जुल हिज्जह

जुल हिज्जह इस्लामी तालिका (calendar) का अंतिम महीना है| यह एक सम्मानित महीना है| इस से साल का अंत होता है| इसी माह में हज किया जाता है|

जुल हिज्जह का अर्थ होता है, ‘तीर्थ यात्रा की संभावना’| इस समय हज के लिए सारे संसार के तीर्त यात्री (हाजी) मक्का में एकत्रित होते है| वास्तविक हज के अरकान (रस्म) इस माह के 8 और 13 तिथि के बीच होते है| अरफा का दिन 9 तिथि को होता है| ईद उल अजहा (बकरीद) का दिन 10 को आरम्भ हो कर 13 को समाप्त होता है| [1]

विषय सूची

परिचय

ज़ुल हिज्जह एक सम्मानित और पवित्र महीना है, जिसमे हज (मक्का का तीर्थ यात्रा) होता है| इस माह में अल्लाह के कई अनुग्रह है तथा अल्लाह लोगो की आवश्यकताओं को पूरा करता है| “शपथ है भोर की ! तथा दस रात्रियों की ! और जोड़े तथा अकेले की !” [खुरआन सूरा फज्र 89:1-3] अधिकतर इस्लामी विद्वाम्स यह कहते है कि, अल्लाह ने इस आयत में जो रातों का प्रस्ताव किया है, वह जुल हिज्जअ की रातें ही है| [तफसीर इब्न कसीर, खुरआन सूरा फज्र 89:2]

जुल हिज्जह का मौसम उपासना का मौसम है| उपासना का मौसम अनुग्रह, अवसर लाता है, जिस से मनुष्य को अपने गलतियों को सुधारने का मौका मिलता है| यह विशेष अवसर उपासना के रूप में होते है, जो इन्सान को ईश्वर (अल्लाह) के निकट ले जाते है| अल्लाह ताला अपने अनुग्रह देता है जिसे चाहता है| वह इन्सान भाग्यवान होता है, जो इस अवसर का लाभ उठाते हुए इन पवित्र माह में, दिन में, क्षणों में, अल्लाह की उपासना करता है| वह अल्लाह ताला के अनुग्रह का पात्र बनने का पूरा हक़दार होता है| [इब्न रजब, अल लताइफ pp 8]

 

सुन्नत

अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा कि, इस माह के पहले दस दिन उपासना के लिए बहुत विशिष्ठ है| जो हज नहीं कर रहे है, उनके लिए भी यह दस दिन बहुत महत्वपूर्ण है| वह भी इन दिनों में अधिक से अधिक समय अल्लाह की उपासना करते हुए और अच्छे कर्म करते हुए बिताना चाहिए| जुल हिज्जह के पहले दस दिनों को खुरआन में ‘लयाली अशरा’ कहा गया है [खुरआन सूरा फज्र 89:2], और 11,12,13 जुल हिज्जह को ‘अय्यामे तशरीख’ कहा जाता है|

 

इस्लामी रस्म (नियम) जुल हिज्जह के

8 – 13 तिथि तक हज किया जाता है|

9 जुल हिज्जह, अरफा का दिन|

10 तिथि को ईद उल अजहा मनाया जाता है|

11 – 13 अय्याम अल तशरीख (ईद के बाद के तीन दिन) [2]

 

महत्व

जुल हिज्जह का महीना अत्यंत अनुग्रह पूर्ण महीना है| विशेष कर इस माह के पहले दस दिन का महत्व बहुत अधिक है| इब्न अब्बास रजिअल्लाहुअन्हु से उल्लेखित है कि, अल्लाह के रसूल ने कहा : “यह दिन (जुल हिज्जह के पहले दस दिन) के अच्छे कर्म अल्लाह को दूसरे दिनों के कर्मो से ज़्यादा पसंद है|” सहाबा (आप के साथियों) ने पूछा : “क्या अल्लाह के राह में जिहाद (युध्ध करने) से अधिक?” (अर्थात अल्लाह के राह में जिहाद से भी अधिक), जो अल्लाह की राह में अपना धन और प्राण लगा दे और कुछ भी बाकी न रहे (धन और प्राण) (यानी वीरगति (शहादत) प्राप्त करना)|” [सहीह बुखारी vol 2:457]

अल्लाह ताला को जुल हिज्जह के पहले दस दिनों में किये गए अच्छे कर्म, दूसरे दिनों के कर्म से ज्यादा प्रिय है|” इसलिए इन दिनों में “ला इलाहा इल्लल्लाह, अल्लाहु अकबर, अल हम्दु लिल्लाह, सुब्हानल्लाह”|

इस से यह पता चलता है कि, जुल हिज्जह के पहले दस दिन पूरे साल के दस दिनों में अत्यंत श्रेष्ठ है, यहाँ तक कि, रमज़ान के अंतिम दस दिनों से भी| किन्तु रमज़ान के अंतिम दस रात्रि ९रात) सबसे श्रेष्ठ है| क्यों कि उनमे “लैलतुल कद्र (सम्मानित रात्रि)” है| यह रात्रि हज़ार महीनो से श्रेष्ठ है| यह सब चर्चा सामंजस्य है| [तफसीर इब्न कसीर vol 5/412]

अल्लाह के रसूल ने सारे संसार के लोगो को इन दिनों की विशिष्ठता के कारण अच्छे कर्म करने के लिए प्रोत्साहित किया और उस प्रदेश (मक्का, काबा) के कारण हज करने वाले लोगो को – हुज्जाज – को भी प्रोत्साहित किया|

अब्दुल्लाह इब्न उमर रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, अल्लाह के रसूल ने कहा : “अल्लाह के नज़र में अच्छे कर्म करने के लिए, इन दस दिनों (जुल हिज्जह के पहले दस दिन) से ज्यादा श्रेष्ठ दिन नहीं है| इसलिए इन दिनों में अधिक से अधिक तस्बीह (सुब्हानल्लाह), तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह), तकबीर (अल्लाहु अकबर) और तह्मीद (अल्हम्दु लिल्लाह) कहना चाहिए|” [मुसनद अहमद vol 7:224]

 

अरफा के दिन का उपवास

अबू खतादह रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि, अल्लाह के नबी ने कहा : “अरफा के दिन उपवास रखना (पापों का) परिहार है दो वर्ष का, जो वर्ष बीत गया और जो वर्ष आने वाला है|” [सुनन नसई vol 4:205 और अबू दावूद – शेक अल्बानी ने इसे प्रमाणित किया – सहीह अबू दावूद vol 2:462]

 

पहले दस दिन के निर्धरित कर्म

यह दस दिन अल्लाह ताला की ओर से अनुग्रहित दिन है| इसीलिए इन दिनों में अच्छे कर्म अधिक से अधिक करनी चाहिए| इन दिनों में किये जाने वाले अच्छे कर्म :

1 उपवास : जुल हिज्जह के 9 तिथि को उपवास रखना सुन्नत है| (सुनन नसई vol 4:205)

2 जिकर करना : तकबीर, तशरीक पढ़ना, अर्थात – अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह वल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर वलिल्लाह हिल हम्द – हर फ़र्ज़ (अनिवार्य) नमाज़ के बाद, 9 तिथि जुल हिज्जह फज्र नमाज़ से 13 तिथि जुल हिज्जह असर नमाज़ तक| (शमी vol 1,पेज 406)

3 पशु बलि (क़ुरबानी) : “और ताकि अल्लाह का नाम ले निश्चित दिनों में उस पर जो उन्हें प्रदान किया है पालतू चौपाये में से|” (खुरआन सूरा हज 22:28) अधिकतर उलमा (इस्लामी विद्वाम्स) यही मानते है कि, ‘निश्चित दिनों’ का अर्थ जुल हिज्जह के पहले दस दिन| क्यों कि, इब्न अब्बास रजिअल्लाहुअन्हु का कहना है : “‘निश्चित दिन’, जुल हिज्जह के पहले दस दिन है|”        

4 हज और उमरह करना : इन दस दिनों में किये जाने वाले कर्मो में सबसे श्रेष्ठ कर्म, हज करना (काबा की यात्रा) है|

5 शुध्ध पश्चात्ताप : इन दस दिनों में करने वाले प्रत्येक कर्म में, अल्लाह से शुध्ध पश्चात्ताप और सारे पाप (गलत) कार्य को छोड़ देना भी है| [3]

 

आधार

[1] http://www.aimnewlife.com/(english)

[2] http://www.ahya.org/amm/modules.php?name=Sections&op=viewarticle&artid=116(english)

[3] http://islamqa.info/en/ref/books/66(english)

 

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