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इस्लामी आदर्श पत्नी

इस्लाममेंविवाहकोप्रोत्साहितकियागयाजोभीपरिपक्वताकेआयुकोपहुँचजाये| यदिविवाहकेसारेसाधनहोतो, विवाहमेंविलम्बकरनाउचितनहींहै| तलाखलेनेवालेहोयाविधवातथाविधुरहो, इस्लामउन्हेंभीपुनरविवाहकेलिएप्रोत्साहितकरताहै| इस्लामअविवाहितरहनेकोप्रोत्साहितनहींकरता, बल्किइसकेविरुध्धहै|

विषयसूची

इस्लामीआदर्शपत्नीकेगुण

अल्लाहकेरसूलनेकहा : “मैंतुम्हेबताऊँकि, पुरुषकेलिएअनमोलचीज़क्याहै? वहधार्मिक, पवित्रपत्नीहै : जबवहउसेदेखताहैतोप्रसन्नहोताहै, जबवहउसेकुछकरनेकेलिएकहताहैतोवहउसेकरतीहै, औरजबवहघरसेबाहरहोतोवहउसकीविश्वासीतथाआज्ञाकारीबनीरहतीहै|” [सहीहबुखारी& मुस्लिम]   

     इस्लामीआदर्शपत्नीकेकुछसद्गुण

वहपतिकोप्रसन्नता, खुशीदेतीहै

पतिकेजीवनमेंशांतिलातीहै

पतिकेजीवनमेंदृढ़तालातीहै

पतिकेजीवनमेंशांति, सुखतथाआनंदलातीहै

पत्नीघरकोसुन्दर, मनोहरतथासुरक्षितरखतीहै

पत्नीसंतानकोसफल, साहसीतथाशिक्षितबनातीहै

पत्नीपतिकोननाराज़करेनउसकीभावनाओंकोठेसपहुंचाए|

“तथाईमानवालेपुरुषऔरस्त्रीयाँएक-दूसरेकेसहायकहै| वेभलाईकाआदेशदेतेतथाबुराईसेरोकतेहैऔरनमाज़कीस्थापनाकरतेतथाज़कातदेतेहै| औरअल्लाहतथाउसकेरसूलकीआज्ञाकापालनकरतेहै| इन्हीपरअल्लाहदयाकरेगा, वास्तवमेंअल्लाहप्रभुत्वशालीतत्वज्ञहै|” [कुरआनसूरहतौबा9:71]

 

उचितभागीदारकाचुनाव

विवाहबंधनपहलेदिनसेहीयदिनबनपायातोबड़ीसमस्याहोजाएगी| इसविषयमेंउपचारसेपहलेनिरोधउचितहोताहै| अपनेजीवनसाथीकेचुनावकेविषयमेंबहुतश्रध्दादेनीचाहिए| अल्लाहकेरसूलनेकहा : “विवाहकेलिएस्त्रीमेंचारविषयदेखनाचाहिए – उसकीआर्थिकस्थिति, पारिवारिकपरंपरा, सौंदर्य, धार्मिकगुण| इनचारमेंधार्मिकगुणवालीसेविवाहकरो, ताकिसुखीरहो|” [सहीहबुखारी : 3457]

स्त्रीकोभीपुरुषमेंयहीविशेषतापरध्यानदेनाचाहिए| यदिपुरुष धनवानहो, सुंदरहोऔरबड़ेपरिवारसेहो, किन्तुउसमेधार्मिकगुणनहोतोऐसेव्यक्तिसेविवाहनकियाजाये| क्योंकिपहलेतीनगुणोंसेसुखप्राप्तहोनानिश्चितनहींहै| किन्तुपुरुषमेंधार्मिकगुणहोतोवहअल्लाहकेनियमोंकापालनकरतेहुए, पत्नीसेप्रेमकरेगाऔरउसेसुखीरखनेकाप्रयत्नकरेगा| अल्लाहकेभयकेकारणवहउससेअन्यायतथाअत्याचारनहींकरेगा|

एकलड़कीयास्त्रीसद्गुणवालेपतिकेलिएअल्लाहसेदुआकरनाचाहिए| अल्लाहकेरसूलनेकहाकि, विवाहसेपूर्वलडकालड़कीको (किसीपरिवारकेसदस्यकेउपस्थितिमें) मिलेताकिवहएकदूसरेकीधार्मिकताकेबारेमेंजानपाये| [सहीहमुस्लिम, अबूदावूद, तिरमिज़ी, नसाई, इब्नमाजह]

“तथाजोप्रार्थनाकरतेहैकिहमारेपालनहार ! हमेंहमारीपत्नियोंतथासंतानोंसेआँखोंकीठंडकप्रदानकरऔरहमेंआज्ञाकारियोकाअग्रणीबनादे|” [कुरआनसूरहफुरखान25:74]

 

सत्यतातथाविश्वास (भरोसा)

अल्लाहकेरसूलनेकहा : “धर्मसत्यताहै|” किसीनेपूछा : “सत्यता (ईमानदारी) किसकी?” आपनेउत्तरदिया : “अल्लाहको, उसकेग्रंथोंको, उसकेनबियों (ईशदूतों) कोऔरमुस्लिमसमाजकेनेताओंकोऔरसामान्यतथाअधिकांशलोगोको|” [सहीहमुस्लिम]

धार्मिकविश्वाससत्यताकेअधिककरीबहै| पत्नीकोपतिकेप्रतिसत्यता, ईमानदारीबहुतआवश्यकहै| इससेपत्नीपतिकीअभिरुचिपरध्यानदेतीहैऔरउसकाभलाचाहतीहै|     

 

पतिकोसमझना

विवाहकेपश्चातहीपतिपत्नीएकदूसरेकेव्यक्तित्व, स्वभाव, पसंद, नापसंदकोजानतेहै| विवाहकेएकदूसरेकोसमझनेकेलिएकुछसमयलगताहै| यदिसबअच्छारहातो, एकदूसरेपरप्रेमबढ़तारहताहै|

एकदूसरेकेसम्बन्धकोअटूटबनानेकेलिए, पत्नीकोचाहिएकि, वहपतिकेव्यक्तित्वऔरस्वभावकोअच्छीतरहजानेऔरउसप्रकारसेउसकेसाथव्यवहारकरेकि, वहउससेप्रसन्नहो|

“......वहतुम्हारावस्त्रहै, तथातुमउनकावस्त्रहो..........|” [कुरआनसूरहबखरह2:187]   

अल्लाहकेरसूलनेकहा : “यहसंसारसामग्रीहै, औरउसमेसबसेअच्छीसामग्री, आदर्श (भली) पत्नीहै|” [सहीहमुस्लिम, नसाई]

अल्लाहकेरसूलनेऐसाभीकहा : “क्यामैंतुम्हे, मनुष्य (पुरुष) केलिएउत्तमनिधिकेबारेमेंबताऊँ? (वह) आदर्शपत्नी (सत्यवतीस्त्री) : जबवहउसेदेखेतोवहप्रसन्नहोजाये; जबवहउसे (कुछ) कहे, तोवहउसकीअनुज्ञा (आज्ञापालन) करे; औरजबवहउपस्थितनहोतो, (उसकेअभिरुचिका) ध्यानरखे|” [अबूदावूद]

 

घर

घरस्वर्गयानरकहोसकताहै, पतिपत्नीकेसम्बन्धकेआधारपर| घरकेसारेकामकीज़िम्मेदारहोनेकीवजहसेपत्नीघरकेवातावरणकोसहीरखसकतीहै| वहसबकोप्रसन्नकरनेवालीहो|

इस्लामीशास्त्र (शरियत) केअनुसारपत्नीपरघरकेसारेलोगोकाभोजनबनानायाघरकीसाफ़सफाईकीज़िम्मेदारीनहींहै, किन्तुवहघरकेप्रबंधककेरूपमेंयहसबकामकीदेखरेखकरे| यदिपतिकोएकयादोनौकर (सेवक) रखनेकीक्षमताहोतोवहउन्हेंरखकरपत्नीपरसेकामकाबोझकमकरे| आजकलतोकुछऐसेसाधनआगएहै, जिससेघरकेकाममेंमहिलाओंकोबहुतमददमिलतीहै| यदिपतिकेपासनौकररखनेकीक्षमतानहोऔरपत्नीघरकाकामकरनेमेंसक्षमहोतोवहऐसाकरके, अपनेलिएपरलोकमेंउत्तमप्रतिफलपासकतीहै|

 

आप, आपकापरिवारऔरअल्लाह

मुसलमानों (विश्वासियो) कोयहध्यानरहेकि, विवाहमेंतीनवर्गहोतेहै : पति, पत्नीऔरअल्लाह- दोनोंकापालनहारऔरसाक्षी| कुरआनमेंबारबारकहागयाकि, “अल्लाहवहसबकुछदेखरहाहैजोतुमकरतेहो|”

दोनोंपतिपत्नीअल्लाहकेदासहैऔरसच्चेविश्वासी (मुसलमान) कीतरहजीवनव्यतीतकरनाचाहिए| अर्थातअल्लाहकाआज्ञापालनकरतेहुएतथारसूलकेबतायेहुएतरीकेपरचलतेहुए|

पतिकोपरिवारकाउत्तरदायीनेताऔरपत्नीकोपतिकीउत्तरदायीअनुयायीकीभूमिकानिभानीचाहिये| यदिपत्नीकुछग़लतकरेतो, पतिकोउसेवहगलतीबतानीचाहिएऔरपत्नीउसगलतीकीसुधारकरनीचाहिए|

अल्लाहकेरसूलनेकहा : “जोपत्नीअंतिमक्षण (मृत्युतक) अपनेपतिकोप्रसन्नकरे, उसेप्रतिफलकेरूपमेंस्वर्गप्राप्तहोगा|” [इब्नमाजह]

 

सखी (मित्र) औरसामाजिकजीवन

विवाहसेपूर्वहरलड़कीकेकुछसखी (मित्र) होतेहै, जोउसकेविश्वासपात्र (हमराज़) होतेहै| वहउनसेमित्रतानहींछोडनीचाहिए, परन्तुउसेध्यानरहेकि, विवाहकेपश्चातउसकाकरीबीमित्र, उसकापतिहोनाचाहिए| वहअपनेमित्रोसेअपनेनिजीजीवनकेबारेमें, विशेषरूपसेयौनसम्बन्धविषयकेबारेमेंनहींकहनाचाहिए| पतिसेकीगयीनिजीबातेंभीमित्रोकेआगेनकहाजाये| यदिपत्नीनेऐसाकियातोवहसमस्यायोंमेंघिरसकतीहै| यदिसमस्याओंसेबचनाहोतो, निजीविषयसार्वजनिकनकरे|  

यदिदोनोंकेबीचकुछसमस्याहोतो, उसेऐसेव्यक्तिकेआगेरखेजोइनकेनिजीविषयकोसार्वजनिकनकरेऔरअच्छीसलाहदे| जबभीबहारजायेतोपत्नीअपनीमर्यादा (वस्त्रमें, परदेमें) कापूराखयालरखे| वहदिखावेसेबचे| लोगोमेंखुशबूलगानेसेभीबचे|

 

आधार

[1] http://www.islamhouse.com/p/379000

    

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