इस्लामी कालेंडर या हिजरी कालेंडर


इस्लामी कालेंडर या हिजरी कालेंडर चंद्रमा के अंसार चलती है| इसमें 12 माह होते है, जो चन्द्रमा के चलने पर आधारित होते है| इस्लामी कालेंडर सौर कालेंडर से लगभग 10 दिन कम होता है| [1]

 

विषय सूची

 

साल को नाम देना

अरब में इस्लाम आने से पहले लोग साल का नाम, उस साल जो महत्वपूर्ण घटना घटती थी, उस पर रखा करते थे| इस्लामी परम्परा के प्रकार अब्रह नाम का एक व्यक्ति, जो यमन पर शासन करता था (यमन ईसाई राज्य – इथियोपिया - का हिस्सा था)| उस ने काबा पर अपने सैनिको और कई हाथियों के साथ हमला किया| वह काबा को नष्ट करना चाहता था| वह अपने कोशिश में सफल नहीं हो पाया, लेकिन उस साल का नाम ‘हाथी का साल’ पढ़ गया| उसी साल अल्लाह के रसूल मुहम्मद का जन्म हुआ| अधिक लोग इसे 570 CE कहते है, पर कुछ लोग इसे 571 CE कहते है|  

 

अबू रेहान अलबिरुनी रहिमहुल्लाह ने कहा कि, हिजरा के पहले दस साल को गिनती नहीं दी गयी, परन्तु अल्लाह के रसूल मुहम्मद की ज़िन्दगी के कुछ मुख्य घटनाओं के नाम दिए गए|   

 

  1. अनुमति का साल
     
  2. युध्धादेश का साल
     
  3. आज़मायिश का साल
     
  4. शादी पर मुबारक का साल
     
  5. भूकंप का साल
     
  6. जांच का साल
     
  7. विजय पानेका साल
     
  8. समानता का साल
     
  9. क्षमा का साल
     
  10. विदाई का साल

 

638 CE (17 AH) में इस्लाम के खलीफा उमर रजिअल्लाहुअन्हु के एक अधिकारी जो बसरा में नियुक्त थे - अबू मूसा अशारी रजिअल्लाहुअन्हु ने उमर रजिअल्लाहुअन्हु से शिकायत की कि, कोई भी चिट्ठी में साल न लिखा हुआ रहने से उनको कुछ सन्दर्भ में कौनसी चिट्ठी पहली वाली है और कौनसी चिट्ठी बाद की है निर्णय करने में कठिनाई हो रही है| इस विषय की गंभीरता को देखते हुए, उमर रजिअल्लाहुअन्हु ने निर्णय किया कि, मुसलिम लोगों के लिए वर्ष का हिसाब रखना ज़रूरी है| उमर रजिअल्लाहुअन्हु ने अपने सलाहकारों से सलाह लेने के बाद ये तय किया कि, अल्लाह के रसूल मुहम्मद हिजरत करके जब मदीना (अल्लाह के रसूल मुहम्मद मदीना आने से पहले उस शहर को यात्रिब कहते थे)आये थे, उस साल से इस्लामी वर्ष का आरम्भ किया जाये| उस्मान बिन अफ्फान रजिअल्लाहुअन्हु ने सलाह दी कि, इस्लामी साल में मुहर्रम को पहला महीना बनाया जाये, क्यों कि उस समय अरब के लोग उसी प्रथा को मानते थे| इस तरह इस्लामी वर्ष, अल्लाह के रसूल मुहम्मद के हिजरत के साल से और मुहर्रम महीने से आरम्भ हुआ|हालांकि हिजरत सफ़र और रबी उल अव्वल के महीने में हुई थी| हिजरत से आरम्भ होने के कारण, इस्लामी कालेंडर को हिजरी कालेंडर कहा जाता है| अरबी शब्द हिजरत का अर्थ प्रवास करना है| [2]       

 

इस्लामी कालेंडर के माह

खुरअन के अनुसार इस्लामी कालेंडर में 12 माह होते है| खुरआन में अल्लाह ने इस तरह कहा : “वास्तव में महीनो की संख्या बारह महीने है अल्लाह के लेख में जिस दिन से उसने आकाशों तथा धरती की रचना की है| उन में से चार हराम (सम्मानित) महीने है...|” [खुरआन सूरा तौबा 9:36]

 

इस्लामी कालेंडर के बारह महीने यह है :

  1. मुहर्रम
     
  2. सफ़र
     
  3. रबी उल अव्वल
     
  4. रबी उल आखिर
     
  5. जुमादा अल ऊला
     
  6. जुमादा अल आखिरह
     
  7. रज्जब
     
  8. शाबान
     
  9. रमज़ान
     
  10. शव्वाल
     
  11. जुल खादा
     
  12. जुल हिज्जह [3]

 

पवित्र (सम्मानित) महीने

अल्लाह खुरआन में कहा रहा है कि, 12 महीनों है और उन में 4 पवित्र महीने है| उन चार पवित्र महीनो के नाम हदीस में बताये गए है : अबू बकर रजिअल्लाहुअन्हु ने उल्लेख किया कि अल्लाह के रसूल मुहम्मद ने कहा : “साल में बारह महीने होते है, उन में चार महीने पवित्र है| तीन महीने लगातार आते है – जुल खादा, जुल हिज्जह, मुहर्रम और चौथा महीना रजब है, जो जुमादा और शाबान के बीच आता है|” [सही बुखारी 3197, 4708, 5550 & सही मुसलिम 1679 & अबू दावूद 1947] [4]   

 

आधार, हवाला

[1] http://snahle.tripod.com/higri.htm (english)

[2] http://en.hamrohonim.net/ab-al-rayhn-muhammad-ibn-ahmad- (english)

[3] http://www.islamweb.net/emainpage/index.php?page=articles&id=155869 (english)

[4] http://www.sunnah.com/search/four-are-sacred (english)

 

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