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अहले बैत

अल्लाह के रसूल  के परिवार को अहले बैत कहते है|

विषय सूची

कुरआन

“तुम्हारेघरोंमेंअल्लाहकीजोआयतेंऔरतत्वदर्शिताकीबातेंसुनाईजातीहैंउनकीचर्चाकरतीरहो।निश्चयहीअल्लाहअत्यन्तसूक्ष्मदर्शी, ख़बररखनेवालाहै।“ (कुरआन सूरह अहज़ाब 33:34)

अहले बैत कौन है?

अहले बैत के भावार्थ के विषय में उलमा (विद्वाम्स) के मध्य भिन्न अभिप्राय है|

कुछ उलमा का कहना है कि, अहले बैत में – मुहम्मद की पत्निया, संतान, बनू हाशिम, बनू अब्दुल मुत्तलिब तथा उनके द्वारा स्वतन्त्र (मुक्य) किये गए दास आदि| कुछ उलमा का कहना है कि, पत्निया अहले बैत में से नहीं है| कुछ कहते है कि अहले बैत खुरैश के लोग है| कुछ कहते है कि, इस उम्मत (मुस्लिम जाती) के पवित्र तथा धार्मिक लोग अहले बैत है| कुछ कहते है कि सारी उम्मत (मुस्लिम जाती) अहले बैत है|

मुहम्मद की पत्नियों के विषय में यह सत्य है कि, वह अहले बैत में से है| क्यों कि अल्लाह ने कहा: “अपनेघरोंमेंटिककररहोऔरविगतअज्ञानकालकी-सीसज-धजनदिखातीफिरना।नमाज़काआयोजनकरोऔरज़कातदो।औरअल्लाहऔरउसकेरसूलकीआज्ञाकापालनकरो।अल्लाहतोबसयहीचाहताहैकिऐनबीकेघरवालो, तुमसेगन्दगीकोदूररखेऔरतुम्हेंपूरीतरहपाक-साफ़रखे।“ (कुरआन सूरह अहज़ाब 33:33)

“वेबोले, "क्याअल्लाहकेआदेशपरतुमआश्चर्यकरतीहो? घरवालो! तुमलोगोंपरतोअल्लाहकीदयालुताऔरउसकीबरकतेंहैं।वहनिश्चयहीप्रशंसनीय, गौरववालाहै|” (कुरआन सूरह हूद 11:73)

“सिवायलूतकेघरवालोंके।उनसबकोतोहमबचालेंगे,सिवायउसकीपत्नीके- हमनेनिश्चितकरदियाहै, वहतोपीछेरहजानेवालोंमेंरहेगी।” (कुरआनसूरहहिज्र15:59-60)

इससे पता चलता है की पत्नी परिवार का हिस्सा (भाग) होती है|

इमाम अहमद के उल्लेखन के प्रकार से मुत्तलिब का परिवार अहले बैत में आता है| यही विचार इमाम शाफ़ई का भी है| इमाम अबू हनीफा तथा इमाम मालिक का विचार यह है कि, मुत्तलिब का परिवार अहले बैत में से नहीं है| इमाम अहमद का भी यही विचार है| इसकी वास्तविक्ता (सत्य) यह है कि, बनू मुत्तलिब अहले बैत में से है| इसका प्रमाण यह है कि, जुबैर इब्न मुतिम रज़िअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया: “मै और उस्मान इब्न अफ्फान अल्लाह के रसूल के पास गए और बोले: ‘ऐ अल्लाह के रसूल ! आप ने बनू मुत्तलिब को दिया और हमें नहीं दिया, किन्तु हम और वह लोग समान है|’ अल्लाह के रसूल ने कहा: ‘बनू मुत्तलिब तथा बनू हाशिम समान है|’”(सहीह बुखारी:2907, नसाई:4067)

अहले बैत में – बनू हाशिम इब्न अब्द मनाफ, जो अली का परिवार है, अब्बास का परिवार, जाफर का परिवार, अखील का परिवार, हारिस इब्न अब्दुल मुत्तलिब का परिवार – शामिल है| ज़ैद बिन अरखम रज़िअल्लाहुअन्हु से इमाम अहमद ने उल्लेख किया कि: मक्का तथा मदीना के मध्य खुम नाम का एक कुवा है, जहाँ अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने हमें संबोधित किया - आप ने अल्लाह की प्रशंसा की, प्रार्थना की और कहा: ‘ऐ लोगो ! मै एक मनुष्य हूँ; मेरे प्रभु का संदेशवाहक (मौत का फ़रिश्ता) आएगा और मै उन्हें जवाब दूंगा| मै तुम लोगो के लिए दो प्रमुख चीज़े छोड़ कर जा रहा हूँ; पहली चीज़ अल्लाह की किताब है, उसमे मार्गदर्शन तथा प्रकाश है, अतः उसके अनुसार जीवन व्यतीत करना’ – आप ने हमें अल्लाह की किताब के अनुस्सर चलने को कहा, फिर आप ने कहा: ‘तथा मेरे परिवार वाले (अहले बैत), मेरे परिवार के लोगो के विषय में मै तुम्हे अल्लाह से डराता हूँ, मेरे परिवार के लोगो के विषय में मै तुम्हे अल्लाह से डराता हूँ, मेरे परिवार के लोगो के विषय में मै तुम्हे अल्लाह से डराता हूँ|’” हुसैन ने उनसे (ज़ैद) से पूछा, “ऐ ज़ैद, आप के परिवार वाले कौन है? क्या आप की पत्निया आप के परिवार का भाग नहीं?” ज़ैद ने कहा: “आप की पत्निया आप के परिवार का भाग है, किन्तु आप के मृत्यु के पश्चात, आप के परिवार के लोगो पर सद्खा (दान) अवैध (हराम) है|” उस (हुसैन) ने कहा: “वह कौन है?” उन्होंने कहा: “अली का परिवार, अखील का परिवार, जाफर का परिवार, अब्बास का परिवार?” हुसैन ने कहा: “क्या इन सब लोगो के लिए सद्खा (दान) हराम है?” ज़ैद ने कहा: “हाँ|” (अहमद:18464)

स्वतन्त्र (मुक्त) किये गए गुलाम (दास) के विषय में, अल्लाह के रसूल के मुक्त गुलाम मिहरान ने कहा: अल्लाह के रसूल ने कहा: “हम मुहम्मद का परिवार है: सद्खा (दान) हमारे लिए निषेधित है, तथा मुक्त गुलाम उनमे से है|” (मुसनद अहमद:15152)

अतः अल्लाह के रसूल का परिवार – आपके पत्निया, आप की संतान, बनू हाशिम, बनू अब्दुल मुत्तलिब तथा उनके मुक्त किये गए गुलाम| [1]         

विशिष्ठता

अल्लाह ने अहले बैत पर अनगिनत विशेषताये तथा विशिष्ठताये प्रदान की है| उनसे प्रेम करना तथा उनकी मर्त्यादा (इज्ज़त) करना हर मुसलमान पर अनिवार्य है|

शेखुल इस्लाम इब्न तैमियह रहिमहुल्लाह ने कहा: अल्लाह के रसूल के परिवार के कुछ अधिकार है, जो हमें ध्यान में रखना चाहिए| अल्लाह के रसूल के साथ आप के परिवार के सदस्यो पर भी दरूद भेजना चाहिए| आप ने हम से कहा: “कहिये: ‘अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मद व आल आलि मुहम्मद कमा सल्लैत इब्राहीम व आल आलि इब्राहीम इन्नक हमीदुम मजीद, अल्लाहुम्म बारिक अला मुहम्मद व आल आलि मुहम्मद कमा बारकता अला इब्राहीम व आल आलि इब्राहीम इन्नक हमीदुम मजीद| (ऐ अल्लाह! मुहम्मद पर और आप के परिवार पर रहम (दया) कर, जिस तरह तूने इब्राहीम और आप के परिवार पर रहम (दया) की, तू ही प्रशंसनीय है, तेरी ही महिमा है; तथा मुहम्मद पर आप के परिवार पर बरकत भेज, जिस तरह तूने इब्राहीम और आप के परिवार पर बरकत भेजा; तू ही प्रशंसनीय है, तेरी ही महिमा है|)’” (मज्मू अल फतावा:3/407)

और उन्होंने कहा: इसी तरह अल्लाह के रसूल के परिवार (अहले बैत) के साथ प्रेम करना, उनके अधिकार की मर्यादा (इज्ज़त) करना तथा उनसे निष्ठावान रहना अनिवार्य है| (मज्मू अल फतावा:28/491)

अल्लाह के रसूल के परिवार की विशिष्ठताये:

 

  1. अल्लाह ने कुरआन में कहा: “ऐनबीकीस्त्रियो! तुमसामान्यस्त्रियोंमेंसेकिसीकीतरहनहींहो, यदितुमअल्लाहकाडररखो।अतःतुम्हारीबातोंमेंलोचनहोकिवहव्यक्तिजिसकेदिलमेंरोगहै, वहलालचमेंपड़जाए।तुमसामान्यरूपसेबातकरो।अपनेघरोंमेंटिककररहोऔरविगतअज्ञानकालकी-सीसज-धजनदिखातीफिरना।नमाज़काआयोजनकरोऔरज़कातदो।औरअल्लाहऔरउसकेरसूलकीआज्ञाकापालनकरो।अल्लाहतोबसयहीचाहताहैकिऐनबीकेघरवालो, तुमसेगन्दगीकोदूररखेऔरतुम्हेंपूरीतरहपाक-साफ़रखे।“ (कुरआन सूरह अहज़ाब:33:32-33)

 

यह केवल अल्लाह के रसूल के पत्नियों को ही नहीं, किन्तु सहीह सुन्नाह के प्रकार से, हर एक इसमें शामिल है| आइशा रज़िअल्लाहुअन्हा ने उल्लेख किया: अल्लाह के रसूल एक दिन, काले ऊँट के बालो का धारीदार लबादा (लम्बा कुरता) धारण किये जा रहे थे| हसन इब्न अली आये तो आप ने उन्हें कुरते (वस्त्र) में लपेट लिया, फिर हुसैन आये तो उन्हें भी वस्त्र में लपेट लिया, फिर फातिमा आई यो उन्हें भी उसमे लपेट लिया, फिर अली आये तो उन्हें भी उसमे लपेट लिया, फिर आप ने कहा: “अल्लाहतोबसयहीचाहताहैकिऐनबीकेघरवालो, तुमसेगन्दगीकोदूररखेऔरतुम्हेंपूरीतरहपाक-साफ़रखे।“ (कुरआन सूरह अहज़ाब-33:33 & सहीह मुस्लिम:2424)

 

  1. नबीकाहक़ईमानवालोंपरस्वयंउनकेअपनेप्राणोंसेबढ़करहै।औरउसकीपत्नियाँउनकीमाएँहैं।“ (कुरआन सूरह अहज़ाब – 33:6)

 

  1. एक उल्लेखन के अनुसारवासिलह इब्न अख्सा ने कहा: मैंने रसूलुल्लाह को इस तरह कहते हुए सुना: “अति महान अल्लाह ने इस्माईल अलैहिस्सलाम के संतान में किनानह को चुना,और उसने किनानह में से खुरैश को चुना, और खुरैश में से बनू हाशिम को चुना, और बनू हाशिम में से मुझे चुना|” (सहीह मुस्लिम:2276)

 

  1. उल्लेख किया गया कि, ज़ैद बिन अर्खम ने कहा: मक्का तथा मदीना के मध्य एक प्रांत जहाँ पानी था, उस स्थान पर अल्लाह के रसूल हमें संबोधित करने लगे| पहले आप ने अल्लाह की प्रशंसा की और कहने लगे: ऐ लोगो, मै केवल मनुष्य हूँ, जल्द ही अल्लाह का फ़रिश्ता मेरे पास आएगा और मै प्रतिक्रिया (उत्तर) दूंगा| मै तुम लोगो के पास दो अति महत्व चीज़ छोड़ कर जा रहा हूँ, पहली अल्लाह की किताब (कुरआन) है, इसमें मार्गदर्शन अथवा प्राकश है| अल्लाह की किताब का अनुसरण किया करो तथा उसे मज़बूत थामे रहो|” फिर आप ने कहा: “(दूसरा) मेरे परिवार के लोग, मेरे परिवार के लोगो के विषय में मै तुम्हे अल्लाह से डराता हूँ, मेरे परिवार के लोगो के विषय में मै तुम्हे अल्लाह से डराता हूँ, मेरे परिवार के लोगो के विषय में मै तुम्हे अल्लाह से डराता हूँ|” (सहीह मुस्लिम:2408)

 

 

अल्लाह के रसूल के अनुयायी (सहाबा) इस विषय में बहुत गंभीर थे; उनमे सब से आगे अबू बक्र तथा उमर बिन खत्ताब रज़िअल्लाहुअन्हुम थे|

एक उल्लेख के अनुसार अबू बक्र रज़िअल्लाहुअन्हु ने अली रज़िअल्लाहुअन्हु से कहा: “खसम है उस ज़ात (अल्लाह) की जिसके हाथ में मेरे प्राण है, अल्लाह के रसूल से सम्बन्ध (रिश्ता), मुझे अपने लोगो के सम्बन्ध से अधिक प्रीय है|” (बुखारी:3508 & मुस्लिम:1759)

अबू बक्र रज़िअल्लाहुअन्हु ने ऐसा भी कहा: “मुहम्मद के परिवार वालो के अधिकार पर ध्यान दो|” (सहीह बुखारी:3509)

हाफ़िज़ अल हजर रहिमहुल्लाह ने कहा: ‘मुहम्मद के परिवार वालो के अधिकार पर ध्यान दो’ – यह शब्द सारे लोगो को संबोधित किये गए है – उन्हें कहा गया है कि, अहले बैत के अधिकार परिपूर्ण किये जाये| (फत्हुल बारी:7/79)

उमर बिन खत्ताब रज़िअल्लाहुअन्हु अल्लाह के रसूल के परिवार के साथ उच्च व्यवहार किया करते थे| जब भी बैतुल माल (मुस्लिम लोगो के लिए एकत्रित की गयी धन राशी) का धन बाँटते तो, अपने से और दूसरे लोगो से पहले आप के परिवार का ध्यान रखते थे|   

शेखुल इस्लाम इब्ने तैमियह रहिमहुल्लाह कहते है: उमर बिन खत्ताब रज़िअल्लाहुअन्हु ने एक रजिस्टर रखा और उसमे उन लोगो के नाम लिखे जिन्हें मासिक वेतन (stipend) दिया जाता था| उन्होंने लोगो के नाम उनके वंश के आधार पर लिखा| उन्होंने अल्लाह के रसूल के वंश के लोगो से आरम्भ किया| जब अरब लोगो के नाम समाप्त हो गए तो उन्होंने अरबेतर (Non Arab)लोगो के नाम लिखे| खलीफा तथा उमय्या, अब्बासिया राज वंश के लोग भी इसी रजिस्टर को मानते थे| उसके उपरांत सब कुछ बदल गया| (इखतिदा अल सिरात अल मुस्तखीम, p. 159, 160)

यह मध्यस्था केवल रसूलुल्लाह के परिवार को ही नहीं, हर धार्मिक, सदाचार मुस्लिम (विश्वासी) के लिए, शहीद (अल्लाह के मार्ग में वीरगति प्राप्त करने वाले) के लिए तथा उलमा (धार्मिक पंडित) के लिए है, चाहे वह अहले बैत में से हो या साधारण लोगो में से हो| [2]      

 

अहले बैत को ज़कात

अहले बैत को ज़कात देना निशिध्ध है| इमाम मुस्लिम ने अब्दुल मुत्तलिब इब्न रबीअह इब्न अल हारिस रज़िअल्लाहुअन्हु से उल्लेख किया- उन्होंने कहा: “अल्लाह के रसूल ने कहा: ‘मुहम्मद के परिवार के लोगो को ज़कात न दी जाए, क्यों कि यह लोगो के गन्दगी (मैल) में से है|”’ (सहीह मुस्लिम:1784)

अन नववी ने कहा, “मुहम्मद के परिवार को ज़कात न दी जाए” – इस ओर संकेत करता है कि, यह निषेधित है| इसके कई कारण हो सकते है, जैसा कि – वह लोग ज़कात वसूल करते है तथा लोगो में बाँटते है, या आठ कारण में से कुछ भी हो सकता है| सहाबा (रसूलुल्लाह के अनुयायी) के प्रकार से यही उचित कारण हो सकते है|

“यह लोगो के मैल में से है” – इसकी निशिध्धता की ओर संकेत करता है, यह उनके (अहले बैत के) गौरव को बढाता है तथा यह सन्देश देता है कि, वह लोग (अहले बैत) मैल (गन्दगी) से दूर रहे| “लोगो का मैल” से यह पता चलता है कि, इससे (ज़कात से) लोगो का धन तथा उनकी आत्मा पवित्र किये जाते है| अल्लाह ने कुरआन में ऐसे कहा:    

“तुमउनकेमालमेंसेदानलेकरउन्हेंशुद्धकरोऔरउसकेद्वाराउन(कीआत्मा) कोविकसितकरोऔरउनकेलिएदुआकरो।निस्संदेहतुम्हारीदुआउनकेलिएसर्वथापरितोषहै।अल्लाहसबकुछसुनता, जानताहै।“ (कुरआन सूरह तौबह 9:103)

यह गन्दगी को साफ़ करने जैसा है|

अहले बैत के लिए ज़कात निशिध्ध करने का कारण यह भी हो सकता है कि, उनके लिए यदि धन की आवश्यकता हो तो उन्हें धन देने के अनेक मार्ग है – जैसे, ख़ुम्स या युध्ध प्राप्ती (माले ग़नीमत) में से पांचवा भाग या लोगो के उपहार आदि|

यदि यह सब मार्ग समाप्त हो जाए और उन्हें (अहले बैत को) धन की आवश्यकता हो तथा उस समय ज़कात के अतिरिक्त कुछ और न हो तो, उन्हें ज़कात दिया जा सकता है (वैध हो जाता है)| किन्तु उन्हें देना अनिवार्य हो जाता है| दूसरे लोगो से वह लोग अधिक हख्दार हो जाते है, क्यों की अल्लाह के रसूल ने उनके (अहले बैत के) अधिकार को प्राथमिकता देने को कहा है| सलफ का यही विचार था तथा शेखुल इस्लाम इब्न तैमियह रहिमहुल्लाह, शेख मुहम्मद सालीह इब्न उसैमिन रहिमहुल्लाह भी इस विचार से सहमत है|

शेख उल इस्लाम इब्ने तैमियह रहिमहुल्लाह ने कहा: यदि बनू हाशिम को ख़ुम्स में से पांचवा भाग ना मिला तो, उनके लिए ज़कात वैद (अनुमतित) हो जाता है| यही विचार खादी याखूब तथा दूसरे सहाबा का है| शाफई उलमा में अबू यूसुफ़ तथा अल इस्तखरी का भी यही विचार है| क्यों कि यह आवश्यकता अथवा ज़रुरत है| (अल फतावा अल कुबरा, 5/374)

शेख इब्न उसैमिन रहिमहुल्लाह ने कहा: यदि ख़ुम्स न हो, जैसा कि आज के समय में है, और वह निर्धन (गरीब) भी हो, तो उन (अहले बैत) की आवश्यकताओ को पूरा करने के लिए उन्हें ज़कात दिया जा सकता है| शेख उल इस्लाम इब्न तैमियह भी यही विचार रखते है और यही सही विचार है| (अल शरह अल मुम्ती, 6/257) [3]       

 

क्याअहले बैत अचूक (अपरिहार्य) है?

 

कुछ लोग कुरआन की इस आयत के भावार्थ से यह कहते है कि, अल्लाह के रसूलके परिवार के लोग अचूक है: “अल्लाह तो बस यही चाहता है कि ऐ नबी के घरवालो, तुमसे गन्दगी को दूर रखे और तुम्हें पूरी तरह पाक-साफ़ रखे।” (कुरआन सूरह अहज़ाब 33:33)

शेखुल इस्लाम इब्ने तैमियह रहिमहुल्लाह ने कह कि, यह आयत, सूरह हज्ज की आयत 78 से मेंल खाती है: “...और धर्म के मामले में तुमपर कोई तंगी और कठिनाई नहीं रखी....।” (कुरआन सूरह हज्ज 22:78)

“.....अल्लाहतुम्हारेसाथआसानीचाहताहै, वहतुम्हारेसाथसख़्तीऔरकठिनाईनहींचाहता,....” (कुरआन सूरह बखरह 2:185)

“अल्लाहचाहताहैकितुमपरस्पष्टकरदेऔरतुम्हेंउनलोगोंकेतरीक़ोंपरचलाए, जोतुमसेपहलेहुएहैंऔरतुमपरदयादृष्टिकरे।अल्लाहतोसबकुछजाननेवाला, तत्वदर्शीहै।औरअल्लाहचाहताहैकितुमपरदयादृष्टिकरे, किन्तुजोलोगअपनीतुच्छइच्छाओंकापालनकरतेहैं, वेचाहतेहैंकितुमराहसेहटकरबहुतदूरजापड़ो।” (कुरआन सूरह निसा 4:26-27)

यह सब आयत स्पष्ट करती है कि, अल्लाह उसके निर्देश के अनुसार जीवन व्यतीत करने वालो को चाहता है| सूरह अहज़ाब (33:33) जब अवतरित हुई तब अल्लाह के रसूल ने अपने घर वालो को इकट्टा किया और दुआ किया कि: “ऐ अल्लाह! यह मेरे घर वाले है| इन्हें गन्दगी (पाप) से दूर रख और पूरी तरह पाक साह कर दे|”

इब्न तैमियह रहिमहुल्लाह ने कहा कि, कुरआन में इनकी (अहले बैत) की पवित्रता पर ध्यान दिया गया, किन्तु वह अचूक (अपरिहार्य) नहीं है| यह दुआ भी इस ओर संकेत करती है कि, वह पवित्र है परन्तु अचूक (अपरिहार्य) नहीं है| [4]   

 

आधार

[1]https://islamqa.info/en/10055

 

[2] https://islamqa.info/en/121948

 

[3] https://islamqa.info/en/21981

 

[4]http://www.islamweb.net/emainpage/index.php?page=showfatwa&Option=FatwaId&Id=12125

 

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