गर्भावस्था (Pregnancy)

स्त्री पर अल्लाह ताला ने एक महान कृपा की है| वह यह है कि, स्त्री को अल्लाह ने शिशु को जन्म देने की शक्ति दी है|

 

विषय सूची

 

खुरआन

“वही है जिसने तुम्हें अकेली जान पैदा किया और उसी की जाति से उसका जोड़ा बनाया, ताकि उसकी ओर प्रवृत्त होकर शान्ति और चैन प्राप्त करे। फिर जब उसने उसको ढाँक लिया तो उसने एक हल्का-सा बोझ उठा लिया; फिर वह उसे लिए हुए चलती-फिरती रही, फिर जब वह बोझिल हो गई तो दोनों ने अल्लाह - अपने रब को पुकारा, "यदि तूने हमें भला-चंगा बच्चा दिया, तो निश्चय ही हम तेरे कृतज्ञ होंगे।" [खुरआन सूरा आरफ 7:189]

 

परिचय

गर्भावस्था कुछ महिलाओं के लिए कठिन हो सकता है, किन्तु हर एक के लिए नहीं| हर माँ यह चाहती है कि, उसके शिशु को कोख के अन्दर अच्छे से अच्छा पोषण मिले| यह कई प्रकार से हो सकता है :

स्वयं माँ के द्वारा – स्वास्थ्य तथा आरोग्य वाला जीवन बिताकर|   

स्वास्थ्य सेवा द्वारा दिए जाने वाले प्रसवपूर्व प्रणाली पर पालन करना|

परिवार द्वारा – सहायता अथवा सहयोग|

गर्भावस्था लगभग 40 सप्ताह रहती है| इस विशय में एक महिला से दूसरी महिला में अंतर होता है| इसके कई कारण होते है, स्वास्थ्य इत्यादि|  

 

गर्भावस्था के साधारण संकेत

गर्भावस्था के संकेत को पहचानना बहुत आवश्यक है| गर्भावस्था के पहले 10 सप्ताह के कुछ संकेत : [1]

मासिक धर्म रुक जाना (बहुत साधारण)

उलटी, खइ

मूत्र विसर्जन अधिक होना

तापमान बढ़ जाता है

सरदर्द

बेहोशी

पसीना निकलना

यदि इन चीज़ों में से कुछ आप को प्रतीत हो तो तुरंत डाक्टर के पास जाये| जहाँ पर आप आसानी से गर्भ का टेस्ट करा सकते है| गर्भ का पता मूत्र टेस्ट में 8 वे दिन ही पता चल जाता है|

 

प्रसवपूर्ण प्रणाली

एक बार जब पता चल जाये कि, महिला गर्भ से है, तो उसका ध्यान रखना और डाक्टर से लगातार चक अप कराना आवश्यक है| इस से माँ और बच्चे दोनों का देखभाल होता रहता है| इसे साधारण रूप से प्रसवपूर्ण प्रणाली कहते है| इसमें माँ का स्वास्थ चरित्र, मलमूत्र परीक्षा तथा आधुनिक तकनीक द्वारा कई परीक्षाएं की जाती है| [3]  यह सब करने से माँ और शिशु के स्वास्थ्य का निरंतर पता चलता रहता है|

 

शिशु का स्वास्थ्य

आधुनिक तकनीक की परीक्षायें करने से शिशु के विकास का पता चलता है, और यदि उसमे कुछ कमी हो तो उसका उपचार किया जा सकता है| माँ के स्वास्थ्य के विषय में अधिक ध्यान देना आवश्यक, इसलिए भी है कि, उस से शिशु के स्वास्थ्य पर प्रभाव होता है| जैसे :

भोजन :अधिक पौष्टिक भोजन का लेना आवश्यक है| [1] [3] [4]

धूम्रपान : धूम्रपान अनेक क्षति तथा हानि का कारण है| इस के कारण गर्भपात, अपरिक्त शिशु का जन्म आदि होता है|

अभ्यास : अधिक अभ्यास से बचना चाहिए| माँ के शारीरिक तापमान में वृध्धि के कारण शिशु को कई प्रकार की हानि पहुँच सकती है| नियमित अभ्यास करने से माँ तथा शिशु को लाभ पहुँचता है|

वैद्य सम्बन्धी चरित्र : जिस स्त्री को वैद्य सम्बन्धी समस्यायें हो, वह अपने डाक्टर को पहले ही हर विषय के बारे में बता देना चाहिए, ताकि उसकी चिकित्सा करने में कोई अवरोध न हो|

 

गर्भावस्थामें होने वाली सर्व साधारण समस्याये

गर्भ के समय महिला के भीतर कई परिवर्तन होते है| यह एक गर्भिणी के लिए सर्व साधारण है|

स्त्री का वज़न बढ़ना अति साधारण विषय है| 40 सप्ताह तक 1 किलो वज़न बढ़ जाता है| [1] [3] [5]

CARDIOVASCULAR SYSTEM : दिल की धड़कन लग भग एक मिनट में 15 तक बढ़ जाती है| कई गर्भिणी स्त्री के पैर का निचला भाग और टखने में सुजन आता है| यह आराम करने से कम हो जाता है|

GASTROINTESTINAL SYSTEM : दिल में जलन, उलटी होना साधारण समस्यायें है| इसलिए मसालेदार भोजन, अधिक भोजन करने से बचना चाहिए| इस से पेट खराब होता है| [1] [6] मलावरोध, कब्ज़ भी सर्व साधारण है| इस से बचने के लिए अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए|

GENTINO-URINARY SYSTEM : गर्भ में शिशु बढ़ना आरम्भ होते ही, उसके दबाव से मूत्र का अधिक आना तथा तेज़ी से आना बढ़ जाता है| [1] [4] [6]

RESPIRATORY SYSTEM : सास की बढ़ोतरी और कमी के कारण, श्वास लेने में असुविधा होती है|

SKIN - त्वचा : कुछ गर्भिणी स्त्री को त्वचा पर खुजली होती है| विशेष रूप से आखों के पास, गाल पर, स्तनाग्र (स्तन का अगला भाग) और पेट के उदार भाग में बहुत होती है| पेट फैलने के कारण उदार भाग में कुछ निशान आते है| [1] [6]    

MUSKULOSKELETAL SYSTEM : पीट में दर्द सर्व साधारण विषय है| विशेष रूप से पीट के निचले भाग में| सख्त चीज़ पर लेटना और सीधे ठहरना लाभदायक होता है|

OTHER CHANGES (अन्य परिवर्तन) : दूध आने के कारण वक्षस्थल बढ़ते है| सर दर्द, पसीना अधिक आना, मूर्छ (बेहोश) हो जाना सर्व साधारण विषय है| पैर में दर्द और विशेष र्रोप से रात के समय बढ़ जाता है| यह गर्भावस्था के दूसरे चरण में होता है| चारपाई, पलंग, शयन कक्ष को 30 cm उठाने से इस समस्या का समाधान हो सकता है| [1] [3] [6]    

 

साधारण जटिलतायें

जब भी शरीर में कुछ बड़ा परिवर्तन होता है तो उस से समस्या भी बढ़ जाती है| अधिकतर गर्भावास्तायें कोई समस्या के बिना ही समाप्त हो जाते है| कुछ विषयों में बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, किन्तु प्रस्तुत काल के आधुनिक निदानार्थ परीक्षण (diagnostic techniques) के कारण, उन जटिल समस्याओं का समाधान मिल सकता है|

 

भोजन पट्टिका

माँ के पौष्टिक आहार, भोजन से शिशु का स्वास्थ्य अच्छा रहता है| कोई जादू भोजन पट्टिका नहीं होती| गर्भावस्था में भोजन के मूल नियम वही होते है जो साधारण समय के होते है| जैसे – फल अधिक खाना, सब्जी, तरकारी तथा सारे पौष्टिक आहार लेना चाहिए|

भोजन के छः भाग किये जा सकते है :

1 रोती, चावल आदि

2 सब्जी, तरकारी

3 फल

4 दूध

5 मांस, मुर्गी, मछली, अंडा आदि

6 वसा (Fat), तेल (Oil), मिठाई आदि

 

गर्भावस्था के सद्गुण

माखिल इब्ने यस्सार रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया : एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल के पास आया और बोला : मैंने एक स्त्री को देखा, जो उच्च परिवार की है और सुन्दर भी है, किन्तु बच्चे पैदा नहीं कर सकती, क्या मैं उससे विवाह करूँ? आप ने कहा : “नहीं|” वह व्यक्ति दूसरी बार भी आया, और आप ने उसे मना किया| जब वह व्यक्ति तीसरी बार आया, तो आप ने कहा : “उस से विवाह करो जो तुम से प्रेम करती हो और कई बच्चे पैदा कर सकती हो| तुम में अधिक संतान वालो को देखकर मुझे गर्व होगा|” [अबू दावूद 2050 ; नसाई 3227 ; शेख अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इसे सहीह कहा]

जिस स्त्री का प्रसव के समय देहांत होता है, वह वीरगति (शहादत) का स्थान प्राप्त करती है| इस से गर्भिणी महिला के विशिष्ठता का पता चलता है| अल्लाह के रसूल ने कहा : “जिसस्त्री का गर्भावस्था या प्रसव के समय देहांत होता है, वह शहीद (वीरगति प्राप्त कर लेती) है|” [सुनन नसाई 3163 ; अबू दावूद 3111 ; शरह मुस्लिम (13/62) में नववी रहिमहुल्लाह ने इसे सहीह कहा| और उन्होंने कहा : जो प्रसव के समय मृत्यु पाती है, अर्थात – कुछ भीतर लेकर मरती है (शिशु को), उस से जुदा नहीं होता| [c]  

 

गर्भ के बारे में पति से छुपाना निषेधित है

अल्लाह ताला ने कहा : “....उनके लिए हलाल (वैध) नहीं है कि अल्लाह ने जो उनके गर्भाशयों में पैदा किया है, उसे छुपायें....|” [खुरआन सूरा बखरह 2:228]

 

शिशु जन्म लेते ही क्यों रोता है

सैद बिन अल मुसैब ने कहा : अबू हुरैरह रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया, “मैंने अल्लाह के रसूल को यह कहते हुए सुना, “आदम की संतान में ऐसा कोई पैदा नहीं हुआ, जिसे शैतान ने न छुआ हो| इसीलिए शिशु जन्म के समय ऊँची आवाज़ में रोता है, क्यों कि शैतान उसे छूता है, सिवाय मरयम अलैहिस्सलाम और उनके बेटे (ईसा अलैहिस्सलाम) के|” उसके उपरांत अबू हुरैरह रजिअल्लाहुअन्हु ने खुरआन की यह आयत (वचन) पढ़ी : “....और मैं उसे तथा उसकी संतान को धिक्कारे हुए शैतान से तेरी शरण में देती हूँ|” [खुरआन सूरा आले इमरान 3:36] [सहीह बुखारी 3431 (vol 4:641)] [d]      

 

जन्म के समय क्या करना चाहिए

1 तहनीक : शिशु जब जन्म लेता है, तहनीक सुन्नत है (खजूर शिशु के मुँह में डालना)| [सहीह बुखारी 5153 ; सहीह मुस्लिम 2144]           

2 नामकरण : शिशु को अच्छा नाम देना चाहिए, जैसा – अब्दुल्लाह, अब्दुल रहमान| [सहीह मुस्लिम 2132, 2315]

3 सर के बाल कटाना (मुंडवाना) : जन्म के 7 वे दिन शिशु के सर के बाल मुंडवाना चाहिए और उसके तोल (वज़न) के बराबर (समान) चाँदी दान करना चाहिए| [तिरमिज़ी 1519, शेख अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इसे हसन कहा – सहीह तिरमिज़ी 1226]

4 अकीका : हर शिशु पर जन्म के 7 वे दिन पशु बलि का संकल्प, प्रतिज्ञा है| उसका सर मुंडा जाये और उसे नामकरण किया जाये|” [अबू दावूद 2838, शेख अल्बानी रहिमहुल्लाह ने इसे सहीह कहा – सहीह अल जामि 4541]

लड़के के लिए दो बकरे और लड़की के लिए एक| [तिरमिज़ी 1513, सहीह तिरमिज़ी 1221, अबू दावूद 2834, नसाई 4212, इब्न माजह 3163]

5 खतना (परिशुध्ध करना) : “फितरह (प्राकृतिक स्वभाव) में पाँच चीज़ है या फितरह में पाँच चीज़ आते है : खतना (परिशुध्ध करना), गुप्तांग के बाल निकालना, बगल के बाल निकालना, नाखून निकालना, मूछ छोटे करना|” [सहीह बुखारी 5550, सहीह मुस्लिम 257]

 

बच्चों के लिए अल्लाह की शरण की प्रार्थना करना

अल्लाह के रसूल हसन और हुसैन के लिए अल्लाह के शरण की प्रार्थना इस तरह से करते थे : (बुरी नज़र से बचने की दुआ) “उईजुकुमा बिकलिमातिल्लाहित्ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिन व हाम्मातिन व मिन कुल्लि ऐनिन लाम्मातिन”

अर्थ : “मैं तुम्हारे लिए अल्लाह के परिपूर्ण शब्द से शरण चाहता हूँ, हर शैतान और हर जानवर और हर बुरी नज़र से|” [सहीह बुखारी vol 4:119] [e]

 

नएमाता पिता को किस तरह शुभकामना देनी चाहिए और वह इसका उत्तर कैसे दे

(चाहे लड़का हो या लड़की) यह दुआ पढनी चाहिए : “जअलहुल्लाहु मुबारकन अलैक व अला उम्मति मुहम्मद”

[इस शिशु को अल्लाह तुम पर और मुहम्मद के उम्मत (समुदाय) पर शुभ (सौभाग्यशाली, वरदान) बनाये|] [यहया अल हुजूरी ने प्रमाणित किया – तह्खीख किताबो उसूल उल अमानी बि उसूली अत ताहानी – इमाम सुयूती रहिमहुल्लाह, किताब उद दुआ, तबरानी vol 1:294 & 945, अल अयल इब्ने अबी दुनिया vol 1:366 & 202]

 

गर्भपात(abortion) इस्लामी विद्वाम्सो की दृष्टी में

इस्लामी विद्वाम्सो की एक वरिष्ठ दल ने यह वर्णन दिया है :

1 गर्भपात (abortion) किसी भी हाल में वैध नहीं है| परन्तु कुछ उचित (जायज़) कारण हो तो कर सकते है|     

2 यदि गर्भ पहले चरण (प्रारंभ के दिन, अर्थात 40 दिन) का हो और उचित कारण (अर्थात, कोई बड़ी हानि से बचने के लिए) हो तो गर्भपात की अनुमति है| परन्तु बच्चों की परवरिश से डरकर, या बच्चे बहुत होने के कारण, कोई ऐसा करे तो, यह अवैध है|

3 गर्भ के दूसरे या तीसरे चरण में गर्भपात की अनुमति नहीं है| यदि माँ के प्राण को हानि हो और यह विषय विश्वसनीय डाक्टरों द्वारा पता चले तो, उस समय गर्भपात की अनुमति है|

4 तीसरे चरण या चौथे माह के बाद गर्भपात की अनुमति नहीं है| केवल उसी समय जब विश्वसनीय डाक्टरों ने कहा हो कि, गर्भिणी स्त्री के प्राण को हानि है, तो उस समय इसकी अनुमति है| [अल फतावा अल जामिअ 3/1056] [f]    

 

आधार

[a] PREGNANCY, Originally written by  Sr. Anilla Asghar, http://www.muslimhealthnetwork.org/ht_pregnancy.shtml

1. The Oxford Handbook of Clinical Specialities; 6th Edition; Colllier J., Longmore M.

2. Principles of Anatomy and Physiology; 9th Edtition; Tortora GJ., Grabowski S.

3. Obstetrics by Ten Teachers; 17th Edition; Campbell S., Lees c.

4. Obstetrics and Gynaecology; Medical Protection Society Publication

5. A Survivors Handbook of Obstetrics and Gynaecology; Hanretty KP.

6. Clinical Medicine; 4th Edition; Kumar P., Clark M.

7. Obstetrics and Gynaecology; Impey L.

[b] http://www.womenandinfants.org/pregnancyplanner/nutrition-in-pregnancy.cfm

[c] http://islamqa.info/en/161204

[d] http://muttaqun.com/pregnancy.html

[e] http://islamqa.info/en/20064

[f] http://islamqa.info/en/42321

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