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नमाजियों के लिए तीस शुभसूचनाएँ (खुरआन व हदीस के प्रकाश में)

इस्लामी भाईयों !

ला इलाहा इल्लल्लाह व मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह की गवाही के बाद जो सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य एक मुसलमान पर लागू होता है वह पाँच समय की नमाज़ है : वह नमाज़ जो कि कुफ्र (अधर्म) व शिर्क (अनेकेश्वरवाद) और मुसलमान व्यक्ति के बीच अंतर है, इस्लाम और नास्तिकता के बीच फर्क है, जिसके बारे में परलोक के दिन सबसे पहले प्रश्न किया जायेगा, जो नबी की आँखों की ठंडक है और जो आप के जीवन के अंतिम क्षणों की वसीयत है, इसके अतिरिक्त यह इसकी पाबन्दी और रक्षा करने वालों के लिए अपने अन्दर बहुत सारी विशेषताएं, शुभसूचनाएं और बशारतें रखती है, जो एक मुसलमान को इस पर कार्यबध्ध रहने की प्रेरणा देती है|

अतः : नमाज़ की विशेषताओं से सम्बंधित कुछ महान शुभसूचनाएं, बशारतें – खुरआन व हदीस की जुबानी – आपकी सेवा में प्रस्तुत की जा रही है, इन-शा अल्लाह, ये आपके भीतर नमाज़ की पाबन्दी करने का उत्साह पैदा करेगी :

विषय सूची

 

नमाज़ अल्लाह के निकट सबसे पसंदीदा अमल है

अब्दुल्लाह बिन मसूद रजिअल्लाहुअन्हु कहते है कि मैंने अल्लाह के नबी से पूछा कि अल्लाह के निकट कौन सा कार्य सबसे पसंदीदा है? आप ने फ़रमाया : “नमाज़ को उसके समय पर पढ़ना|” [सहीह बुखारी : 527, 5970, सहीह मुस्लिम : 85]

 

नमाज़ मनुष्य को उसके पालनहार से जोडती है

नबी ने फ़रमाया : “...धर्म के मामले का मूल तत्व इस्लाम (अर्थात शहादतैन यानी ला इलाहा इल्लल्लाह व मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह की गवाही) है और उसका स्तंभ नमाज़ है और उसकी पराकाष्ट जिहाद (अल्लाह के मार्ग में संघर्ष करना) है|” [सहीह सुनन तिरमिज़ी : 2616]

 

नमाज़ नूर (रौशनी और प्रकाश) है

नबी ने फ़रमाया : “नमाज़ प्रकाश है|” [सहीह मुस्लिम, सहीह जामे : 925]

 

नमाज़ निफाक़ (पाखण्ड) से पवित्रता का प्रतीक है

नबी ने फ़रमाया : “मुनाफिकों पर फ़ज्र और इशा की नमाज़ से अधिक कठिन और भारी कोई नमाज़ नहीं है, और यदि उन्हें पता चल जाये कि उन दोनों नमाज़ों के अन्दर क्या (भलाई) है तो वे उन दोनों (नमाज़ों) में अवश्य आयेंगे भले ही उन्हें घुटनों के बल घिसट कर ही क्यों न आना पड़े|” [सहीह बुखारी : 627]

नमाज़ नरक की आग से बचाव है

नबी ने फ़रमाया : “जिस व्यक्ति ने भी सूर्य उगने से पूर्व और सूर्यास्त से पूर्व नमाज़ पढ़ी वह आग (नरक) में कदापि प्रवेश नहीं करेगा|” [सहीह मुस्लिम : 634]

 

नमाज़ अश्लीलता (बेहयाई) और बुरे कामों से रोकती है

अल्लाह सर्वशक्तिमान का फ़रमान है : “जो किताब (यानी खुरआन मजीद) आपकी ओर वही की गयी है उसकी तिलावत (अनुसरण) कीजिये और नमाज़ कायम कीजिये, निस्संदेह नमाज़ अश्लीलता और बुराई से रोकती है|” [खुरआन सूरा अनकबूत -  29:45]

क्योंकि जब मुसलमान व्यक्ति नमाज़ को कायम करता है और खुशू व खुजू के साथ उसके अरकान व शराइत को पूरा करता है, तो उसका दिल स्वच्छ, पवित्र और प्रकाशमान हो जाता है, उसके ईमान में वृध्धि हो जाती है, भलायियों की अभिरुचि बढ़ जाती है और बुराईयों की इच्छा कम या शून्य हो जाती है| इस तरीक़े पर नमाज़ की पाबन्दी करना अवश्य ही नमाज़ी को अश्लीलता और बुरे कामों से रोकेगी|

 

नमाज़ महत्वपूर्ण कामों में सहायक है

अल्लाह सर्वशक्तिमान का फ़रमान है : “और तुम सब्र और नमाज़ के द्वारा मदद प्राप्त करो|” [खुरआन सूरा बखरा – 2:45]

तथा नबी ने फ़रमाया : “जमात के साथ (यानी समूह में) पढ़ी जाने वाली नमाज़ अकेले पढ़ी जाने वाली नमाज़ से सत्ताईस दर्जा (गुना) बेहतर है|” [सहीह बुखारी - 645, सहीह मुस्लिम - 650]

 

नमाज़ पढ़ने वाले के लिए फ़रिश्ते दया और क्षमा की दुआ करते है

नबी ने फ़रमाया : “जब तक तुम में से कोई व्यक्ति अपनी उस नमाज़ पढ़ने की जगह (नमाज़ स्थल) में होता है जहाँ उसने नमाज़ पढ़ी है, फ़रिश्ते (स्वर्गदूत) उसके लिए दुआ करते रहते है जब तक कि वह अपवित्र न हो जाए (यानी उसका वुजू टूट न जाए), वे कहते है : “ऐ अल्लाह! तू उसे क्षमा कर दे, ऐ अल्लाह! तू उस पर दया कर|” [सहीह बुखारी – 445, सहीह मुस्लिम – 649]

 

पाप के क्षमा कर दिए जाने की शुभसूचना

नबी ने फ़रमाया : “जिसने नमाज़ के लिए वुजू किया और सम्पूर्ण वुजू किया, फिर फ़र्ज़ नमाज़ के लिए चलकर गया और लोगों के साथ या जमात (समूह) के साथ या मस्जिद में नमाज़ पढ़ी, तो अल्लाह ताला उसके पाप (गुनाहों) को क्षमा कर देगा|” [सहीह मुस्लिम – 232]

 

नमाज़ी का शरीर गुनाहों से पवित्र हो जाता है

नबी ने फ़रमाया : “तुम्हारा क्या विचार है कि यदि तुम में से किसी व्यक्ति के द्वार पर एक नदी हो जिसमे वह प्रति दिन पाँच बार स्नान करता हो, क्या उसके शरीर पर कुछ मैल बाकी रहेगी?” सहाबा रजिअल्लाहुअन्हुम ने उत्तर दिया : “उसकी कुछ भी मैल बाकी नहीं रह जाएगी|” आप ने फ़रमाया : “तो यही उदाहरण पाँच नमाज़ों का भी है, उनके द्वारा अल्लाह ताला गुनाहों को मिटा देता है|” [सहीह बुखारी – 528, सहीह मुस्लिम – 667]

 

स्वर्ग में आतिथ्य तैयार करने की शुभसूचना

नबी ने फ़रमाया : “जो व्यक्ति सुबह या शाम के समय मस्जिद जाता है तो अल्लाह ताला उसके लिए स्वर्ग में मेहमानी (आतिथ्य) तैयार करता है जब भी वह सुबह या शाम के समय जाता है|” [सहीह बुखारी – 662, सहीह मुस्लिम – 669]

 

मस्जिद की ओर जाने पर एक पग पर एक गुनाह मिटता है और दूसरे पग पर एक पद ऊंचा होता है

नबी ने फ़रमाया : “जिसने अपने घर में पवित्रता हासिल की, फिर अल्लाह के घरों में से किसी घर की ओर रावाना हुआ ताकि अल्लाह की अनिवार्य की हुई फ़र्ज़ नमाज़ों में से किसी फ़र्ज़ नमाज़ को अदा करे तो उसका एक पग एक पाप को मिटाता है और दूसरा पग एक पद ऊंचा करता है|” [सहीह मुस्लिम – 666]

नमाज़ के लिए जल्दी आने वालों के लिए बड़े पुण्य की शुभसूचना

नबी ने फ़रमाया : “यदि लोगों को पता चल जाये कि अज़ान देने और पहली सफ (पंक्ति) में नमाज़ पढ़ने की क्या विशेषता और महान पुण्य है, फिर वे उसे प्राप्त करने के लिए कुरआ डालने के अलावा कोई समाधान न पाए तो वे उस पर अवश्य ही कुरआ अंदाजी (lottery) करेंगे, तथा यदि उन्हें पता चल जाये की नमाज़ की ओर जल्दी आने में क्या पुण्य व सवाब है तो वे उसकी ओर अवश्य पहल करेंगे|”  [सहीह बुखारी – 615, 689; सहीह मुस्लिम – 437]

नमाज़ की प्रतीक्षा करने वाला निरंतर नमाज़ की अवस्था में होता है

नबी ने फ़रमाया : “तुम में से कोई भी व्यक्ति निरंतर नमाज़ (के पुण्य) की हालत में होता है जब तक कि नमाज़ उसे रोके रहती है, उसे अपने परिवार के पास लौटने से केवल नमाज़ रोकती है|” [सहीह बुखारी – 659, सहीह मुस्लिम – 649]

जिसकी आमीन फरिश्तों की आमीन से मिल गयी उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जायेंगे

नबी ने फ़रमाया : “जब तुम में से कोई व्यक्ति आमीन कहे और आसमान में फ़रिश्ते भी आमीन कहे और एक की आमीन दूसरे की आमीन के अनुरूप हो जाये (यानी दोनों आमीन एक ही समय में हो) तो उसके पिछले गुनाहों को क्षमा कर दिया जायेगा|” [सहीह बुखारी – 781, सहीह मुस्लिम – 410]

अल्लाह सर्वशक्तिमान के शरण और सुरक्षा की शुभसूचना

नबी ने फ़रमाया : “जिस व्यक्ति ने सुबह (फ़र्ज़) की नमाज़ पढ़ी वह अल्लाह के ज़िम्मा और शरण में है, तो ऐ आदम के बेटे (यानी मनुष्य) ! देख कही अल्लाह ताला तुझ से अपने ज़िम्मा में से किसी चीज़ की माँग न करे|” [सहीह मुस्लिम – 657]

इसका अर्थ यह है कि ऐसे व्यक्ति से छेड़ छाड़ न करो और उसे नुकसान या कष्ट न पहुंचाओं जिसे अल्लाह का शरण और अमान प्राप्त हो| दूसरा अर्थ यह है कि फज्र की नमाज़ छोड़ने से बचो जिसके कारण से तुम्हे अल्लाह का शरण प्राप्त हुआ है, ताकि ऐसा न हो कि अल्लाह तुम से अपना शरण वापस ले ले| इस हदीस में नमाज़े छोड़ने वालों के लिए कड़ी धमकी है तथा फज्र की नमाज़ में उपस्थित होने की रूचि दिलाई गयी है|  

परलोक के दिन भरपूर प्रकाश की शुभसूचना

नबी ने फ़रमाया : “अंधेरे में मस्जिद की ओर जाने वालों को क़ियामत के दिन मुकम्मल रौशनी की शुभसूचना दे दो|” [अबू दावूद, तिरमिज़ी, सहीहुल जामी, हदीस नं 2823]

पाबन्दी के साथ फज्र और अस्र की नमाज़ पढ़ने वाले के लिए स्वर्ग की शुभसूचना

नबी ने फ़रमाया : “जो व्यक्ति दो ठन्डे समय की नमाज़े (यानी फज्र और अस्र) पढता रहा वह स्वर्ग में प्रवेश करेगा|” [सहीह बुखारी 574, सहीह मुस्लिम 635]

पुल सिरात पार करके स्वर्ग में पहुँचने की शुभसूचना 

नबी  ने फ़रमाया : “मस्जिद हर परहेज़गार का घर है, और अल्लाह ताला ने उस व्यक्ति के लिए जिसका घर मस्जिद हो राहत व दया और पुल सिरात पार कर अल्लाह ताला की प्रसन्नता, स्वर्ग में पहुँचने की शुभसूचना दी है|” [तब्रानी, अल्लामा अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इसे सहीह करार दिया है]

नमाज़ उसकी पाबन्दी करने वाले के लिए क़ियामत के दिन नजात का कारण है

नबी ने नमाज़ के महत्व का उल्लेख करते हुए फ़रमाया : “जिसने नमाज़ की रक्षा की वह उसके लिए क़ियामत के दिन रौशनी, प्रमाण और नजात का कारण होगी, और जिसने उसकी रक्षा नहीं की उसके लिए न कोई रौशनी होगी, न प्रमाण होगा, और न ही नजात का कोई साधन होगा, और क़ियामत के दिन वह कारून, फिरौन, हामान और उबै बिन खलफ (जैसे नास्तिकों) के साथ होगा|” [मुसनद अहमद, दारमी, अलबानी ने मिशकात (हदीस नं 578, 1/127) में इसे सहीह कहा है]

नमाज़ गुनाहों के लिए कफ्फारा (प्रायश्चित) है

नबी ने फ़रमाया : “पाँच समय की नमाज़ें, एक जुमा दूसरे जुमा तक, और एक रमजान दूसरे रमजान तक, उनके बीच होने वाले गुनाहों के लिए कफ्फारा (प्रायश्चित) है, जबकि बड़े गुनाहों से बचा जाये|” [सहीह मुस्लिम – 233]

नमाज़ नबी के साथ स्वर्ग में प्रवेश करने के महान कारणों में से है

रबीआ बिन कअब अल-असलमी रजिअल्लाहुअन्हु कहते है कि मै रसूलुल्लाह के साथ रात बिताता था और आप के वुजू का पानी लाया करता और आपकी आवश्यकताएं पूरी कर दिया करता था, तो आपने मुझसे फ़रमाया : “तुम माँगो|” तो मैं ने कहा : मै स्वर्ग में आपकी सांगत का प्रश्न करता हूँ, आप ने फ़रमाया : “क्या इसके अलावा कोई अन्य माँग है?” मै ने कहा : बस वही| तो आप ने फ़रमाया : “तो तुम अधिक सजदों (यानी अधिक से अधिक नफ्ली नमाज़ों) के द्वारा अपने आप पर मेरी मदद करो|” [सहीह मुस्लिम – 489]

नमाज़ के कारण अल्लाह ताला दो नमाज़ों के बीच होने वाले गुनाहों को क्षमा कर देता है

नबी ने फ़रमाया : “जो भी मुसलमान व्यक्ति वुजू करता है और अच्छी तरह वुजू करता है, फिर कोई नमाज़ पढता है तो अल्लाह ताला उसकी उस नमाज़ और उसके बाद वाली नमाज़ के बीच होने वाले गुनाहों को बख्श देता है|” [सहीह मुस्लिम – 227]

उसके पिछले गुनाह क्षमा कर दिए जाते है

नबी ने फ़रमाया : “जो भी मुसलमान आदमी किसी फ़र्ज़ नमाज़ के समय को पाटा है, फिर उसके लिए अच्छी तरह वुजू करता है, उसके अन्दर खुशू व खुजू से काम लेता है और उसके रुकूअ को मुकम्मल करता है तो यह नमाज़ उसके पिछले गुनाहों के लिए कफ्फारा बन जाएगी जब तक कि वह कोई बड़ा गुनाह न करे, और यह जीवन भर होता रहता है|” [सहीह मुस्लिम – 228]

नमाज़ की प्रतीक्षा करना अल्लाह के रास्ते में रिबात है

नबी ने फरमाया : “क्या मै तुम्हे ऐसी चीज़ के बारे में न बतलाऊं जिसके द्वारा अल्लाह सर्वशक्तिमान गुनाहों को मिटा देता है और पदों को ऊंचा कर देता है? सहाबा रजिअल्लाहुअन्हुम ने कहा : “ऐ अल्लाह के नबी ! क्यों नहीं, आप ने फ़रमाया : “नापसंद होने और कष्ट के बावजूद मुकम्मल वुजू करना, मस्जिदों की तरफ पगों की अधिकता और एक नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ की प्रतीक्षा करना, तो यही रिबात है, तो यही रिबत है|” [सहीह मुस्लिम – 251] (रिबात का अर्थ है : दुश्मनों से सुरक्षा के लिए सीमा की पहरेदारी करना, यह एक प्रकार का जिहाद है| इसी प्रकार उपयुक्त कामों की पाबन्दी करना भी जिहाद के समान है|)

नमाज़ की ओर जाने का अज्र व सवाब (पुण्य) मोहरिम हाजी के अज्र व सवाब (पुण्य) के समान है

नबी ने फ़रमाया : “जो व्यक्ति अपने घर से वुजू बनाकर किसी फ़र्ज़ नमाज़ के लिए निकला तो उसका अज्र व सवाब (पुण्य) मोहरिम हाजी के अज्र व सवाब (पुण्य) के समान है, और जो व्यक्ति चाश्त की नमाज़ के लिए निकला, उसे केवल वही नमाज़ थकाती (या निकलने पर उभारती) है तो उसका अज्र व सवाब (पुण्य) उम्रा करने वाले के अज्र व सवाब (पुण्य) के समान है, और एक नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ जिनके बीच बेकार बात न हो वह इल्लीईन में लिखी जाती है|” [अबू दावूद, अलबानी ने इसे हसन कहा है, सहीह अबू दावूद- 567, सहीह जामी- 6228]

जो व्यक्ति नमाज़ से पीछे हो गया जबकि वह नमाजियों में से है तो उसके लिए जमात के साथ नमाज़ में हाज़िर होनेवालों के समान अज्र व सवाब (पुण्य) है

नबी ने फरमाया : “जिस व्यक्ति ने वुजू किया और अच्छी तरह वुजू किया, फिर नमाज़ के लिए गया तो लोगों को इस हाल में पाया कि वे नमाज़ पढ़ चुके थे तो अल्लाह ताला उसे उन लोगों के समान अज्र व सवाब (पुण्य) प्रदान करेगा जिन्होंने वह नमाज़ जमात के साथ पढ़ी है, और यह उनके अज्र व सवाब (पुण्य) में कोई कमी नहीं करेगा|” [सहीह अबू दावूद 3/99, हाकिम ने इसे सहीह कहा है और ज़हबी ने इस पर सहमति जताई है]

जब कोई व्यक्ति वुजू करके नमाज़ के लिए निकलता है तो वह वापस लौटने तक निरंतर नमाज़ की अवस्था में होता है 

नबी ने फरमाया : “जब तुम में से कोई व्यक्ति अपने घर में वुजू करे, फिर मस्जिद में आए तो वह वापस लौटने तक नमाज़ (के पुण्य) की हालत में होता है, अतः वह ऐसा न करे|” और आप ने अपनी अँगुलियों के बीच तश्बीक (एक हाथ की अँगुलियों को दूसरे हाथ की अँगुलियों में दाखिल) किया| अर्थात कोई बेकार कार्य न करे| [सहीह इब्ने खुज़ैमा, अल्लामा अलबानी ने इसे सहीह कहा है, सहीहुल जामी- 445]

आधार

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