मुहाजिर


अल्लाह के रसूल मुहम्मद  और सहाबा (रजिअल्लाहुअन्हुम), अर्थात अल्लाह के रसूल मुहम्मद  के अनुयायी मक्का शहर छोड़कर मदीना प्रवास किये| इसे हिजरत (प्रवास) कहते है| जो प्रवास किये उन्हें मुहाजिर कहते है|

 

मुसलिम जब मक्का से अपने घर बार, परिवार छोड़कर अल्लाह की राह में मदीना प्रवास किये तब अल्लाह के रसूल मुहम्मद  ने दो भिन्न शहरों के, भिन्न जातियों के, भिन्न परम्पराओं के मुसलमानों के बीच एकता स्थापित करने के लिए एक प्रणाली बनायी| मदीना के मुस्लमान अंसार (सहायक) बन गए और अपने मुहाजिर भाईओं  और बहनों की मदद में लग गए|  [1]

 

विषय सूची

 

पारिभाषिक अर्थ

मुहाजिर अरबी शब्द है, जिसका अर्थ अप्रवासी (प्रवास करने वाला) होता है| [2]

 

इस्लामी अर्थ

जो मुसलिम मक्का में अपने घर बार, कारोबार छोड़कर अल्लाह की राह में प्रवास (हिजरत) किये, उन्हें मुहाजिर कहा जाता है| इसका बहुवचन मुहाजिरीन होता है| [3]

 

खुरआन

 “तथा प्रथम अग्रसर मुहाजिरीन और अन्सारी, और जिन लोगों ने सुकर्म के साथ उन का अनुसरण किया अल्लाह उन से प्रसन्न हो गया| और वे उस से प्रसन्न हो गए| तथा उस ने उन के लिए ऐसे स्वर्ग तैयार किये है जिन में नहरे प्रवाहित है| वह उस में सदावासी होंगे, वही बड़ी सफलता है|” [खुरआन सूरा तौबा 9:100]

 

 “तो यदि वह तुम्हारे ही समान ईमान ले आये, तो वह मार्गदर्शन पा लेंगे....|” [खुरआन सूरा बखरा 2:137]

 

 “अल्लाह प्रसन्न हो गया ईमान वालो से जब वह आप (नबी) से बैअत कर रहे थे वृक्ष के नीचे| उस ने जान लिया जो कुछ उन के दिलों में था इसलिए उतार दी शांति उन पर, तथा उन्हें बदले में दी समीप की विजय|” [खुरआन सूरा फतह 48:18]

 

 “ईमान वालों में कुछ वह भी है जिन्होंने सच्च कर दिखाया अल्लाह से किये हुए अपने वचन को| तो उन में कुछ ने अपना वचन पूरा कर दिया, और उन में से कुछ प्रतीक्षा कर रहे है| और उन्होंने तनिक भी परिवर्तन नहीं किया|” [खुरआन सूरा अहज़ाब 33:23] [4]

 

हदीस

अबू सईद रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया : अल्लाह के रसूल मुहम्मद  ने ऐसा कहा : “मेरे अनुयायी (सहाबा) में से किसी को गाली मत दो| क्यों कि तुम में से अगर कोई उहद पर्वत के बराबर का सोना भी अल्लाह की राह में दान करे तो, उन (सहाबा) के द्वारा खर्च किये गए मुद या आदा मुद के बराबर भी नहीं हो सकती|” [सही बुखारी 3673] [5]

 

अब्दुल्लाह रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया : अल्लाह के रसूल मुहम्मद  ने ऐसा कहा :“मेरी उम्मत में सबसे अच्छे वह लोग है जो मेरे साथ है, उनके बाद वह लोग है जो उनके बाद आने वाले है (बाद की उम्मत), उनके बाद वह लोग जो उनके बाद आने वाले है (उनके बाद की उम्मत), उनके बाद वह लोग आने वाले है जिनकी गवाही उनके शपथ को अधिमान करती है और उनके शपथ उनकी गवाही को अधिमान करते है|” [सही बुखारी 6429 & सही मुसलिम 6159] [6]

 

मुहाजिर और अंसार एक दूसरे के साथी है

सहाबा में दो ग्रोह है| एक मुहाजिरीन, जो अपने घर बार छोड़कर अल्लाह के रसूल मुहम्मद target="_blank" के साथ प्रवास किये, ताकि अल्लाह का दीन स्थापित हो| यह वे लोग अल्लाह जो अल्लाह की राह में अपने धन तथा प्राण अर्पित किये| दूसरा ग्रोह अंसार का है| यह लोग इस्लाम स्वीकार करने वाले मदीना के वासी है| इन लोगो ने अपने मुहाजिर भाईयों को अपने घर में पनाह दी और अपनी सम्पत्ती से उनकी सहायता की| यह लोग मुहाजिरीन के साथ मिलकर कई युध्ध किये और इस तरह अल्लाह और अल्लाह के रसूल मुहम्मद target="_blank" की राह में अपना समर्थन दिया| मुहाजिर और अंसार दोनों एक दूसरे के समर्थक थे| अल्लाह ने अपनी किताब खुरआन में कई जगह मुहाजिर और अंसार की प्रशंसा की| उदहारण के लिए – “अल्लाह ने नबी तथा मुहाजिरीन और अंसार पर दया की, जिन्हों ने तंगी के समय आप का साथ दिया, इस के पश्चात कि उन में से कुछ लोगों के दिल कुटिल होने लगे थे| फिर उन पर दया की| निश्चय वह उन के लिए अति करुणामय दयावान है|” [खुरआन सूरा तौबा 9:117] [7]

 

विद्वाम्सों का दृष्टिकोण

सुफ्यान इब्न उयैनह रजिअल्लाहुअन्हु ने कहा : “जो भी अल्लाह के रसूल मुहम्मद के अनुयायी (सहाबा) के खिलाफ एक शब्द भी कहता है, वह अन्वेषक (दीन में नयी चीज़ निकालने वाला) है|”

 

इमाम अहमद रहिमहुल्लाह ने कहा : “जो व्यक्ति अल्लाह के रसूल मुहम्मद के अनुयायी (सहाबा) के बारे में ग़लत बात करता है, उसके ईमान (इस्लाम) पर संदेह करना चाहिए|”

 

अज ज़हबी रहिमहुल्लाह ने कहा कि, सहाबा को बुरा भला कहना ‘कबाइर’ (बड़े गुनाह – घोर पाप) में आता है| वह ऐसा कहते है : “जो अल्लाह के रसूल मुहम्मद से प्रेम करता है, वह हर सहाबी की मर्यादा करता है और उनसे प्रेम भी करता है| एक भी सहाबी से द्वेष करना, अल्लाह के रसूल मुहम्मद से द्वेष करने के बराबर है|”  

 

फुदैल इब्न इय्याद रहिमहुल्लाह ने कहा : “मैं उनसे प्रेम करता हूँ. जिन्हें अल्लाह प्रेम करता है| जिन से अल्लाह के रसूल मुहम्मद के अनुयायी (सहाबा) सुरक्षित है, वे वह लोग है| मैं उन से द्वेष करता हूँ, जिन्हें अल्लाह द्वेष करता है| वे वह लोग है जो मार्गभ्रष्ट हो गए और अन्वेषक (दीन में नयी चीज़ निकालने वाले) है|”

 

आधार, हवाला

[1] http://www.islamic-life.com/forums/general-discussions/hijrath-makkah-3298 (english)

[2] http://etymology_arb_en.enacademic.com/3692/muhajir (english)

[3] http://www.islambasics.com/view.php?bkID=999999&chapter=13 (english)

[4] http://www.islamicweb.com/beliefs/creed/sahabah_view.htm (english)

[5] http://www.sunnah.com/bukhari/62#23 (english)

[6] http://www.sunnah.com/search/The-best-of-the-people-are-my-generation (english)

[7] http://www.qtafsir.com/index.php?option=com_content&task=view&id=1377&Itemid=63  (english)

 

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