रमज़ान के महीने का स्वागत कैसे करे ?


रमजानुल मुबारक का मुकद्दस माह इस्लामी कैलेंडर का नवाँ महीना है। हर साल इस माह में रोजे रखना मुसलमानों पर नाजिल फर्जों में से एक अहम फर्ज है। आज से पूरे माह हर बालिग और सेहतमंद मुसलमान पर रमजानुल मुबारक के रोजे रखना फर्ज करार दिया गया है। हदीस के मुताबिक इस मुबारक माह में जन्नात के दरवाजे खुल जाते हैं और शैतान कैद हो जाता है।

 

विषय सूची

 

ख़ुरान

रमज़ान का महीना वह है जिसमें क़ुरआन उतारा गया लोगों के मार्गदर्शन के लिए, और मार्गदर्शन और सत्य-असत्य के अन्तर के प्रमाणों के साथ। अतः तुममें जो कोई इस महीने में मौजूद हो उसे चाहिए कि उसके रोज़े रखे और जो बीमार हो या सफ़र में हो तो दूसरे दिनों में गिनती पूरी कर ले। अल्लाह तुम्हारे साथ आसानी चाहता है, वह तुम्हारे साथ सख़्ती और कठिनाई नहीं चाहता, (वह तुम्हें हिदायत दे रहा है) और चाहता है कि तुम संख्या पूरी कर लो और जो सीधा मार्ग तुम्हें दिखाया गया है, उस पर अल्लाह की बड़ाई प्रकट करो और ताकि तुम कृतज्ञ बनो। (सुरह बक़रह: 185)

 

हदीस

मुहम्मद सललेल्लाहु अलैही वसल्लम ने कहा "इस्लाम धर्म की बुनियाद ५ चीज़ों पर है, इस बात की गवाही देना कि अल्लाह सुब्हानहु तआला के सिवा कोई इबादत(पूज्ये) के योग्य नहीं एवं मुहम्मद सललेल्लाहु अलैही वसल्लम उसके बन्दे(भक्त) और रसूल हैं, नमाज़ का आयोजन करना, ज़कात देना, हज करना तथा रमज़ान के रोज़े रखना"। (सही बुख़ारी :८, सही मुस्लिम :१६)

 

रमज़ान का महीना सबसे श्रेष्ठ महीना है

‘‘रमज़ान का महीना वर्ष के सारे महीनों में सबसे श्रेष्ठ महीना है, क्योंकि अल्लाह तआला ने विशेष रूप से इस महीने के रोज़ों को अनिवार्य किया है और उसे इस्लाम के स्थंभों में से चौथा स्तंभ क़रार दिया है। तथा मुसलमानों के लिए उसकी रातों में क़ियाम करने को धर्मसंगत किया है, जैसा कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का कथन है : '' इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर आधारित है: इस बात की गवाही देना कि अल्लाह तआला के अलावा कोई सत्य पूज्य नहीं और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ क़ायम करना, ज़कात अदा करना, रमज़ान के रोज़े रखना और अल्लाह के घर अर्थात काबा का हज्ज़ करना।’’ इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।

 

नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का कथन

आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का कथन है कि : ‘‘जिस व्यक्ति ने रमज़ान का रोज़ा आस्था और सवाब प्राप्त करने की नीयत से रखा तो उसके पिछले गुनाह क्षमा कर दिए जायेंगे।’’ इसे बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है।

 

और मैं रमज़ान का स्वागत करने के विषय में कोई विशिष्ट चीज़ नहीं जानता, सिवाय इस के कि मुसलमान इस महीने का स्वागत हर्ष व उल्लास के साथ और इस पवित्र महीने के प्राप्त होने तथा उसकी तौफीक़ दिए जाने पर अल्लह तआाला के धन्यवाद के साथ करे, कि अल्लाह ने उसे उन जीवित लोगों में से बनाया जो नेक कार्य करने में एक दूसरे से आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। क्योंकि रमज़ान के पवित्र महीने का प्राप्त होना अल्लाह की ओर से एक महान अनुग्रह और वरदान है। इसीलिए अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम रमज़ान के आगमन पर उसकी प्रतिष्ठाओं का और अल्लाह तआला ने उस में रोज़ा रखने वालों और क़ियाम करने वालों के लिए जो महान सवाब तैयार कर रखा है, उनका उल्लेख करते हुए अपने सहाबा को उसकी शुभसूचना देते थे।

 

तथा मुसलमान के लिए धर्मसंगत यह है कि वह इस पवित्र महीने का स्वागत विशुद्ध तौबा, तथा अच्छी नीयत और सत्य संकल्प के साथ उसके रोज़ों और क़ियाम के लिए तैयारी के साथ करे।’’

 

और देखिये

रमजान के रूजेनमाज़ज़कातहजतौहीद, तरावीह इत्यादि ।

 

संदर्भ

‘‘मजमूओ फतावा व मक़ालात मुतनौविआ’’लेखक: आदरणीय शैख अब्दुल अज़ीज़ बिन बाज़ रहिमहुल्लाह

https://islamqa.info/hi/106490

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