित्र मुस्लिम महिलाओं के बारे में अविवेकता से बुरा कहना|” (सहीह मुस्लिम:161)

अब्दुल्लाह इब्न अब्बास रज़िअल्लहुअन्हु कहते है: “सात से सत्तर करीब है,” और यह सत्य है| ऊपर बताये गए पाप ही केवल प्रमुख पाप नहीं है| इसमें यह बताया गया है कि, यह सब पाप प्रमुख पाप के वर्ग में आते है| इसके अतिरिक्त वह कर्म जो निर्धारित दंड ‘हद्द’ में आते है, जैसे – चोरी, व्यभिचार, हत्या इत्यादि जिसके बारे में कुरआन तथा हदीस में कठिन दंड का प्रस्ताव किया गया है, तथा वह अपराध जिसे रसूलुल्लाह ने दूषित किया|

अबू हुरैरह रज़िअल्लहुअन्हु ने उल्लेख किया की, रसूलुल्लाह ने ऐसा कहा: पांच समय की नमाज़ तथा एक जुमह से दूसरे जुमह की नमाज़ के मध्य जो पाप (अपराध) होते है, उन्हें अल्लाह क्षमा कर देता है, यदि प्रमुख अपराध (बड़े गुनाह) से बचा जाए| (सहीह मुस्लिम:233 & 448)

धार्मिक विद्वाम्स (उलमा) का अवलोकन     

शेखुल इस्लाम इब्न तैमिया रहिमहुल्लाह ने मज्मू अल फतावा, 2/358, में कहा: यदि इन्सान पश्चात्ताप (तौबा) करे तो, अल्लाह की दया तथा क्षमा के आगे कोई ऐसा अपराध (पाप) नहीं, जिसे वह क्षमा (माफ़) न करे| यदि सच्चे मन से अल्लाह के आगे क्षमा की भीक मांगी जाए तो अल्लाह शिर्क (बहुदैवाराध) जैसे बड़े अपराध (पाप) को भी क्षमा कर देता है|अल्लाह ने कुरआन में कहा: कह दो, "ऐ मेरे बन्दो, जिन्होंने अपने आप पर ज़्यादती की है, अल्लाह की दयालुता से निराश न हो। निस्संदेह अल्लाह सारे ही गुनाहों को क्षमा कर देता है। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील, अत्यन्त दयावान है।“ (कुरआन सूरा ज़ुमर, 39:53)   

इस विषय में कुछ श्रेणी है, कुछ अपराध कुछ के मुकाबले बहुत बड़े है| रसूलुल्लाह के प्रकार, उन गंबीर अपराध में शिर्क (बहुदैव वाद) प्रमुख है| कुरआन के प्रवचन (आयत) द्वारा यह पता चलता है कि, जो व्यक्ति शिर्क करेगा, उसे क्षमा नहीं प्राप्त होगी तथा वह हमेशा नरक में रहेगा|

अल्लाह ने कुरआन में कहा:"अल्लाह इसको क्षमा नहीं करेगा कि उसका साझी ठहराया जाए। किन्तु उससे नीचे दर्जे के अपराध को जिसके लिए चाहेगा, क्षमा कर देगा और जिस किसी ने अल्लाह का साझी ठहराया, तो उसने एक बड़ा झूठ घड़ लिया।“ (कुरआन सूरा निसा, 4:48 & 116)      

प्रमुख अपराध के नियम

प्रमुख अपराध के स्पष्ट नियम है:

  • वह अपराध जिसके लिए दंड निर्धारित हो (चोरी, व्यभिचार इत्यादि)
  • वह अपराध जिसके लिए कठोर चेतावनी दी गई हो|
  • वह अपराध जिसे कुरआन ने हराम (अवैध) प्रकटित किया हो|  

70 प्रमुख अपराध

  1. अल्लाह के साथ साझी बनाना|
  2. हत्या
  3. तंत्र मंत्र (जादू) करना
  4. नमाज़ न पढना
  5. ज़कात न देना
  6. रमजान के उपवास बिना कोई नैतिक कारण के छोड़ देना
  7. हज करने कि क्षमत रखते हुए, हज न करना
  8. माता पिता के प्रति बुरा व्यवहार
  9. सम्बन्ध (रिश्ते) तोडना
  10. व्यभिचार (Adultery)
  11. समलैंगिकता  (Homosexuality)
  12. सूद (ब्याज)
  13. अनाथ के धन को छीनना
  14. अल्लाह और अल्लाह के रसूल मुहम्मद के बारे में झूट (असत्य) कहना
  15. युध्द भूमि से भाग जाना
  16. अपनी प्रजा के साथ धोका तथा अन्याय करने वाला शासक
  17. अहंकार
  18. झूठी गवाही देना (असत्य साक्ष्य)
  19. मद्यपान करना (शराब पीना)
  20. जुआ
  21. पवित्र स्त्री पर अभियोग लगाना
  22. युध्ध प्राप्ति में से चोरी करना
  23. चोरी
  24. यात्रियों को रास्ते में लूटना
  25. असत्य प्रमाण करना (झूठी कसम)
  26. अत्याचार
  27. अवैध लाभ
  28. अवैध समाप्ति का उपभोग
  29. आत्महत्या
  30. लगातार असत्य कहना
  31. अन्याय करना
  32. घूस (रिश्वत) लेना तथा देना
  33. स्त्री पुरुष का अनुकरण करना, पुरुष स्त्री का अनुकरण करना
  34. व्यभिचारी पति
  35. तलाख वाली महिला को उसके पति के लिए वैध करने के लिए उससे विवाह करना
  36. मूत्र (पेशाब) की गन्दगी से ना बचना
  37. दिखावा
  38. धर्म का ज्ञान प्रापंचिक लाभ के लिए सीखना और उसे छुपाना
  39. विशवासघात
  40. किये गए उपकार को गिनाना
  41. अल्लाह की अवज्ञा करना   
  42. लोगो के निजी बातें सुनना
  43. कहानिया बनाना
  44. शाप देना
  45. अनुबंद तोडना
  46. ज्योतिशो कि बात पर विश्वास करना
  47. पति के प्रति पत्नी का दुर्व्यवहार
  48. मूर्ती तथा चित्र बनाना
  49. यातना या कष्ट आने पर विलपित होना तथा रोना
  50. लोगो से अनुचित व्यवहार करना
  51. पत्नी, सेवक, बलहीन तथा पशु पर अधिक दबाव डालना
  52. पडोसी को अवमानित करना
  53. मुसलमानो  को अवमानित तथा दूषित करना
  54. लोगों को अवमान करना तथा उनके आगे अहंकार का प्रदर्शन करना
  55. अहंकार में वस्त्र को घसीटते चलना
  56. पुरुष सोना तथा रेशम धारण करना
  57. सेवक अपने मालिक से भाग जाना
  58. अल्लाह के अतिरिक्त किसी और के नाम पर पशु बलि देना
  59. पिता पुत्र के समबन्ध को बदल डालना
  60. विवाद में हिंसा पर उतर आना
  61. पानी को रोक रखना
  62. नापतोल में कमी
  63. अल्लाह से न डरना
  64. अल्लाह वाले (संत) लोगो को अवमानित करना
  65. किसी कारण के बिना सामूहिक नमाज़ (जमात) को छोड़ कर अकेले नमाज़ पढना     
  66. बिना किसी वैद कारण के जुमा की नमाज़ निरंतर छोड़ना
  67. अवैध प्रकार से वारिस का हक़ मारना
  68. किसी को हानी पहुचाने कि योजना बनाना  
  69. मुस्लिम लोगो के विरोधियो के लिए जासूसी करना
  70. अल्लाह के रसूल मुहम्मद के अनुयायी (सहाबा) को बुरा भला कहना, अवमानित करना

 

निर्धारित प्रमुख अपराध

 

  1. अल्लाह को साझी बनाना (शिर्क)|

बड़ा शिर्क: अल्लाह के अतिरिक्त मनुष्य की पूजा करना (उदहारण – कुरआन, सूरा, 4:116, 31:13, 5:72 आदि)

 

छोटा शिर्क: दिखावा (रिया)

अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा: “क्या मै तुम लोगो को वह विषय बताऊ, जो दज्जाल के संकट से भी अधिक आपत्तिजनक है? वह छुपा हुआ शिर्क है: एक व्यक्ति नमाज़ के लिए खडा होता है तथा नमाज़ इसलिए पढता है, कि लोग उसे देख रहे है|” (सहीह सुनन इब्न माजह)

  1. हत्या करना: (कुरआन, सूरा, निसा 4:93 & फुरखान:68)
  2. जादू टोना (तंत्र मंत्र): (कुरआन, सूरा बखरह 2:102)      
  3. नमाज़ नहीं पढ़ना: (कुरआन, सूरा मरयम 19:59,60 & माऊन 107:4-5)
  4. जकात (विधि दान) ना देना: (कुरआन, सूरा आले इमरान 3:180) 
  5. रमजान के माह का उपवास बिना किसी वैद कारण के भंग करना या ना रखना:

रसूलुल्लाह ने कहा: “इस्लाम के पांच मूल स्तंभ है: गवाही देना (विश्वास करना) कि, अल्लाह के अतिरिक्त कोई पूजनीय नहीं है तथा मुहम्मद अल्लाह के रसूल है; नमाज़ पढना; ज़कात देना; काबा का हज करना; रमजान के माह में उपवास रखना|” (सहीह अल जामी:2837)

  1. योग्यता तथा सामर्थ्य होने पर भी हज ना करना| (सहीह अल जामी:2837)
  2. माता पिता की अविधेयता|(कुरआन, सूरा इसरा, 17:23)    
  3. रिश्तेदार से सम्बन्ध तोडना| (कुरआन, सूरा मुहम्मद, 47:22)
  4. व्यभिचार (विवाहेतर सम्बन्ध) (कुरआन, सूरा इसरा, 17:30)
  5. गुदामैथुन (anal sex)

अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा: ‘अल्लाह उस व्यक्ति की ओर ना देखेगा, जो स्त्री से या पुरुष से गुदामैथुन (anal sex) करे|” (सहीह अल जामी:7678)

  1. सूद (ब्याज) लेना या देना| (कुरआन, सूरा बखरह, 2:275)
  2. अनाथ का धन भक्षण करना (खा जाना)| (कुरआन, सूरा निसा, 4:10)   
  3. अल्लाह के वचन (आयत) या हदीस को गढ़ लेना (नकली बनाना)| (कुरआन, सूरा ज़ुमर, 39:60)
  4. युध्ध भूमि से भाग जाना| (कुरआन , सूरा अन्फाल, 8:16)
  5. शासक का अत्याचार करना| (कुरआन, सूरा शूरा, 26:42)
  6. अहंकार का प्रदर्शन करना| (कुरआन, सूरा नहल, 16:23)
  7. असत्य साक्ष्य (झूटी गवाही) देना| (कुरआन, सूरा फुरखान, 25:72)
  8. मद्यपान करना| (कुरआन, सूरा माइदा, 5:90)
  9. जुआ| (कुरआन, सूरा माइदा, 5:90)
  10. पवित्र स्त्री पर अपवाद डालना| (कुरआन, सूरा नूर, 71:23)
  11. युध्ध प्राप्ति को ग़बन (दुरुपयोग) करना| (कुरआन, सूरा आले इमरान, 3:161)
  12.  चोरी करना| (कुरआन, सूरा माइदा, 5:38)
  13. रास्ते में प्रयानिको को लूटना| (कुरआन, सूरा माइदा, 5:33)
  14. असत्य प्रमाण (झूठी कसम)|

रसूलुल्लाह ने कहा: “जब किसी व्यक्ति को प्रमाण लेने के लिए कहा जाये तथा वह असत्य प्रमाण लेकर एक मुसलमान (विश्वासी) की संपत्ति को लूट ले, ऐसे व्यक्ति को अल्लाह प्रलय के दिन शाप देगा| (सहीह अल जामी:6083)

  1. अत्याचार| (कुरआन, सूरा शूरा, 26:277)
  2.  अवैध शुल्क (tax) लागू करना|

अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा: “तुम्हे पता है दिवालिया कौन है? दिवालिया वह है, जो प्रलय के दिन (अंतिम दिन) अल्लाह के पास अपनी नमाज़, उपवास (रोज़ा), ज़कात (विधि दान) लेकर आएगा, किन्तु वह किसी को गाली दी होगी, अवमानित किया होगा, अवैध तरीके से किसी का धन लेलिये होगा, किसी की हत्या की होगी| वह लोग (जो उसके अत्याचार के पात्र है) उस व्यक्ति के पुण्य ले लेंगे| यदि उसके पुण्य समाप्त हो जाये तो उन लोगो के अपराध (पाप) इसे दिए जायेंगे तथा वह नरक के आग में डाल दिया जाएगा|” (सहीह अल जामी:87)

  1. निशिध्ध धन किसी भी प्रकार से ले लेना| (कुरआन, सूरा बखरह, 2:188)
  2.    आत्महत्या करना| (कुरआन, सूरा निसा, 4:29)
  3. निरंतर असत्य कहना| (कुरआन, सूरा इमरान, 3:61)
  4. इस्लाम के नियम छोड़ कर, दूसरे नियम से शासन करना| (कुरआन, सूरा माइदा, 5:44)
  5. घूस (रिश्वत) लेना| (कुरआन, सूरा बखरह, 2:88)
  6. स्त्री पुरुष जैसे कर्म करना (वेश भूषा धारण करना), पुरुष स्त्री जैसे|

रसूलुल्लाह ने कहा: “स्त्री जो पुरुष जैसा कर्म (वेश भूषा धारण करे), तथा पुरुष जो स्त्री जैसा करे, उन पर अल्लाह का शाप होगा| (सहीह अल जामी:4976)

  1. अवैध कर्म को पसंद करने वाला|

वह व्यक्ति जो अपनी परिवर के स्त्री को कुकर्म करने की अनुमति दे या दो लोगो के बीच अवैध संबन्ध स्थापित करने वाला|

अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा: “अल्लाह ने तीन प्रकार के लोगो के लिए स्वर्ग निषेधित कर दिया है: शराबी (मद्यपान सेवन करने वाला), वह सेवक जो भाग जाए तथा अपने परिवार के कुकर्म से प्रसन्न अथवा लापरवाह रहने वाला|” (सहीह अल जामी:3047)

  1. इस संकल्प से विवाह करे की, वह दूसरे के लिए वैध (हलाल) हो जाए| (कुरआन, सूरा बखरह)
  2.      मूत्र की गन्दगी से पवित्र न रहने वाला|

इब्न अब्बास रज़िअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, अल्लाह के रसूल एक स्मशान के पास से गुज़रे तो कहने लगे: “यह दो लोगो को दण्डित किया जा रहा है, और उन लोगो ने कोई घोर अपराध नहीं किया है| किन्तु वह बड़ा अपराध है| इनमे से एक ने अपने मूत्र से अपने आप को पवित्र न रखा तथा दूसरे ने असत्य बातें (अफ़साने) फैलाता (व्यापित करता) रहा|” (सहीह अल जामी: 2436)

  1. दिखावा करना| (कुरआन, सूरा माऊन, 107:4-6)
  2.  केवल प्रापंचिक लाभ के लिए ज्ञान प्राप्त करना तथा उसे छुपाना| (कुरआन, सूरा बखरह, 2:160)
  3. विश्वास घात करना| (कुरआन, सूरा अन्फाल, 8:27)
  4. लोगो पर की गयी भलाई को याद दिलाना| (कुरआन, सूरा बखरह, 2:27)
  5.  दैव विधि (तख्दीर) का इंकार| (कुरआन, सूरा खमर, 54:49)

 

“यदि अल्लाह चाहे तो धरती और आकाश कि सारी सृष्टी को दण्डित कर सकता है| यह कोई अन्याय भी नहीं है| यदि वह उन पर दया करना चाहे, तो उसकी दया उन लोगो के कर्म से बड़ी है| यदि किसी के पास उहद पर्वत जितना सोना भी हो और वह उसे अल्लाह के मार्ग में खर्च करना चाहे, तो अल्ल्लाह उसे उस समय तक स्वीकार नहीं करेगा जब तक वह व्यक्ति अच्छी तथा बुरी विधि (तख्दीर) पर विश्वास न करे| वह यह भी विश्वास रखे कि, जो दुःख या कष्ट उसके तख्दीर में है, वह उससे बच नहीं पायेगा तथा जिससे वह बच जाये, वह उसे कष्ट न देंगे| यदि इस विश्वास के अतिरिक्त (अलावा) किसी और विश्वास से कोई मृत्यु पाता हो तो, वह नरकवासी होगा|” (इब्न अबू असी की किताब अल सुन्नह:245, शेख अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इसे सहीह [प्रमाणित] कहा है)         

  1. दुसरे लोगो की निजी बात चीत को छुपकर सुनना| (कुरआन, सूरा हुजुरात, 49:12)
  2.  हानिकारक किस्से फैलाना| (कुरआन, सूरा खमर, 54:10)
  3.  दूसरों को शाप देना, दूषित करना|

अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा: “एक मुस्लिम (विश्वासी) को दूषित करना पाप (गुनाह) है तथा उससे झगड़ना अविश्वास है|” (सहीह अल जामी:3598)

  1. वचन बध्ध न रहना (वादा पूरा न करना)|

 अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा: “जिस व्यक्ति के भीतर यह चार गुण हो, वह कपटाचारी (hypocrite) है| जिसके अन्दर यह एक भी गुण हो, जब तक वह उसे छोड़ न दे, वह कपटाचारी रहेगा| जब भी वह वादा करे उसे भंग करता है.......” (सहीह बुखारी)

  1. ज्योतिष की भविष्य वाणी को सत्य मानना|

अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा: “जो व्यक्ति ज्योतिष के पास कुछ जानने के लिए जाए, उसकी 40 रात की नमाज़ स्वीकार नहीं होगी|” (सहीह अल जामी:5816)   

  1. पति की अविधेयता करने वाली पत्नी| (कुरआन, सूरा निसा, 4:34)
  2. जीवित लोगो के चित्र वस्त्र, परदे, पत्थर या किसी और पर अंकित करना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “....अंतिम दिन (प्रलय के दिन) सब से कड़ी सजा (दंड) उन्हें मिलेगी, जो अल्लाह का मुकाबला करते है (उसकी स्रुष्टित चीज़ों के चित्र या मूर्ती बनाते है)|” (सहीह अल जामी:1691)

  1. किसी के ग़म में स्वयम को मारना, रोना, वस्त्र फाड़ना, बाल नोचना आदि कर्म करने वाले|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “जो अपने गाल नोचता है, वस्त्र फाड़ता है तथा इस्लाम के पूर्व साम्प्रदाय जैसे आवाज़ निकालत (चीखता) हो, वह हम में से नहीं|”  (सहीह अल जामी:5713)

  1. अन्याय करना| (कुरआन, सूरा शूरा, 42:42)
  2. बलहीन (कमज़ोर), सेवक, पत्नी तथा पशु पर उनके सामर्थ से अधिक बोझ डालना या उनसे गलत लाभ उठाना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “जो इस संसार में लोगो पर अत्याचार करते है, अल्लाह उन पर अत्याचार करेगा|” (सहीह मुस्लिम)

  1. पडोसी को हानि पहुँचाना|

  अल्लाह के रसूल ने कहा: “जिस व्यक्ति से उसका पडोसी सुरक्षित ना हो, वह स्वर्ग में प्रवेश नहीं करेगा|” (सहीह अल जामी:7002)

  1. मुस्लिम लोगो (विश्वासी) को हानी तथा दूषित करना| (कुरआन, सूरा अहज़ाब, 33:58)
  2. वस्त्र को टखने (ankle) के नीचे तक धारण करना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “जो टखनो (ankle) के नीचे होगा (वस्त्र) वह भाग नरक की आग में होगा|” (सहीह बुखारी)

  1. अल्लाह के दास (सेवक) को हानी करना|

अल्लाह के रसूल ने कहा कि, अल्लाह ने कहा: “जो मेरे दास (सेवक) से शत्रुता (दुश्मनी) करेगा, मै उससे युध्ध करूंगा|” (सहीह अल जामी:1778)

  1. पुरुष रेशम तथा सोना धारण करना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “मेरे जाती (उम्मत) के स्त्री को रेशम तथा सोना धारण करने की अनुमति है, पुरुष को यह निषेधित है|” (सहीह अल जामी:209)

  1. सेवक (दास) अपने मालिक से भाग जाना|
  2. अल्लाह के अतिरिक्त (अलावा) किसी और के नाम पर पशु बलि देना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “अल्लाह के अतिरिक्त (अलावा) किसी और पर पशु बलि करने वाले को अल्लाह शापित करता है|” (सहीह अल जामी:4988)

  1. पता होने के बाद भी (बावजूद) कि, यह असत्य है,  किसी को पिता घोषित करना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “किसी को अपना पिता घोषित करना, जबके उसे पता है कि यह सत्य नहीं है, उस पर स्वर्ग निषेध कर दी जाती है|” (सहीह अल जामी:5865)

  1. सत्य की खोज (परवाह) किये बिना, केवल दिखावे के लिए झगड़ना या विवाद करना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “जो भी यह जानते हुए कि, यह असत्य है, उसका समर्थन करेगा, अल्लाह उससे उस समय तक क्रोध में रहेगा, जब तक कि, वह उससे रुक न जाए|” (सहीह अल जामी:6073)

  1. अपने पास का अधिक पानी, दूसरो को न पहुँचने देना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “जो अपने पास का अतिरिक्त पानी या घास दूसरों को न दे, प्रलय के दिन (अंतिम दिन) अल्लाह कि दया उस पर न होगी|” (सहीह अल जामी:6436)

  1. नाप तोल सटीक (सही) न करना| (कुरआन, सूरा मुतफ्फिफीन, 83:1-3)
  2. अल्लाह की पकड़ से सुरक्षित समझना| (कुरआन, सूरा आराफ, 7:99)
  3.          मरा हुआ जानवर, खून तथा सुअर का मांस खाना| (कुरआन, सूरा अनाम, 6:45)
  4. किसी वैध, मान्य कारण के बिना सामूहिक नमाज़ को छोड़ कर अकेले नमाज़ पढना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “जो भी अज़ान सुनने के पश्चात किसी मान्य कारण के बिना नमाज़ पढने नहीं जाता (मस्जिद को सामूहिक नमाज़ पढने) उसकी कोई नमाज़ नहीं| (सहीह अल जामी:6176)

  1. बिना किसी वैध कारण, जुमा की नमाज़ तथा सामूहिक नमाज़ निरंतर छोड़ देना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “यदि लोग जुमा की नमाज़ को छोडना रोक नहीं देंगे, तो अल्लाह उनके दिल पर मुहर (ठप्पा) लगा देगा और उनकी बुध्धि मारी (छिन) जाती है| (सहीह मुस्लिम)

  1. दूसरो की वसीयत में फेर बदल करके उन्हें नष्ट पहुचाना| (कुरआन, सूरा निसा, 4:12)
  2.  छल, कपट करना| (कुरआन, सूरा फातिर, 35:43)
  3. मुस्लिम (विश्वासी) लोगो पर जासूसी करना तथा उनके रहस्य पता करना| (कुरआन, सूरा खलम, 68:11)
  4. रसूलुल्लाह मुहम्मद के अनुयायी (सहबा) को गाली देना या अपशब्द कहना या दूषित करना|

अल्लाह के रसूल ने कहा: “मेरे सहाबा (अनुयायी) को अपशब्द या गाली न दिया करो, क्यों कि, जिसके हाथ में मेरे प्राण है, उसकी कसम, यदि तुम उहुद पर्वत के समान सोना भी दान करोगे तो उन (सहाबा) के एक मुठ्ठी या आधी मुठ्ठी के सामान भी न हो पाओगे (उनके कर्म के सामान)|” (सहीह अल जामी:7187)

 

आधार

Book of 70 major sins by Imam al Dhahabi,

http://www.kalamullah.com/Books/major_sins.pdf(english)

 

19 Views
Correct us and Correct yourself
.
Comments
Top of page