भूकंप


भूकंप अल्लाह द्वारा भेजी गयी निशानी (संकेत) है| इस के द्वारा अल्लाह अपने दासों, बन्दों को परखना चाहता है| इस से वह अपने दासों के अन्दर अपना डर पैदा करना चाहता है और कुछ लोगों को सज़ा भी देना चाहता है| जब ऐसी आपत्ति आती है तब इंसान को अपनी कमज़ोरी, निस्सहायता का पता चलता है और वह बहुत विनम्रता के साथ अल्लाह के सामने गिडगिडाते हुए दुआ करता ह|

 

विषय सूची

 

अर्थ

भूकंप के माने, धरती अचानक हिलना| इस से कई बार बहुत बड़ी तबाही होती है| जान व माल का नुकसान बहुत होता है|

 

भूकंप अल्लाह की निशानी है

अल्लाह बहुत हिकमत वाला है, सब जानने वाला है और वह जो चाहता है करता है; और वह जो चाहे नियम बनता है और उसका हुकुम देता है| वह जो चाहे निशानी भेजता है और उस से अपने बन्दों को डराता है और उन्हें अपने (अल्लाह के) प्रति अनिवार्य कार्यों को याद दिलाता है और उसके (अल्लाह) साथ किसी को साझी बनाने से चेतावनी देता है और उसके (अल्लाह के)  नियम के विरुध्ध जाने से और उसके द्वारा निशिध्ध किये गए कार्य से बचने की सीख देता है| खुरआन में ऐसा कहा गया है : “और हम चमत्कार डराने के लिए ही भेजते है|” [खुरआन सूरा इसरा 17:59]

 

“हम शीघ्र ही दिखा देंगे उनको अपनी निशानियाँ संसार के किनारों में तथा स्वयं उनके भीतर| यहाँ तक कि खुल जाएगी उन के लिए यह बात कि यही सच है| और क्या यह बात पर्याप्त नहीं कि आप का पालनहार ही प्रत्येक वस्तु का साक्षी (गवाह) है?” [खुरआन सूरा फुस्सिलत 41:53]

 

“आप उनसे कह दे कि वह इस का सामर्थ्य रखता है कि वह कोई यातना तुम्हारे ऊपर (आकाश) से भेज दे| अथवा तुम्हारे पैरों के नीचे (धरती) से, या तुम्हे सम्प्रदायों में करके एक को दूसरे के आक्रमण का स्वाद चखा दे.....|” [खुरआन सूरा अनाम 6:65]

 

जाबिर इब्न अब्दुल्लाह रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, जब यह आयत नाज़िल (अवतरित) हुई – “वह इस का सामर्थ्य रखता है कि वह कोई यातना तुम्हारे ऊपर (आकाश) से भेज दे” तब अल्लाह के रसूल  ने कहा, “अवूज़ु बि वजहिका  (हे अल्लाह मै तुम्हारे चेहरे से शरण चाहता हूँ)”; और फिर ये आयत पढ़ी “या तुम्हारे पैरों के नीचे (धरती) से” तब अल्लाह के रसूल  ने कहा, “अवूज़ु बि वजहिका  (हे अल्लाह मै तुम्हारे चेहरे से शरण चाहता हूँ)|” और फिर ये आयत पढ़ी  “ या तुम्हे साम्प्रदायों में कर के एक को दुसरे के आक्रमण का स्वाद चखा दे|” तो नबी ने कहा ये पहले अज़ाबों से हल्का या आसान है[सहीह बुखारी, किताब 65, हदीस 4628]

 

मुजाहिद के हवाले से शेक अलअ सबहानी रहिमाहुल्लाह ने इस आयत के तफसीर में कहा: “कहो: वह इस का सामर्थ्य रखता है कि वह कोई यातना तुम्हारे ऊपर (आकाश) से भेज दे” : (इसके अर्थ) अल सैह  (चीख या हंगामा), पत्थर और प्रबल हवा; “या तुम्हारे पैरों के नीचे (धरती) से”, (इसका अर्थ) भूकंप और धरती निगलजाना|  

 

इन दिनों जो भूकंप आ रहे है, वह अल्लाह की निशानी है, जो उसने अपने बन्दों को डराने के लिए प्रयोग कर रहा है| यह जो भूकंप और दूसरी आपत्तियाँ आ रही है, वह शिर्क और दूसरे गुनाहों के कारण आ रही है|

 

अल्लाह खुरआन में फरमाते है : “और जो भी दुःख तुमको पहुँचता है वह तुम्हारे अपने करतूत से पहुँचता है| तथा वह क्षमा कर देता है तुम्हारे बहुत से पापों को|” [खुरआन सूरा शूरा 42:30]

 

“(वास्तविक्ता तो यह है कि) तुम को जो सुख पहुँचता है वह अल्लाह की ओर से होता है| तथा जो हानि पहुँचती है वह स्वयं (तुम्हारे कुकर्मों के) कारण होती है|” [खुरआन सूरा निसा 4:79]

 

क्षमा (माफ़ी) चाहना

जब भी कोई भूकंप या सूरज ग्रहण, चाँद ग्रहण होता है, या तेज़ हवायें, तूफ़ान इत्यादि आते है- उस समय इंसान को अल्लाह के आगे गिडगिडा कर क्षमा (माफ़ी) और सुरक्षा की भीक (दुआ) मंगनी चाहिए|  जब ग्रहण होता हुआ उस समय अल्लाह के रसूल  ने फरमाया : “तुम्हे ऐसा कुछ नज़र आये तो, अल्लाह को याद करने में तेज़ी करो, उसको पुकारो और उस से क्षमा (माफ़ी) चाहो|” [सहीह बुखारी 1059, सहीह मुस्लिम 912]

 

अल्लाह खुरआन में फरमाते है : “और आप से पहले भी समुदायों की ओर हम ने रसूल भेजे, तो हम ने उन्हें आपदाओं और दुखों में डाला ताकि वह विनय करे| तो जब उन पर हमारी यातना आई, तो वह हमारे समक्ष झुक क्यों नहीं गए? परन्तु उन के दिल और भी कड़े हो गए, तथा शैतान ने उन के लिए उन के कुकर्मों को सुन्दर बना दिया| तो जब उन्होंने उसे भुला दिया जो याद दिलाये गए थे, तो हम ने उन पर प्रत्येक (सुख सुविधा) के द्वार खोल दिए| यहाँ तक कि जब जो कुछ वह दिए गए उस से प्रफुल्ल हो गए, तो हम ने उन्हें अचानक घेर लिया, और वह निराश हो कर रह गए|” [खुरआन सूरा अनाम 6:42-44]

 

इसलिए फुकहा (रहिमहुल्लाह) इसे मुस्तहब (अनुशंसित) कहते है - कि जब भूकंप या सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण हो तो, ज्यादा से ज्यादा अल्लाह से क्षमा की दुआ करे और दान करे|

 

क्या उस समय पढ़ने की प्रत्येक दुआ है?

भूकंप के समय, कुछ प्रत्येक दुआ का ज़िकर सुन्नत से साबित नहीं है| बल्कि उस आपत्ति के समय हर एक को अल्लाह से क्षमा भी मांगना चाहिए और आपत्ति को दूर करने की दुआ भी करना चाहिए|  

 

दान करना

ग़रीब और आवश्यकता वाले लोगों (अभावग्रस्त) को दान करना मुस्तहब (अनुशंसित) है, क्योंकि अल्लाह के रसूल  ने फरमाया : “दया कीजिये, तुम पर दया की जाएगी|” [इमाम अहमद 2/165]

 

“जो दूसरों पर दया करते है, अल्लाहु ताला उन पर दया करता है| तुम यदि धरती पर रहने वालों पर दया करोगे तो आकाश पर रहने वाला तुम पर दया करेगा|” [अबू दावूद 13/285, तिरमिज़ी 6/43]

 

“जो कोई दया नहीं करता, उस पर दया नहीं की जाएगी|” [सहीह बुखारी 5/75, सहीह मुस्लिम 4/1809]

 

जब भी भूकंप आता तब, उमर इब्न अब्दुल अज़ीज़ रहिमहुल्लाह अपने राज्यपालों को दान करने का आदेश देते थे|   

 

समाज से मूर्खता पूर्ण कार्य हटाना चाहिए

“तथा ईमान वाले पुरुष और स्त्री एक दूसरे के सहायक है| वह भलाई का आदेश देते तथा बुराई से रोकते है, और नमाज़ की स्थापना करते तथा ज़कात देते है| और अल्लाह तथा उसके रसूल की आज्ञा का पालन करते है| इन्ही पर अल्लाह दया करेगा, वास्तव में अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वज्ञ है|”  [खुरआन सूरा तौबा 9:71]

 

“.....और अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा, जो उस (के सत्य) की सहायता करेगा, वास्तव में अल्लाह अति शक्तिशाली प्रभुत्वशाली है| यह वह लोग है कि यदि हम इन्हें धरती में अधिपत्य प्रदान कर दे, तो नमाज़ की स्थापना करेंगे और ज़कात देंगे, तथा भलाई का आदेश देंगे, और बुराई से रोकेंगे, और अल्लाह के अधिकार में है सब कर्मो का परिणाम|” [खुरआन सूरा हज 22:40-41]

 

“....और जो कोई डरता हो अल्लाह से तो वह बना देगा उस के लिए कोई निकलने का उपाय| और उसको जीविका प्रदान करेगा उस स्थान से जिसका उसे अनुमान (भी) न हो| तथा जो अल्लाह पर निर्भर रहेगा तो वाही उसे पर्याप्त है.......|” [खुरआन सूरा तलाख 65:2-3]

 

इस्लामी विद्वाम्सों का दृष्टिकोण

बहुत प्रसिध्ध इस्लामी विद्वाम्स, ज़करिया अल अंसारी रहिमहुल्लाह ने कहा : जब भूकंप या ऐसी कोई दूसरी आपत्ति आये तो उस समय अल्लाह से दुआ (प्रार्थना) करना मुस्तहब (अनुशंसित) है| तेज़ हवा चलते समय अल्लाह के रसूल  ने फ़रमाया : “ऐ अल्लाह! मै तुझसे इसकी (तेज़ हवा) भलाई को चाहता हूँ, इसमें जो भलाई है उसे चाहता हूँ और इसे भेजे जाने वाली भलाई चाहता हूँ| तथा मै तुझसे इसके हानि से शरण चाहता हूँ, इसमें जो हानी है उस से शरण चाहता हूँ और इसे भेजे जाने वाली हानि  से शरण चाहता हूँ|” [सहीह मुस्लिम 899]    

 

शेक इब्न बाज़ रहिमहुल्लाह ने कहा : भूकंप, ग्रहण, तेज़ हवा इत्यादी विपत्कालीन समय में अल्लाहु ताला की प्रशंसा करनी चाहिए तथा उससे प्रार्थना (दुआ) करनी चाहिए तथा उस से क्षमा की भीक मांगनी चाहिए तथा अल्लाहु ताला को अधिक से अधिक स्मरण करना चाहिए| ग्रहण के समय अल्लाह के रसूल  ने फ़रमाया : “जब तुम उसे (ग्रहण) को देखो तो, अल्लाह का स्मरण करना शुरू करदो और उस से क्षमा (माफ़ी) की भीक मांगो|” [सहीह बुखारी 1059, सहीह मुस्लिम 912, सुनन नसाई 1496, 1503]

 

आपत्ति के समय में दान करना चाहिए 

ग़रीब और आवश्यक लोगों को सहायता करना भी मुस्तहब (अनुशंसित) है| उन्हें दान भी करना चाहिए| अल्लाह के रसूल  ने फ़रमाया : “दया दिखायिये, आप पर दया दिखाई जाएगी|”[मुसनद अहमद]

 

अल्लाह के रसूल   ने ऐसा भी कहा : “जो दया दिखाते है उन पर अल्लाहु ताला दया दिखता है| तुम धरती पर के लोगों पर दया दिखाओ, आकाश वाला (अल्लाहु ताला) तुम पर दया दिखायेगा|” [तिरमिज़ी]

 

अल्लाह के रसूल  ने ऐसा भी कहा : “जो दया नहीं करता, उन पर दया नहीं की जाएगी|” [सहीह बुखारी 5997, सहीह मुस्लिम 2318]

 

“तथा ईमान वाले पुरुष और स्त्री एक दूसरे के सहायक है| वह भलाई का आदेश देते तथा बुराई से रोकते है, और नमाज़ की स्थापना करते तथा ज़कात देते है| और अल्लाह तथा उसके रसूल की आज्ञा का पालन करते है| इन्ही पर अल्लाह दया करेगा, वास्तव में अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वज्ञ है|”  [खुरआन सूरा तौबा 9:71]

 

“.....और अल्लाह अवश्य उसकी सहायता करेगा, जो उस (के सत्य) की सहायता करेगा, वास्तव में अल्लाह अति शक्तिशाली प्रभुत्वशाली है| यह वह लोग है कि यदि हम इन्हें धरती में अधिपत्य प्रदान कर दे, तो नमाज़ की स्थापना करेंगे और ज़कात देंगे, तथा भलाई का आदेश देंगे, और बुराई से रोकेंगे, और अल्लाह के अधिकार में है सब कर्मो का परिणाम|” [खुरआन सूरा हज 22:40-41]

 

“....और जो कोई डरता हो अल्लाह से तो वह बना देगा उस के लिए कोई निकलने का उपाय| और उसको जीविका प्रदान करेगा उस स्थान से जिसका उसे अनुमान (भी) न हो| तथा जो अल्लाह पर निर्भर रहेगा तो वाही उसे पर्याप्त है.......|” [खुरआन सूरा तलाख 65:2-3]

 

आधार

http://islamqa.info/en/121254(english)

http://islamqa.info/en/2593(english)

 

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