अखीखा

शिशु जन्म लेने के 7 वे दिन, अल्लाह का धन्यवाद करते हुए, बकरा ज़ुबह (जन्तुबली) करने को अखीखा कहते है| अखीखा का मूल शब्द  (अरबी शब्द ‘अख्खा’) है| इसका अर्थ काटना है|

विषय सूची

इस्लामी परिभाषा

इस्लामी परिभाषा के अनुसार ‘अकीका’ का अर्थ नवजात शिशु के लिए दिए जाने वाली पशु बलि है| इसलिए कहा जाता है, क्यों कि उसका (पशु का) गला काटा जाता है| इसे ‘नसीकह’ (बलि) भी कहते है| [2]

“कई इस्लामी विद्वाम्स (उलमा) के अनुसार अकीका एक सुन्नत है| जैसे – इब्न अब्बास, इब्न उमर, आइशा रजिअल्लाहुअन्हुम| [अल मुघनी, 13/393-394] [3]

 

नवजात शिशु के जन्म के बाद करने वाले कार्य

1. लड़का हो तो यह दुआ पढ़े : “जलहुल्लाहु मुबारकन अलैक व अला उम्मति मुहम्मद |”

अर्थ : अल्लाह इस शिशु को आप पर और मुहम्मद की उम्मत (जाती) पर वरदान करे|

यदि लड़की हो तो यह दुआ पढ़े : “जलहुल्लाहु मुबारकतन अलैक व अला उम्मति मुहम्मद |”

यह दुआ हसन बसरी और अयूब अस सख्तियानी रहिमहुमल्लाह ने उल्लेख किया| [इसे यहया अल हुजूऊरि ने तह्खीख किताबो उसूल उल अमानी बी उसूलि अंत तहानी – इमाम सुयूती, किताब उद दुआ, तबरानी vol 1:294 & 945. अल अयल इब्न ए अबी दुनिया vol 1:366 & 202]     

2. तह्निक – कुछ मीठा खिलाना, जैसे कि, खजूर या शहद| नवजात जन्म लेते ही उसके मूह में यह डालन चाहिए| [सहीह बुखारी 5150, सहीह मुस्लिम 2145]

3. लड़का / लड़की को अच्छा नाम देना चाहिए| [सहीह मुस्लिम 3126]

4. जन्म के सात दिन बाद लड़का / लड़की के सर के बाल कटाना चाहिए| उन बालो को तोलकर, उसके बराबर चाँदी दान देना चाहिए| [तिरमिज़ी 1522 ; नसाई 4220 ; अबू दावूद 2838. इस हदीस को शेख अल्बानी ने अल इरवा 4/385 में सहीह कहा है]

5. लड़की के लिए एक बकरी और लड़के के लिए दो बलि देना चाहिए| [अबू दावूद 2842]

6. खतना (परिशुध्ध करना)| [सहीह बुखारी 5441]

 

सुन्नत

अल्लाह के रसूल ने कहा : “हर नवजात शिशु का अकीका गिरवी है| उसे 7 वे दिन करना चाहिए| उसके बाल काटना चाहिए और नाम रखना चाहिए|” [नसाई 4220 ; अबू दावूद 2838 ; तिरमिज़ी 1522 ; इब्न माजह 3165 ; शेख अल्बानी रहिमहुल्लाह ने सहीह अबू दावूद में इसे सहीह कहा]

आइशा रजिअल्लाहुअन्हा ने कहा : “अल्लाह के रसूल ने हसन और हुसैन का 7 वे दिन अकीका किया और उनका नाम रखा| [इब्न हिब्बान 12/127 ; अल हाकिम 4/264. इब्न हजर रहिमहुल्लाह ने फत्हुल बारी (9/589) में इसे सहीह कहा] [4]   

 

अकीका का निर्धारित समय

समुरह इब्न जुन्दुब ने उल्लेख किया कि, अल्लाह के रसूल ने कहा : “हर शिशु पर ‘अकीका’ गिरवी, बंधक है| पशु बलि 7 वे दिन देना चाहिए, शिशु का सर मुंडना चाहिए और उसे अच्छा नाम देना चाहिए|” [तिरमिज़ी 1522, इसे हसन सहीह कहा गया ; इब्न माजह 3165 ; सहीह इब्न माजह 2563] [5]

 

बलि पशु कैसा हो

आइशा रजिअल्लाहुअन्हा ने उल्लेख किया कि, अल्लाह के रसूल ने आदेश दिया की लड़के के लिए दो बकरे और लड़की के लिए एक बकरी की बलि देना चाहिए| [तिरमिज़ी- इसे हसन सहीह कहा, इब्न माजह 3163, सहीह तिरमिज़ी 1221] [6]

 

बलि पशु की स्थिति कैसे हो

इब्नुल अरबी अल मालिकी ने कहा : “अकीका का जानवर (पशु) ईद उल अज़हा (बकरीद) के जानवर जैसा होने की कोई प्रमाणित या अप्रमाणित (सहीह या ज़ईफ़) हदीस नहीं है| इसलिए जो इसका शर्त रखते है, वह केवल उपमान (गुमान) है, कोई प्रमाण नहीं| [फत्हुल मालिकिल माबूद – इब्न खिताब – 3/75]

 

बलि देने से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ

“बिस्मिल्लाही अल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्म लक व इलैक, हाज़िही अकीकतु फुलानिन (शिशु का नाम)” [बैहखी 497, इमाम नववी रहिमहुल्लाह ने इसे हसन कहा – अल मज्मुआ पेज 8/428] [7]

 

इस्लामी विद्वाम्सो का दृष्टिकोण

इमाम इब्नुल खय्यिम रहिमहुल्लाह ने कहा : अकीका के लाभ यह है : इस क़ुरबानी (पशु बलि) द्वारा शिशु का जन्म होते ही, उसे अल्लाह के करीब लाया जाना है| [8]

 

नवजातशिशुकेकानमेंअज़ानऔरइखामतदेना

इस विषय में दो अभिप्राय है| कुछ इसकी अनुमती दे रहे है और कुछ नहीं|

कुछ इसकी अनुमति इस कारण दे रहे है कि, शिशु जन्म लेते ही उसके दायें कान में अज़ान की आवाज़ गूंजने से, वह सबसे पहले इस संसार में तौहीद के बोल सुनगा और यह अच्छी बात है| बायें कान में इखामह के विषय में.....| [परन्तु शेख नासिरुद्दीन अल्बानी रहिमहुल्लाह के खोज के अनुसार अज़ान या इखामह नवजात शिशु के कान में देना अप्रमाणित है| इसका विवरण अल सिल्सिलत अल ज़यीफा 1/491 में है] [9]

 

बच्चों के लिये अल्लाह का शरण माँगना

अल्लाह के रसूल हसन और हुसैन के लिए अल्लाह से शरण इस तरह माँगा करते थे : (बुरी नज़र से बचने की दुआ) “अऊजु बि कलिमातिल्लाहित्ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिन व हाम्मतिन व मिन कुल्लि ऐनिन लाम्मतिन”|

अनुवाद : अल्लाह के परिपूर्ण शब्दों से मैं तुम्हारे लिए शरण चाहता हूँ - हर शैतान से, हर कठोरता से और हर बुरी नज़र से| [सहीह बुखारी vol 4:119] [10]

 

नवनीतम खोज

कुछ शक्कर को गाल के अन्दर लगाने से शिशु दिमागी व्याधियों से बचता है कहकर आज की नवनीतम खोज कहती है| न्यूज़लैंड (New Zealand) में 242 शिशुओं पर यह प्रयोग किया गया और उसके परिणाम के प्रकार वह कहते है कि यह शिशुओं के लिए पहला चिकित्सा होना चाहिए|    

एंडी कोल (Andy Cole), एक प्रतिभाशाली डॉक्टर ने कहा : यह एक आनंददायक तथा रोचक खोज है| ऐसे खोज जो शिशुओं के स्वास्थ के लिए उचित है, हम उसका अभिवादन करते है| [11]

इस्लाम प्रस्तुत साइंस (modern day science) से बहुत आगे है ; अल्लाह के रसूल ने यह सुन्नत जिसे ‘तह्निक’ कहते है 1400 साल पहले मानवता को दिया – शिशु के मूह में कुछ मीठी चीज़ डालना, जैसे- खजूर आदि| शिशु का जन्म होते ही मूह में डालना चाहिए| सहीह बुखारी 5150, सहीह मुसलिम 2145]

 

आधार

[1] http://www.fatwaislam.com/fis/index.cfm?scn=fd&ID=555

[2] http://www.qss.org/archives/aqeeqah.html

[3] http://www.bakkah.net/en/ruling-aqeeqah-obligation-recommended-sunnah.htm

[4] [8] [9] [10] http://islamqa.info/en/ref/7889/tahneek

[5] http://www.qss.org/archives/aqeeqah.html#N_22_

[6] http://www.quransunnah.com/modules.php?name=QNA&l_op=viewfatwa&lid=829

[7] http://www.alukah.net/sharia/0/46177/#ixzz3CPUIjgXq

[11] http://www.bbc.co.uk/news/health-24224206

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