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आईशा बिन्त अबी बक्र रजिअल्लाहुअन्हा

आप अबू बक्र रजिअल्लाहुअन्हु के बेटी और अल्लाह के रसूल मुहम्मद की पत्नि है| अल्लाह के रसूल के मृत्यु के पचास साल बाद तक आईशा रजिअल्लाहुअन्हा इस्लाम के ज्ञान (हदीस के ज्ञान) की रक्षा की और उसे दूसरों तक पहुँचाने में प्रमुख भूमिका निभाई|

अल्लाह के रसूल आईशा रजिअल्लाहुअन्हा से शव्वाल के माह में विवाह किया| सौदा रजिअल्लाहुअन्हा से विवाह के एक वर्ष बाद ही आईशा रजिअल्लाहुअन्हा से विवाह किया| आप, अल्लाह के रसूल की पत्नियों में अकेली कन्या थी और आप की सबसे प्यारी पत्नि थी| वह अपनी यौव्वन दशा में अल्लाह के रसूल के पास आई, इसलिए वह आप के पास बहुत ज्ञान प्राप्त किया| इतना ज्ञान प्राप्त किया कि, कोई दूसरी स्त्री आप से उतना ज्ञान प्राप्त न कर सकी| पूरे इस्लामी चरित्र में उन जैसी ज्ञानवती स्त्री कोई नहीं है| उनका देहांत 17 रमज़ान, 57 AH, को हुआ और वह बखी में दफनाई (शावाधानित) गई| [1]

विषय सूची
  • संक्षिप्त जीवन चरित्र आपकी बुध्धी
  • आपकी विशिष्ठता
  • अल्लाह के रसूल के अंतिम दिन आपके साथ
  • पूरा नाम
  • माता पिता
  • बहन भाई
  • जन्म तिथि / स्थान
  • मरण तिथि / स्थान
  • निवासित स्थान
  • रूचि के क्षेत्र
  • पतियाँ
  • संतान
  • शिक्षक
  • छात्र
  • उल्लेखन
  • आधार

संक्षिप्त जीवन चरित्र  आपकी बुध्धी

आईशा रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि उन्होंने एक बार अल्लाह के रसूल से पूछा, “ऐ अल्लाह के रसूल ! यदि आप ऐसे स्थान पर पहुंचे जहाँ पर एक वृक्ष से कुछ खाया गया है और दूसरे वृक्षों से कुछ भी नहीं खाया गया है, तो आप किस वृक्ष से अपने ऊँट को चराते?” आप ने कहा कि, “मैं अपने ऊँट को उस वृक्ष पर चरवाता जिस पर कुछ नहीं खाया गया है|” इसके उप उल्लेखकर्ता ने इसमें यह जोड़ा कि, आईशा रजिअल्लाहुअन्हा के अतिरिक्त अल्लाह के रसूल ने किसी और कन्या से विवाह नहीं किया| (बुखारी)

वास्तविकता यह है कि, आईशा रजिअल्लाहुअन्हा बहुत बुध्धिमान, योग्य और होशियार थे और अल्लाह के रसूल से विविध विषयों में ज्ञान प्राप्त किया|

कुछ हदीसों से यह पता चलता है कि अल्लाह के रसूल और आप के बीच बहुत अच्छा बंधन था| परन्तु हमें यह बंधन को एक पति पत्नि के रूप में देखना चाहिए, न कि नबी और उनके अनुयायी की तरह| एक बार आईशा रजिअल्लाहुअन्हा ने (सर के दर्द के बारे में) कहा, “ऐ मेरा सर!” अल्लाह के रसूल ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि ऐसा मेरे जीवन में हो, ताकि मैं अल्लाह से तुम्हारे लिए क्षमा मांगू और अल्लाह से तुम्हारे लिए दुआ करूँ|” आईशा रजिअल्लाहुअन्हा ने अस्वस्थ आवाज़ में कहा, “अल्लाह की कसम, मैं समझती हूँ की आप मुझे मृत देखना चाहते है, यदि ऐसा हुआ तो आप अपना अंतिम दिन किसी और पत्नि के साथ सोते हुए बितायेंगे!” अल्लाह के रसूल ने कहा, “नहीं, मैं कहूँगा, ‘ऐ मेरे सर !” (अल्लाह के रसूल ने मुस्कुराया)| (बुखारी)

इन सब अच्छे सम्बन्ध के बावजूद, एक ऐसी घटना हुई, जो आप , आईशा रजिअल्लाहुअन्हा और उनके माता पिता को बहुत कष्ट पहुंचाई| इस घटना में आईशा रजिअल्लाहुअन्हा पर बहुत बडा आरोप लगाया गया था| इस अवस्था में वह एक माह से अधिक थे| किन्तु इसका परिणाम बहुत अच्छा था| स्वयं अल्लाह ताला ने आप की पवित्रता और निर्दोषता के बारे में खुरआन में आयत नाजिल (अवतरित) की|

आपकी विशिष्ठता

आईशा रजिअल्लाहुअन्हा की मुहब्बत और श्रध्दा, अल्लाह के रसूल के प्रति ने उन्हें दूसरी पत्नियों के ऊपर अधिकता प्रदान की| अबू मूसा रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, अल्लाह के रसूल ने कहा : “आईशा की श्रेष्ठता दूसरी महिलाओं पर ऐसी है, जैसे हारिद (एक प्रकार का खाना) की दूसरे खानों पर है|” (बुखारी & मुस्लिम)| एक बार जब उमर इब्न अल आस रजिअल्लाहुअन्हु युध्ध से वापस आये, तो उन्होंने पूछा, “आप इस संसार में सबसे अधिक किस से प्रेम करते है?” अल्लाह के रसूल ने कहा : “आईशा|” उन्होंने कहा, “ऐ अल्लाह के रसूल ! मेरा सवाल पुरुषों से सम्बंधित है|” आप ने कहा : “आईशा के पिता|”

उर्वा बिन जुबैर का विचार यह है कि, आईशा रजिअल्लाहुअन्हा से बड़े विद्वान् – कुरआन में, विरासत में, हलाल और हराम में, फिख (इस्लामी शास्त्र) में, काव्य में, चिकित्सा पध्धति (उन्होंने इसे अल आराब से सीखा, जो चिकित्सा के विषय अल्लाह के रसूल को बताते थे) में, अरबी भाषा का इतिहास, वंशावली में – इन सब में कोई नहीं है| इमाम ज़हरी ने कहा : “सारे पुरुष और अल्लाह के रसूल के पत्नियों का ज्ञान एक जगह रखा जाये तो आईशा रजिअल्लाहुअन्हा का ज्ञान उन सब से बढ़कर रहेगा|” उन्हें मुज्तहिदीन (अल्लाह के रसूल के सहाबा) में जमा किया जा सकता है| बिना कोई संदेह उनका नाम उमर, अली, अब्दुल्लाह बिन मसूद और अब्दुल्लाह इब्न अब्बास रजिअल्लाहुअन्हुम के साथ लिया जा सकता है| अबू बक्र, उमर और उस्मान रजिअल्लाहुअन्हुम के शासन काल में आप फ़तवा (निर्णय) दिया करती थी| आप ने अल्लाह के रसूल के दो हज़ार दो सौ दस हदीसों को उल्लेख किया| कई इस्लामी विद्वानों के विचार से, शरिया (इस्लामी शास्त्र) के एक चौथाई आदेशों को आईशा रजिअल्लाहुअन्हा ने उल्लेख किया|

अल्लाह के रसूल के अंतिम दिन आप के साथ       

आप की विशिष्ठता इस से भी पता चलती है कि, अल्लाह के रसूल ने अपने अंतिम दिनों में दूसरे पत्नियों से यह अनुमति मांगी कि, वह अपने अंतिम दिन आईशा रजिअल्लाहुअन्हा के साथ बिताना चाहते है और आप की मृत्यु आईशा रजिअल्लाहुअन्हा के गोद में हुई| आईशा रजिअल्लाहुअन्हा कहती है कि, अल्लाह के रसूल ने अपने जानलेवा बीमारी की अवस्था में, अपने दूसरे पत्नियों से कहा कि, “कल मैं कहाँ रहूँ? कल मैं कहाँ रहूँ?” वास्तव में आप आईशा रजिअल्लाहुअन्हा की बारी का इंतज़ार कर रहे थे, और वह दूसरे पत्नियों से उनके पास रहने की अनुमति चाह रहे थे| तब सारे पत्नियों ने उन्हें अनुमति दे दी कि, वह जहाँ चाहे रहे| आप तब से मृत्यु तक आईशा रजिअल्लाहुअन्हा के घर में ही रहे| आईशा रजिअल्लाहुअन्हा कहती है कि, आप मृत्यु उस दिन हुई जिस दिन आप की बारी आईशा रजिअल्लाहुअन्हा के घर पर थी| अल्लाह ने आप को अपने पास उस समय बुला लिया जब आप का सर आईशा रजिअल्लाहुअन्हा के छाती और गर्दन के बीच था और आप का थूक (लार – saliva) आईशा रजिअल्लाहुअन्हा के लार से मिला हुआ था (आईशा रजिअल्लाहुअन्हा ने हरा मिस्वाक चबाकर उनको दिया था)| (सहीह बुखारी)| आईशा रजिअल्लाहुअन्हा की श्रेष्ठता इस से भी बढ़ जाती है कि, आप ने उनके घर में मृत्यु पायी और उसी घर के कोने (किनारे) में उन्हें दफनाया (अंतिम संस्कार किया) गया| [2]

पूरा नाम

आईशा बिन्त अबी बक्र (अब्दुल्लाह) बिन्त उस्मान बिन्त आमिर बिन्त अम्र बिन्त काब बिन्त साद बिन्त तैम बिन्त मुर्रह |  

माता पिता

अबू बक्र अस सिद्दीख / उम्म रुमान

भाई बहन

अब्दुर रहमान बिन अबी बक्र

जन्म तिथि / स्थान

9 BH/614 CE (मक्काह)

मरण तिथि / स्थान

57 AH/678 CE (17 रमज़ान) (मदीना) (वास्तविक)

निवासित स्थान

मक्काह / मदीना

रूचि के क्षेत्र

कुरआन पढ़ना, तफसीर कुरआन, उल्लेखकर्ता, फिख, सीरत |

पति

मुहम्मद

संतान

नहीं

शिक्षक

मुहम्मद , अबू बक्र रजिअल्लाहुअन्हु, उमर रजिअल्लाहुअन्हु, तल्हा इब्न उबैदुल्लाह रजिअल्लाहुअन्हु, साद इब्न अबी वख्खास रजिअल्लाहुअन्हु, फातिमा बिन्त मुहम्मद रजिअल्लाहुअन्हा, जुधामा बिन्त जंदल अल असदिय्यह रजिअल्लाहुअन्हा |

छात्र

अस्मा बिन्त अबी बक्र, अब्दुल्लाह इब्न अल जुबैर, अबू हुरैरह, इब्न अब्बास, इब्न उमर, अबू मूसा अल अशरी, अम्र बिन अल आस, अल खासिम इब्न मुहम्मद, उर्वा इब्न अल जुबैर, अब्दुल्लाह इब्न अब्दुर रहमान इब्न अबी बक्र, हफ्सा बिन्त अब्दुर रहमान इब्न अबी बक्र, अस्मा बिन्त अब्दुर रहमान, सईद इब्न अल मुसय्यिब आदि |

उल्लेखन

सहीह बुखारी : 741 & सहीह मुस्लिम : 503 [3]

आधार

Books of al-Isabah[8/17,18,19,20,21] , Thiqat[Vol:3] , Tabaqat[Vol:8] , Siyar A'lam[2/135-201] , Tahdheeb al-Tahdheeb[Vol:12] , Tahdheeb al-Tahdheeb[Vol:12] , Taqrib al-Tahdheeb[750] 

[1] [3] http://www.muslimscholars.info/

[2] http://www.pbuh.us/prophetMuhammad.php?f=Re_Wives

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