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आप अपने उपयोगी उम्र (आयु) की रक्षा कैसे करे ?

क्या इस अच्छे और भलाई के बाद जिसका ज्ञान इंशा अल्लाह आप को जल्द ही होगा, जिससे आपकी दुनियावी कमाई में वृध्धि होगी, क्या आप उम्र नष्ट करना पसंद करेंगे? क्या आप के लिए यह उचित नहीं कि श्रध्दा के साथ इन कार्यों की पाबन्दी करे ताकि आप प्रलय के दिन उन्ही के साथ अल्लाह ताला से मिले, इसलिए अल्लाह की दया की ओर दौड़े तथा प्रलय के दिन अपने पुण्य की रक्षा के लिए चार कार्य से बचे|

विषय सूची

पुण्य को खोने तथा नष्ट करने वाले विषय से बचना

आप यह विषय जान ले कि कुछ बड़े पाप ऐसे है जो पुण्य को बिल्कुल नष्ट करके बुराईयों के पलड़े को भारी कर देते है| इसलिए आप उन्हें अच्छी तरह जान ले और उनसे बचे| याद रहे पुण्य को नष्ट कर देने वाले कर्मो में से किसी एक का करना तुम्हारे सारे पुण्य को नष्ट करने के लिए काफी है, चाहे पुण्य पहाड़ जैसे हो, इसलिए सावधान रहे| सोबान रजिअल्लाहुअन्हु ने अल्लाह के रसूल से एक ऐसी हदीस उल्लेख की है, जो सुसज्जित लोगो के शयानागार (सोने के स्थानों) को चकना चूर कर दिया| और उनके पुण्य कार्य पर उन्हें अधिक डरा दिया| उन्होंने कहा कि, अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया : “मैं अपने समुदाय (उम्मत) में से कुछ ऐसे लोगो को अवश्य जानता हूँ, जो महाप्रलय के दिन तिहामा के सफ़ेद पहाड़ के प्रकार पुण्य लेकर आयेंगे, किन्तु अल्लाह ताला उन्हें गर्द व गुबार के प्रकार हवा में उडा देगा|” सौबान रजिअल्लाहुअन्हु ने पूछा, आप हमें उनकी पहचान बतायें ताकि हम लोग अज्ञान के कारण इनमे से हो न जाये| तो आप ने फ़रमाया : “वह तुम्हारे रंग तथा नस्ल के तुम्हारे भाई होंगे| वह रातों में वैसे ही उपासना करेंगे, जैसे तुम करते हो| परन्तु वह ऐसे लोग होंगे कि जब वह अल्लाह की हराम (अवैध) की हुई चीज़ों के साथ एकांत में होंगे तो उसे कर दालेंगे|” [सिलसिलतुस्सहीह – शेख अल्बानी रहिमहुल्लाह – 5052]

 

कर्म पर घमंड, अहंकार

अपने पुण्य की अधिकता पर अहंकार से बचे| क्यों की यह एक प्रकार अल्लाह ताला पर अहसान जताना है| ऐसा करने से आप पस्ती से दोचार हो जायेंगे| अल्लाह ताला ने इस से मना फ़रमाया है : “अपनी कोशिशों को अधिक समझकर उसके क्रम को भंग न करो|” [खुरआन सूरा मुद्दस्सिर 74:6]

इसीलिए सल्फे सालेहीन (धार्मिक पूर्वज) रहिमहुमुल्लाह ने कर्म पर अहंकार की बरबादियों से सावधान किया है| अब्दुल्लाह बिन मसूद रजिअल्लाहुअन्हु ने फ़रमाया : “मुक्ति दो चीज़ों में है - अल्लाह का भय और संकल्प| बरबादी दो चीजों में है – निराशा और खुद पसंदी|” अधिक पुण्य पर अहंकार के नष्ट में से एक बड़ा नष्ट यह है कि, कोई केवल अपने पुण्य को याद रखे और यह समझे कि स्वर्ग में जाने के लिए काफी है, जबकी वह अपने बुराईयों से गाफिल है|                     

सलमा बिन दीनार ने फ़रमाया : “इन्सान पुण्य कार्य करता है और उस कर्म को करते हुए उसे आनंद होता है| जबकि उसके लिए अल्लाह ने जो बुराई पैदा की है, उस से कई अधिक हानिकारक है| इन्सान पाप करता है, जिसे करते समय उसे आनंद नहीं मिलता है, जबकि अल्लाह ने जो भलाई पैदा की है उसके लिए अधिक लाभकारी है| वह इस प्रकार कि इन्सान पुण्य करता है, जिस से उसे आनंद होता है| यहाँ तक कि वह स्वयं पसंदी का शिकार हो कर अपने आप को बड़ा समझने लगता है| वह अनुमान करता है कि इस पुण्य के कारण उसे दूसरों पर प्रमुखता प्राप्त है| जबकि ऐसा हो सकता है कि अल्लाह ताला इस कर्म को और उसके साथ बहुत सारे कर्म को नष्ट करदे| निस्संदेह एक इन्सान जब बुराई करता है तो उसे वह बुराई नापसंद लगती है, हो सकता है इसके द्वारा अल्लाह ताला इसके दिल में ऐसा डर पैदा कर दे कि, जब वह अल्लाह ताला से मिले तो उसका डर उसके दिल में बाकी हो|”

 

अधिक पुण्य कर्म पर अहंकार तथा घमंड के कुछ उपचार

  1. इस विषय पर दृढ़ विश्वास हो कि, आप को इस जीवन में जिस सुकर्म की सदबुध्धि दी गयी वह अल्लाह ताला की दया और कृपा है, अल्लाह ताला ने फ़रमाया : “तुम्हे जो भी सुख-सुविधा प्राप्त है वह अल्लाह ही की ओर से है.....|” [खुरआन सूरा नहल 16:53]
  2. यह बात कभी न भूले कि अल्लाह के कुछ बन्दे है जो आप से कई अधिक पुण्य प्राप्त करते है, जैसे कष्ट पर धीरज करने वाले, इसलिए उन्हें इस पर अनगिनत पुण्य दिया जायेगा| अल्लाह ताला फरमाता है : “आप कह दे उन भक्तो से जो ईमान लाये तथा डरे अपने पालनहार से कि उन्ही के लिए जिन्होंने सदाचार किये इस संसार में बड़ी भलाई है| तथा अल्लाह की धरती विस्तृत है| और धैर्यवान ही अपना पूरा प्रतिफल अगणित दिए जायेंगे|” [खुरआन सूरा ज़ुमर 39:10]

इसलिए आप को अपने अधिक पुण्य पर अहंकार नहीं होना चाहिए, क्यों कि जीवित इन्सान कभी भी नष्ट (फितने) से सुरक्षित नहीं होता|       

  1. यह ध्यान रहे कि आप कितना भी पुण्य करले, प्रलय के दिन के भयानक दृश्य के आगे उसका कोई स्थान नहीं होगा| अल्लाह के रसूल ने फ़रमाया : “यदि कोई व्यक्ति जन्म के दिन से लेकर मृत्यु तक अपने चेहरे के बल अल्लाह ताला की सहमति तथा प्रसन्नता में अपने चेहरे के बल घसीटा जाये तो वह इसे प्रलय के दिन तुच्छ और कम समझेगा|” [सिल्सिलतुल अहादीस अस्सहीह 446] ??????
  2. अपने अधिक पुण्य पर आप भरोसा न करे, क्यों कि आप बिल्कुल नहीं जानते है कि आपका कर्म स्वीकार हुआ या नहीं| इब्ने औन रहिमहुल्लाह ने फ़रमाया : “अधिक पुण्य पर भरोसा न करे, क्यों कि तुम नहीं जानते कि वह स्वीकार हुआ या नहीं और अपने पाप पर संतुष्ट न रहे, क्यों कि तुम नहीं जानते कि तेरा पाप तुझसे मिटा दिया गया या नहीं, सारा का सारा कर्म तुझ से गायब है|” [जामे उल उलूम वल हिक्म 1/438]

आइशा रजिअल्लाहुअन्हा ने फ़रमाया : “मैंने रसूल से इस आयत के बारे में पूछा : “और जो करते है जो कुछ भी करे, और उनके दिल कांपते रहते है कि वे अपने पालनहार की ओर फिर कर जाने वाले है|” [खुरआन सूरा मोमिनून 23:60]

(डरने वाले कौन लोग है) वह जो शराब पीते है, चोरी करते है, नबी ने फ़रमाया : “नहीं ऐ सिद्दीक की लाडली, बल्कि वह लोग जो नमाज़ पढ़ते है, उपवास रखते है, दान करते है, परन्तु डरते रहते है कि कही ये स्वीकार न हो कर नकार न दिए जाये| यही वह लोग है जो भलायियों में जल्दी करते है|” [सहीह इब्न माजह 3384]

लोगो के अधिकार पर अत्याचार करने से बचे

अपने किसी मुसलमान भाई को दुःख देने और लोगो के अधिकार मारने से बिल्कुल बचे| क्यों कि यदि तुमने ऐसा किया तो लोग प्रलय के दिन अपने पूरे अधिकार को लेने के लिए तुम्हारी इकठ्ठा किये हुए पुण्य ले लेंगे| जैसा कि अबू हुरैरह रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया है कि नबी ने पूछा : “क्या तुम जानते हो कि निर्धन कौन है ? सहाबा ने कहा, हम में निर्धन वह इन्सान है, जिस के पास दिरहम और सामान न हो| तो आप ने फ़रमाया : “मेरे समुदाय (उम्मत) का निर्धन प्रलय के दिन ज़कात, नमाज़, उपवास लेकर आएगा, साथ ही साथ किसीको गाली दिया होगा, किसी पर आरोप लगाया होगा, किसी का माल खाया होगा, किसी का खून बहाया होगा, हत्या किया होगा – अतः उन लोगो को उसकी भलाईयां दे दी जाएगी, और उस पर जो अधिकार है उसका निर्णय होने से पहले यदि उसकी भलाईयां अंत हो जाये, तो उन लोगो के पाप (गलतियाँ) उसके ऊपर लाद दी जायेंगी, फिर उसे नरक में फेंक दिया जायेगा|” [सहीह मुस्लिम 16/135]

 

ऐसी बुराईयों से बचो जिनका पाप जारी रहेगा

जहाँ आप ऐसे कर्म के इच्छुक है, जिनका पुण्य मृत्यु के बाद भी जारी रहे, वही पर आप पूरी तरह से ऐसी बुराईयों से भी बचे, जिनका पाप मृत्यु के बाद भी जारी रहेगा| अल्लाह के नबी ने फ़रमाया : “जिसने इस्लाम में कोई अच्छा मार्ग निकाला तो उसे उसका पुण्य मिलेगा और बिना कमी किये हुए उस पर चलने वालो का भी पुण्य प्राप्त होगा| तथा जिसने इस्लाम में कोई बुरा मार्ग निकाला, तो उसे उसका पाप एवं गुनाह मिलेगा और बिना कमी किये हुए उस पर चलने वालो का भी उसे पाप मिलेगा|” [सहीह मुस्लिम 16/226]

इमाम शातबी रहिमहुल्लाह ने फ़रमाया : “शुभ सन्देश है उस व्यक्ति के लिए जिसके मृत्यु के साथ साथ उसके पाप भी समाप्त हो गए और बड़ा दुर्भाग्य है उस व्यक्ति के लिए जो मर गया, परन्तु उसके पाप सौ वर्ष या दो सौ वर्ष बाकी रहे, जिसके कारण उसे उसकी समाधि में दंड (अज़ाब) दिया जायेगा तथा उसके समाप्त होने तक उस से पूछा जायेगा|” [अल मुवाफिकात फी उसूलि शरीअह – इमाम शातबी – 1/229]     

हबीब अबू मुहम्मद ने कहा है कि, इन्सान का सौभाग्य है कि उसके मरते ही उसके पाप मर जाये|

इसका उदाहरण, जिसके मरने से उसके पाप नहीं समाप्त होते, वह माता पिता है, जिनकी संतान यदि इस्लाम का पाबंद बनता है तो उसे रोकते है या उसके लिए अवैध (हराम) फ़िल्मी चीज़ें करीद के देते है या उसे ऐसे कामो में आज़ाद किये हुए होते है|

इसलिए एक मुसलमान को ऐसे जारी रहने वाले पापो से बचना चाहिए, जो कि मुसलमानों के घरों को बरबाद करने वाले है|              

 

सारांश

एक मुसलमान का उद्देश्य साधारण लोगो से बिल्कुल अलग होता है| मुसलमान का उद्देश्य अल्लाह ताला की उपासना और अपने समय को अनमोल जानकार ऐसे सुकर्म द्वारा वृध्धि करना, जिसके कारण अल्लाह ताला प्रलय के दिन उसे उच्च स्थान और सर्वोच्च शान दे, जब कि सबसे बड़ी चिंता जो उसे आती है ये कि वह सोचता है कि उसकी आयु कम है| यदि कुछ ऐसे पुण्य कर्म है जो आयु सुदीर्घ (लम्बी) करने पर सहयोगी तथा मददगार है|

 

आधार

www.islamhouse.com

 

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